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HAL की कार्यशैली सवालों के घेरे में, तीन साल और टली सुखोई एअरक्राफ्ट्स की डिलीवरी

एचएएल को 2016 में रफाल सौदे में शामिल नहीं किया गया था। फ्रांस की डसॉ एविएशन ने ऑफसेट क्‍लॉज के लिए अन्‍य भारतीय कंपनियों को चुना। इसका एक बड़ा हिस्‍सा अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस को मिला।

Author October 2, 2018 1:56 PM
एचएएल के द्वारा मार्च, 2017 तक रूसी मूल के 140 लड़ाकू विमान डिलीवर किए जाने थे। (Photo : Express Archive)

36 रफाल लड़ाकू विमान के सौदे पर विवाद के चलते हिंदुस्‍तान एयरोनॉटिक्‍स लिमिटेड (HAL) पहले ही चर्चा में हैं। अब पता चला है सार्वजनिक क्षेत्र का यह उद्यम भारतीय वायुसेना के लिए रूसी मूल के सुखोई Su-30 MKI एअरक्राफ्ट के निर्माण में तीन साल की देरी करेगा। आधिकारिक सूत्रों ने द इंडियन एक्‍सप्रेस को बताया कि HAL को मार्च 2017 तक 140 लड़ाकू विमानों की खेप सौंपनी थी, मगर अब इस डेडलाइन को मार्च, 2020 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। सूत्रों ने कहा, ”हमने भारतीय वायुसेना से HAL को अतिरिक्‍त 2,000 करोड़ रुपये देने को कह‍ा था ताकि वह डिलीवरी शेड्यूल (मार्च 2017) को कम कर आखिरी एअरक्राफ्ट मार्च 2015 तक दे सके। लेकिन निर्माण में और देरी हुई।”

सुखोई Su-30 MKI के मामले में, भारत से सीधे समझौते के तहत, रूस ने ‘उड़ने को तैयार’ 50 लड़ाकू विमान सप्‍लाई किए थे। छह अलग-अलग ठेकों के तहत, एचएएल को 222 एअरक्राफ्ट और डिलीवर करने थे। पहले चार ठेके कुल 140 एअरक्राफ्ट के लिए थे, जबकि दो अतिरिक्‍त ठेकों में क्रमश 40 व 42 एअरक्राफ्ट की डिलीवरी होनी थी।

सूत्रों के अनुसार, 140 एअरक्राफ्ट वाले ठेके में से, एचएएल को अभी 33 का निर्माण करना है। लेकिन HAL ने इस खाई को पाटने के लिए कुछ एअरक्राफ्ट रूस से सीधे खरीदे और भारतीय वायुसेना को दे दिए। ये विमान दो अतिरिक्‍त सौदों के जरिए हुए, यानी भारतीय वायुसेना को 222 में से 188 एअरक्राफ्ट मिले। इस साल 12 एअरक्राफ्ट बनने हैं लेकिन अब तक एक ही विमान बनाया जा सका है।

सूत्रों ने कहा, ”अगर एचएएल रूस से एअरक्राफ्ट नहीं लेता तो डिलीवरी में सिर्फ तीन साल नहीं, पांच साल की देरी होती। 140 एअरक्राफ्ट का पूरा सेट 2014-15 में डिलीवर होना था, लेकिन अब तक नहीं हुआ।” एचएएल के मीडिया कम्‍युनिकेशंस प्रमुख गोपाल सूतर ने कहा, ”(विमानों के) निर्माण और डिलीवरी शेड्यूल में कोई देरी नहीं है। हमने अब तक 199 एअरक्राफ्ट दिए हैं, तो कि हमारे मूल्‍यवान ग्राहक की रीढ़ हैं।”

सूत्रों के अनुसार, उन्‍होंने ”एचएएल द्वारा बनाए और रूस द्वारा सप्‍लाई किए गए असली एअरक्राफ्ट्स की गुणवत्‍ता में अंतर पाया है।” वायुसेना की ओर से इसकी जानकारी कई बार एचएएल को दी गई जो कि दर्शाता है कि क्‍वालिटी कंट्रोल और जागरूकता को लेकर एचएएल सुस्‍त है।

HAL को 2016 में रफाल सौदे में शामिल नहीं किया गया था। फ्रांस की डसॉ एविएशन ने ऑफसेट क्‍लॉज के लिए अन्‍य भारतीय कंपनियों को चुना। इसका एक बड़ा हिस्‍सा अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस को मिला। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार ने सौदा ऐसे आगे बढ़ाया जिससे एचएल के हितों को नुकसान पहुंचा और अंबानी को फायदा।

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