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असम में महसूस किए गए भूकंप के तेज झटके, कई इमारतों में पड़ी दरार

भूकंप की रिक्टर स्केल पर तीव्रता 6.4 बताई जा रही है। भूकंप का असर असम, मेघालय, उत्तर बंगाल में भी था। फिलहाल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

earthquake, assam, north eastगुवाहाटी में नुकसान की कुछ शुरुआती तस्वीरें (Source: Twitter/@himantabiswa)

असम में बुधवार सुबह 6.4 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए जिससे पूर्वोत्तर राज्य में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप के झटके पड़ोसी राज्य मेघालय और पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्सों समेत पूरे क्षेत्र में महसूस किए गए। उन्होंने बताया कि भूकंप सुबह सात बजकर 51 मिनट पर सोनितपुर जिले में आया। इसके बाद सात बजकर 58 मिनट और आठ बजकर एक मिनट पर भूकंप के दो और झटके महसूस किए गए। ये भूकंप के झटके क्रमश: 4.3 और 4.4 तीव्रता के दर्ज किए गए।

क्षेत्र के ज्यादातर हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए और लोग घबराहट में अपने घरों तथा अन्य स्थानों से बाहर निकल आए। सोनितपुर के जिला मुख्यालय तेजपुर, गुवाहाटी और कई अन्य स्थानों में कई इमारतों में दरारें आ गई। हताहतों के संबंध में विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है।असम के स्वास्थ्य मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने ट्वीट कर गुवाहटी में हुए कुछ नुकसानों की तस्वीरें भी साझा की हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि असम के कुछ हिस्सों में भूकंप को लेकर मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल से बात की है। केंद्र से हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। एनडीआरएफ के अनुसार गुवाहाटी और तेजपुर में इमारतों में दरारें पड़ गयी लेकिन अभी तक किसी की मौत की खबर नहीं है।

बताते चलें कि असम में इससे पहले 6 अप्रैल को भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। उस समय 2.7 तीव्रता का भूकंप आया था। उससे एक दिन पहले 5.4 तीव्रता का भूकंप सिक्किम नेपाल सीमा पर आया था। उस दौरान भूकंप के झटके बिहार, पश्चिम बंगाल, मेघालय, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में महसूस किए गए थे।

भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल से मापा जाता है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल भी कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। 2.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने से हल्का कंपन होता है। लेकिन उसके ऊपर आने पर काफी नुकसान होता है। भूकंप की तीव्रता का अंदाजा उसके एपीसेंटर से निकलने वाली ऊर्जा की तरंगों से लगाया जाता है। इन तरंगों की वजह से कई बार धरती में दरारे पड़ जाती है। 1934 में आए भूकंप ने 150 किलोमीटर लंबी दरार बना दी थी।

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