क्यों ‘खतरनाक’ माना जाता है तिहाड़ का जेल नंबर 3, नहीं रखा जाता फांसी का कोई रिकॉर्ड

200 एकड़ में फैला तिहाड़ जेल एशिया के सबसे बड़े जेलों में शामिल है। तिहाड़ में क्षमता से करीब 3 गुना ज्यादा कैदी रहते हैं।

tihar jail, new delhi, prisonजेल नंबर-3 को तिहाड़ का सबसे खतरनाक जेल माना जाता है।(एक्सप्रेस फोटो : रेणुका पूरी)

तिहाड़ जेल को देश का सबसे बड़ा कैदखाना कहा जाता है। तिहाड़ जेल में सजायाफ्ता नेताओं, आम कैदियों के साथ ही खूंखार कैदियों को भी रखा जाता है। तिहाड़ के अंदर करीब 10 जेल हैं। इनमें से जेल नंबर-3 को बेहद ही खतरनाक माना जाता है। कहा जाता है कि यहां कोई भी कैदी नहीं रहना चाहता है। साथ ही इस जेल नंबर-3 में फांसी का कोई रिकॉर्ड भी नहीं रखा जाता है। 

200 एकड़ में फैला तिहाड़ जेल एशिया के सबसे बड़े जेलों में शामिल है। तिहाड़ में क्षमता से करीब 3 गुना ज्यादा कैदी रहते हैं। भले ही तिहाड़ में करीब 10 जेल हों लेकिन इनमें से जेल नंबर 3 की बात सबसे ज्यादा होती है। इसके पीछे कारण है जेल नंबर 3 में ही फांसी घर का होना। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आजादी के बाद तिहाड़ जेल में करीब 35 फांसी हुई है और यह सभी फांसी जेल नंबर 3 में ही हुई है। साथ ही सबसे हैरत करने वाली बात यह है कि यहां हुई फांसी का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है। 

इसके अलावा कहा यह भी जाता है कि जेल नंबर 3 में रात के समय कैदियों को अजीब चीखने और चिल्लाने की आवाज भी आती है। जेल नंबर 3 के कैदियों ने कई बार इसकी शिकायत जेल प्रशासन से भी की है। इतना ही नहीं जेल नंबर 3 की सुरक्षा में तैनात तमिलनाडु स्पेशल पुलिस के जवान भी कथित रूप से मृत आत्माओं के चीखने- चिल्लाने और उनके ऊपर हमले की बात जेल के वरीय अधिकारियों तक पहुंचा चुके हैं।

कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि जेल नंबर 3 की फांसी कोठी के पास एक मर्डर भी हुआ था. बाद में जब जेल के लोगों से मर्डर के बारे में पूछताछ की गई तो उनमें से एक व्यक्ति ने कहा था कि आतंकी मकबूल भट्ट के भूत ने उसे क़त्ल करने को कहा था। इतना ही नहीं तिहाड़ जेल के अंदर कई बार लोगों ने मकबूल भट्ट के भूत देखे जाने की बात भी कही हैं। मकबूल भट्ट के अलावा भारतीय संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू को 9 फरवरी 2013 को तिहाड़ के इसी जेल में फांसी दी गई थी और जेल में ही उसका शव दफना दिया गया था।

तिहाड़ के जेल नंबर 3 में ही निर्भया गैंगरेप के एक दोषी राम सिंह ने भी आत्महत्या कर ली थी। इसके अलावा 16 दिसंबर 2012 को निर्भया गैंगरेप की वारदात में शामिल चारों दोषियों, मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर को 20 मार्च 2020 की सुबह 5:30 बजे तिहाड़ की जेल नंबर-3 में एक साथ फांसी पर लटकाया गया था।

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