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जब पत्रकार पर भड़क गई थीं मायावती, एक जर्नलिस्ट की बात पर मांगी थी माफी

लखनऊ में किसी कार्यक्रम के दौरान जब मायावती एक पत्रकार पर भड़क गईं तो वहां मौजूद अन्य पत्रकारों ने उन्हें लखनऊ गेस्ट हाउस कांड की बात याद दिलाई तो उन्होंने तुरंत उस पत्रकार से माफ़ी मांग ली।

mayawati, bspएकबार लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मायावती पत्रकार से तू तड़ाक कर कहने लगीं कि तुम मेरे खिलाफ झूठी ख़बरें चलाते हो मैं तुम्हें देख लूंगी। (Express photo: Vishal Srivastav )

साल 1995 में हुए लखनऊ गेस्ट हाउस कांड को लेकर भले ही यह कहा जाता हो कि भाजपा विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने मायावती की जान बचाई थी लेकिन कई लोग यह भी मानते हैं कि अगर उस समय पत्रकार वहां मौजूद नहीं होते तो मायावती के साथ बहुत बुरा हो सकता था। हालांकि मायावती भी इस बात से इत्तेफाक रखती हैं। इसलिए लखनऊ में किसी कार्यक्रम के दौरान जब मायावती एक पत्रकार पर भड़क गईं तो वहां मौजूद अन्य पत्रकारों ने उन्हें लखनऊ गेस्ट हाउस कांड की बात याद दिलाई तो उन्होंने तुरंत उस पत्रकार से माफ़ी मांग ली।

क्राइम तक की रिपोर्ट के अनुसार मायावती एक बार लखनऊ में अपने पार्टी कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर रही थी। तभी वो वहां मौजूद एक पत्रकार पर भड़क गईं। मायावती पत्रकार से तू तड़ाक कर कहने लगीं कि तुम मेरे खिलाफ झूठी ख़बरें चलाते हो मैं तुम्हें देख लूंगी। इसपर पत्रकार ने जब प्रतिकार किया कि आप किस भाषा में मुझसे बात कर रहीं है तो मायावती कहने लगीं कि मैं तुझे देख लूंगी।

हालांकि इस दौरान वहां मौजूद रहे पत्रकारों में से एक वरिष्ठ पत्रकार ने मायावती से कहा कि आपके बात करने का यह लहजा ठीक नहीं है। अगर आपको पत्रकार की खबरों से समस्या है तो आप एडिटर से इसकी शिकायत कीजिए। अगर इससे भी बात ना बने तो आप प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया या एडिटर्स गिल्ड में जाइए। लेकिन इस तरह से व्यवहार मत कीजिए। प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों को बुलाकर कर बेइज्जत करने का आपको कोई हक़ नहीं है।

आगे वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि अगर आज आप यहां प्रेस वार्ता कर रहीं तो इसकी वजह भी यह कि इन्हीं पत्रकारों ने आपको लखनऊ गेस्ट हाउस में बचाया। वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि मीडियाकर्मियों को देखकर ही कई सपा कार्यकर्ता आप तक नहीं पहुंच पाए। वरना आप आज यहां नहीं होती। हालांकि वरिष्ठ पत्रकार के इतना कहते ही मायावती पूरी तरह से शांत हो गई। मायावती ने तुरंत उस पत्रकार से माफ़ी मांगते हुए कहा कि लखनऊ गेस्ट हाउस में पत्रकारों ने उनकी जान बचाई थी।

क्या है लखनऊ गेस्ट हाउस कांड: दरअसल 1993 में हुए उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में सपा बसपा गठबंधन को जीत मिली थी। लेकिन आपसी मनमुटाव के चलते मायावती ने मुलायम सिंह यादव से इस्तीफा ले लिया था। इससे नाराज होकर सपा कार्यकर्ताओं ने लखनऊ गेस्ट हाउस में मायावती के ऊपर हमला कर दिया था। पुलिस की मौजूदगी में यह हमला हुआ था। बाद में भाजपा विधायक और गेस्ट हाउस में मौजूद पत्रकारों ने ही मायावती की जान बचाई थी।

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