ताज़ा खबर
 

खून से लाल हुई ज़मीन, कुएं से मिलीं 120 लाशें, जब अंग्रेजी हुकूमत ने जलियावालां बाग में लिखी काली कहानी

इस नरसंहार में हजारों लोग मारे गए लेकिन सरकारी दस्तावेज में सिर्फ 379 लोगों के मारे जाने की ही जानकारी है।

jallianawala bagh, amritsar, punjabअमृतसर के जलियांवाला बाग़ को वह कुआं जिसमें से करीब 120 लोगों की लाशें निकाली गई थी। (एक्सप्रेस फोटो/ सिमरनजीत सिंह)

13 अप्रैल का दिन भारतीय इतिहास के हिसाब से सबसे अहम है। 13 अप्रैल के दिन ही साल 1919 में अंग्रेजी हुकूमत के सिरफिरे अफसर जनरल डायर ने बैसाखी के दिन अमृतसर के जलियांवाला बाग़ में हजारों निहत्थे लोगों पर गोलियां चलवा दी थी। इतना ही नहीं जान बचाने के लिए कुएं में कूदे लोगों पर भी जनरल डायर ने गोली चलवाने से परहेज नहीं किया। कहा जाता है कि बाद में कुएं से करीब 120 लोगों की लाशें निकाली गई थी और जलियांवाला बाग़ की जमीन भारतीय लोगों के खून से लाल हो गई थी। तो आइये जानते हैं 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग़ में हुए नरसंहार की काली कहानी को जिसकी पूरी पटकथा अंग्रेजी हुकुमत ने रची थी। 

दरअसल अमृतसर को देश के पवित्र स्थलों में गिना जाता है। अमृतसर में ही सिखों का सबसे पवित्र स्थल स्वर्ण मंदिर मौजूद है. इसी स्वर्ण मंदिर के पास है जलियांवाला बाग। 13 अप्रैल को हर साल बैसाखी का त्यौहार मनाया जाता है। साल 1919 में बैसाखी के दिन पूरे पंजाब से लोग जलियांवाला बाग़ में जमा होने के लिए पहुंचे थे। लेकिन एक दिन पहले ही पंजाब में कर्फ्यू का ऐलान कर दिया गया था। जलियांवाला बाग़ में 13 अप्रैल 1919 को करीब 20 हजार लोगों की भीड़ जमा हुई थी।

जलियांवाला बाग़ में लोगों के जुटने की सूचना जैसे ही ब्रिग्रेडियर जनरल डायर तक पहुंची तो वह सिपाहियों के साथ वहां पहुंच गया। जनरल डायर ने उस दौरान जलियांवाला वाला बाग़ जाने के लिए एक मात्र संकरे रास्ते को भी सिपाहियों से भर दिया। इसके बाद वहां मौजूद लोगों को  बिना किसी तरह की चेतावनी दिए हुए जनरल डायर ने सिपाहियों को गोली चलाने का हुक्म दे दिया। इस नरसंहार में हजारों लोग मारे गए लेकिन सरकारी दस्तावेज में सिर्फ 379 लोगों के मारे जाने की ही जानकारी है।

इसके अलावा गोलीबारी के दौरान कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए वहां मौजूद कुएं में कूद गए। लेकिन सिरफिरे अफसर ने कुएं में छिपे लोगों पर भी गोली चलाने का आदेश दे दिया। कहा जाता है कि बाद में करीब 120 लोगों की लाशें कुएं से निकाली गई. इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे। कहा जाता है कि इतना जघन्य नरसंहार करने के बाद भी जनरल डायर यह कहने से नहीं हिचकता था कि अगर उसे दोबारा से इस तरह का कोई आर्डर मिलेगा तो उसे पछतावा होगा।

हालांकि इस जघन्य नरसंहार के बाद भी अंग्रेजी हुकूमत का रवैया जस का तस ही रहा. जलियांवाला बाग़ हत्याकांड की जांच के लिए बनाई गई कमेटी ने भी जनरल डायर को लगभग क्लीन चिट दे दिया था। इतना ही नहीं जलियांवाला बाग़ हत्याकांड के 100 साल पूरे होने पर ब्रिटेन की तत्कालीन प्रधानमंत्र थेरेसा मे ने इस नरसंहार पर अफ़सोस तो जताया लेकिन माफ़ी नहीं मांगी।

Next Stories
1 कुंभ की तुलना मरकज से नहीं हो सकती, मां गंगा की कृपा से कोरोना नहीं फैलेगा- उत्तराखंड CM का बयान
2 लॉकडाउन की आशंका देख महाराष्ट्र में स्टेशनों पर भीड़, रेलवे बोले- ये सामान्य भीड़, कन्फर्म टिकट वालों को ही यात्रा की अनुमति
3 कोरोनाः विदेशी वैक्सीन्स की हो सकती है भारत में एंट्री; रूसी ‘Sputnik V’ मंजूर, पर AstraZeneca के टीके से है महंगा
यह पढ़ा क्या?
X