असम और केरल में नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में जहां अनुभवी नेताओं की किस्मत दांव पर होगी, वहीं 25 से 27 वर्ष की आयु के युवा उम्मीदवार भी अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। इन उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि भले ही अलग-अलग हो, लेकिन इनके हौसले और लक्ष्य एक समान ‘जनसेवा और बदलाव’ की ओर केंद्रित हैं।
असम जातीय परिषद ने 27 वर्षीय कुंकी चौधरी को गुवाहाटी सेंट्रल से चुनाव के मैदान में उतारा है। कुंकी ने ‘नरसी मोंजी कालेज आफ कामर्स एंड इकोनामिक्स’ से बीबीए पूरा किया, जिसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी कालेज लंदन (यूसीएल) से 2025 में एजुकेशनल लीडरशिप में मास्टर डिग्री हासिल की। वह हाल ही में असम लौटी हैं।
कुंकी चौधरी का कहना है कि उन्होंने विदेश में जो कुछ सीखा, उसे अपने देश लागू करेंगी। उनके मुख्य क्षेत्र कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा हैं। उन्होंने 2025 में यूसीएल से स्नातक किया। इसके कुछ ही महीनों के भीतर ही उन्होंने चुनाव के अपना नामांकन दाखिल कर दिया। एक ऐसी पीढ़ी के लिए जिस पर अक्सर राजनीतिक उदासीनता का आरोप लगता रहा है, यह निर्णय काबिले तारिफ है।
कांग्रेस ने समागुरी विधानसभा क्षेत्र से 27 वर्षीय तंजील हुसैन को टिकट दिया है। तंजील धुबरी लोकसभा सांसद रकीबुल हुसैन के बेटे हैं। रकीबुल हुसैन ने 2001 से 2021 तक लगातार पांच विधानसभा चुनावों में समगुरी सीट पर कब्जा जमाए रखा।
तंजील ने 2018 में 12वीं की पढ़ाई पूरी की
तंजील ने 2018 में सीबीएसई से अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की। राजनीति में उनका पदार्पण अचानक और दबाव में हुआ। 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद रकीबुल हुसैन के संसद में जाने पर कांग्रेस ने समगुरी उपचुनाव में तंजील को अपना उम्मीदवार बनाया और इसका नतीजा बेहद निराशाजनक रहा। भाजपा के डिप्लू रंजन शर्मा ने उन्हें भारी अंतर से हराया, जिससे इस सीट पर पार्टी का 24 साल पुराना कब्जा खत्म हो गया।
उस उपचुनाव के समय 26 साल की उम्र में, वे चुनाव में जा रहे सभी पांचों निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे कम उम्र के उम्मीदवार थे। इस हार से कांग्रेस आलाकमान पर कोई फर्क नहीं पड़ी। 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए उनका फिर से नामांकन पार्टी के उन पर निरंतर भरोसे का संकेत है लेकिन इसने स्थानीय संगठन के भीतर कड़े विरोध को जन्म दे दिया है।
एक बैठक में कांग्रेस के बागी नेताओं ने साफ तौर पर घोषणा कर दी कि उनकी उम्मीदवारी उन्हें मंजूर नहीं है। कांग्रेस नेता रहमत अली और शाहिद उद्दीन ने चेतावनी दी कि तंजील की उम्मीदवारी से नुकसान होगा। उन्होंने तंजील को ‘अनुपयुक्त उम्मीदवार’ करार दिया और इस निर्वाचन क्षेत्र में परिवार-केंद्रित राजनीति को खत्म करने की मांग की।
आशना और अथिरा की टक्कर
केरल की एट्टुमानुर विधानसभा से उम्मीदवार आशना थम्पी की खूब चर्चा हैं। आशना थम्मी महज 26 साल की हैं। आशना थम्पी के सामने हैं राजग उम्मीदवार अथिरा डी. नायर। अथिरा अपने निर्वाचन क्षेत्र में कई प्रोजेक्ट लागू करने की योजना बना रही हैं।
एसयूसीआइ की उम्मीदवार आशना के चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास कुल संपत्ति के नाम पर मात्र 84 रुपये हैं, जिसमें 40 रुपये नकद और बैंक खाते में 44 रुपये जमा हैं। आशना के पास न तो कोई जमीन है, न सोना और न ही कोई गाड़ी। राजग उम्मीदवार अथिरा डी नायर राज्य की सबसे कम उम्र की गठबंधन प्रत्याशी हैं। जो लोग आयु को महज एक संख्या मानकर खारिज कर देते हैं उन्हें अथिरा बेझिझक जवाब देती हैं, ‘उम्र मायने रखती है, भाई।’
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इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार प्रद्युत बोरदोलोई और कांग्रेस की उम्मीदवार मीरा बर्थाकुर गोस्वामी के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही थी, लेकिन दास के मैदान में आने से चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
