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अमर सिंह नहीं होते तो मैं मुंबई में टैक्सी चला रहा होता- बोले थे अमिताभ बच्चन, रिश्तों में दरार के चलते अमर सिंह ने मांगी थी माफी

साल 2016 में समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह ने दावा किया कि अमिताभ बच्चन ने उन्हें आगाह किया कि वह अपनी पत्नी जया को अपनी पार्टी में स्वीकार न करें। इस बात पर अमिताभ बच्चन ने कहा था कि अमर सिंह उनके दोस्त हैं और वो जो चाहें उन्हें कहने का हक है।

Amar Singh, Amitabh Bacchanअमर सिंह और अमिताभ बच्चन की दोस्ती को लेकर कई खबरें सामने आती रही हैं।

राज्यसभा सांसद और पूर्व समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह ने शनिवार (1 अगस्त, 2020) को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। अमर सिंह को राजनीति का वो शख्स माना जाता था जिसकी पहुंच सियासत से लेकर बिजनेस और फिल्मी दुनिया की हस्तियों तक थी। अमर सिंह इस दुनिया को अलविदा कह गए लेकिन अपने पीछे वह कई ऐसी कहानियां छोड़ गए जिसकी चर्चा वक्त बेवक्त होती रहेगी। ऐसा ही एक किस्सा बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन और अमर सिंह का है।

एक ऐसा वाकया है जब अमिताभ बच्चन ने कहा था कि अगर अमर सिंह नहीं होते तो मैं मुंबई में टैक्सी चला रहा होता। साल 2016 में द संडे एक्सप्रेस से बातचीत में  अमर सिंह ने अमिताभ संग दोस्ती को लेकर कई बड़ी बातें बताई थीं। अमर सिंह ने कहा था कि जो मेरे साथ नहीं है मैं उसे भूल जाता हूं। बीता हुआ समय वापस नहीं आता है। मैंने अपने जीवन के 20 साल बच्चन परिवार को दिए। अपनी बेटियों से ज्यादा उनके बच्चों का ध्यान रखा। अमिताभ का  साथ मैंने उनके मुश्किल भरे समय में दिया। जब उनका घर नीलाम हो रहा था और  उनका जहाज डूब रहा था तो मैंने अमिताभ की मदद की थी। अमिताभ बच्चन ने खुद भी इस बात को माना था कि अगर अमर सिंह नहीं होते तो मैं  मुंबई में टैक्सी चला रहा होता।

साल 2016 में समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह ने दावा किया कि अमिताभ बच्चन ने उन्हें आगाह किया कि वह अपनी पत्नी जया को अपनी पार्टी में स्वीकार न करें। इस बात पर अमिताभ बच्चन ने कहा था कि अमर सिंह उनके दोस्त हैं और वो जो चाहें उन्हें कहने का हक है।

सिंगापुर में इलाज कराने के दौरान इसी साल फरवरी में अमर सिंह ने एक वीडियो जारी कर अमिताभ बच्चन से माफी मांगी थी। उन्होंने कहा था, “10 साल बीत जाने के बाद भी अमिताभ बच्चन की निरंतरता में कोई बाधा नहीं आयी है और वह लगातार, अनेक अवसरों पर, चाहे मेरा जन्मदिन हो या पिताजी की बरसी हो, हर दिन को याद करके अपने कर्तव्य का निर्वहन करते रहे हैं। तो मुझे भी लगता है कि मैंने भी अनावश्यक रूप से ज्यादा उग्रता दिखायी।

60 बरस से ऊपर जीवन की संध्या होती है। एक बार फिर मैं जिन्दगी और मौत की चुनौतियों से गुजर रहा हूं। मुझे लगता है कि सार्वजनिक रूप से मुझे, क्योंकि वह उम्र में बड़े हैं, मुझे नरमी बतनी चाहिए थी और जो कटु वचन बोले उसके लिए खेद प्रकट कर देना चाहिए।

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