ताज़ा खबर
 

जब सड़क पर Kingfisher कर्मी और कोर्ट के चक्कर लगा रहे थे बैंक अफसर, तब भी रंगारंग पार्टियों में मशगूल थे विजय माल्या, जानें- लंदन भागने की कहानी

किंगफिशर आखिरकार 2012 में बंद हो गई लेकिन इस एयरलाइंस ने आठ सालों में कभी फायदा नहीं दिया। एयरलाइंस के कर्मचारियों को वेतन तक के लाले पड़ गए। एक जमाने में ये भारत की दूसरी बड़ी एयरलाइन थी, विदेशों में इसकी उड़ानें हुआ करती थीं।

भगोड़े कारोबारी विजय माल्या (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

भारत की कई बैंकों से करीब 9 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेकर विदेश भागने वाला विजय माल्या अभी तक वापस नहीं लाया जा सका है। शराब कारोबारी और बंद हो चुके किंगफिशर एयरलाइन्स का मालिक विजय माल्या लंदन में शान-शौकत के साथ रह रहा है। उसकी अय्याशियों में कोई कमी नहीं आई है। वहीं, भारतीय एजेंसियों की उसे वापस लाने की हर कोशिश नाकामयाब साबित हुई है।

भारत के सबसे हाईप्रोफाइल उद्योगपतियों में से एक विजय माल्या के पास प्राइवेट जेट, प्राइवेट याट, दुनियाभर में आलीशान बंगले, पार्टियां, सुंदरियों के साथ गलबहियां, किंगफिशर कैलेंडर के मॉडल्स का मेला, रॉयल चैंलजर्स बेंगलुरु नाम की आईपीएल टीम, एफ-1में फोर्स वन के नाम से टीम, महंगी कलाकृतियां सब कुछ था। माल्या यूनाइटेड ब्रुअरीज के मालिक थे। महज 30 साल की उम्र में ही माल्या ने यूबी ग्रुप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी कंपनी बना दिया था। यूबी या यूनाइटेड ब्रिउरी ग्रुप की स्थापना उनके पिता विट्टल माल्या ने की थी।

यूबी समूह, शराब (बीयर) और मादक पेय उद्योग पर विशेष ध्यान देने वाली कई अलग-अलग कंपनियों का एक विस्तृत समूह है। किंगफिशर ब्रांड इसका एक भाग है जो बीयर बनाती है। विजय माल्या की अन्य कंपनियों में किंगफिशर नाम से एक एयरलाइंस भी थी जो वित्तीय संकट और कर्ज में डूबने के बाद अक्टूबर 2012 में बंद हो गई।

कहा जाता है कि विजय माल्या की मुश्किलें किंगफिशर एयरलाइंस के नाकाम होते जाने के साथ बढ़ती चली गईं। वो घाटे में डूबती जा रही इस एयरलाइंस को बंद करना चाहते थे लेकिन वर्ष 2010 में उन्होंने इसे नई जिंदगी देने का फैसला किया। इसके लिए बैंकों से मोटा लोन लेना शुरू किया, जिसने उन्हें वहां पर लाकर खड़ा कर दिया, जहां आज वो हैं।

किंगफिशर आखिरकार 2012 में बंद हो गई लेकिन इस एयरलाइंस ने आठ सालों में कभी फायदा नहीं दिया। एयरलाइंस के कर्मचारियों को वेतन तक के लाले पड़ गए। एक जमाने में ये भारत की दूसरी बड़ी एयरलाइन थी, विदेशों में इसकी उड़ानें हुआ करती थीं। लेकिन मार्च 2013 तक इसका कुल घाटा 16,023 करोड़ तक पहुंच गया। जब एयरलाइंस के कर्मचारी सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे तब माल्या तब भी रंगारंग पार्टियों में मशगूल था।

इसके बाद जब एयरपोर्ट, बैंकों के ड्यूज बढ़ने लगे और इसका फ्लाइंग लाइसेंस खत्म हो गया तो ये एयरलाइंस बैठ गई। शुरू में तो पेरेंट यूबी ग्रुप ने उसमें फंडिंग की लेकिन फिर बाद में ये रुक गई। दरअसल वर्ष 2011 से ही किंगफिशर और माल्या को बैंकों से दिए लोन पर सवाल उठने शुरू हो गए थे। इसके बाद एक समय वो आया कि वो रातोंरात काफी ज्यादा सामान और परिवार के साथ लंदन कूच कर गए। अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित किया हुआ है।

Next Stories
1 ‘कोरोना से युद्ध की कमान गडकरी को सौंपने की सलाह मान लेते मोदी तो सरकार के नियंत्रण में रहती महामारी’, भाजपा MP का फिर केंद्र पर हमला
2 COVID-19 Vaccine का टोटा क्यों? जब केवल 39 लाख भारतीयों को मिली थी वैक्सीन, तब 1.60 करोड़ डोज विदेश भेज चुकी थी सरकार
3 “सामने से गुज़रते इंसान को सड़क पार करने दो, कोई ज़िंदा चलता हुआ नज़र आया है”, वेंटिलेटर पर रवीश का पोस्ट, लोग बोले- लगता है सिस्टम ही वेंटिलेटर पर है
यह पढ़ा क्या?
X