ताज़ा खबर
 

धर्मांतरण पर प्रधानमंत्री के जवाब की मांग को लेकर अड़ा विपक्ष

जबरन धर्मांतरण के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के जवाब की मांग को लेकर अड़े विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा में लगातार पांचवें दिन भी गतिरोध बरकरार रहा। इस मुद्दे पर हंगामे के कारण बैठक बार-बार स्थगित करनी पड़ी। सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने प्रधानमंत्री नरेंद मोदी से इस मुद्दे पर […]

(पीटीआई फाइल फोटो)

जबरन धर्मांतरण के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के जवाब की मांग को लेकर अड़े विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा में लगातार पांचवें दिन भी गतिरोध बरकरार रहा। इस मुद्दे पर हंगामे के कारण बैठक बार-बार स्थगित करनी पड़ी।

सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने प्रधानमंत्री नरेंद मोदी से इस मुद्दे पर जवाब दिए जाने की मांग करते हुए कहा कि वे इस सदन के माध्यम से देश के 125 करोड़ लोगों के प्रति जवाबदेह हैं। उन्होंने कहा कि मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान जनता से वादा किया था कि वे उनके हर मुद्दे के प्रति जवाबदेह होंगे। उन्होंने मोदी को पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी के राज्यसभा सहित संसद के दोनों सदनों का बेहद सम्मान किए जाने की बात को याद दिलाते हुए कहा कि धर्मांतरण के मुद्दे पर जवाब देने के लिए यह सदन एकदम उपयुक्त जगह है।

इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखते हुए संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि वे विपक्ष के नेता की बातों से सहमत हैं। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और विपक्ष को इस मुद्दे पर चर्चा शुरू करनी चाहिए और उसे बताना चाहिए कि धर्मांतरण पर कानून बनाने के बारे में उसकी क्या राय है।
पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने विपक्ष के नेता को सुझाव दिया कि उन्होंने आज सदन में जो कहा उसे ही धर्मांतरण मुद्दे पर चर्चा की शुरुआत मानते हुए चर्चा को आगे बढ़ाना चाहिए। इसी बीच, कांग्रेस, जद (एकी), सपा व तृणमूल कांग्रेस के कई सदस्य प्रधानमंत्री को सदन में बुलाने की मांग पर आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करने लगे। नारेबाजी के दौरान उपसभापति पीजे कुरियन ने अन्नाद्रमुक के एके सेल्वाराज से शून्यकाल के दौरान उनका मुद्दा उठाने को कहा। अन्नाद्रमुक सदस्य ने अपनी बात भी रखी लेकिन हंगामे के बीच उनकी बात सुनी नहीं जा सकी।

इसके बाद उपसभापति ने जद (एकी) के केसी त्यागी को शून्यकाल में उनका मुद्दा उठाने को कहा। लेकिन त्यागी ने सदन के व्यवस्थित नहीं होने की ओर ध्यान दिलाते हुए अपनी बात शुरू करने से मना कर दिया। हंगामे के कारण कुरियन ने बैठक को दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इससे पूर्व शून्यकाल में सपा के नरेश अग्रवाल ने व्यवस्था के प्रश्न के नाम पर यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि सदन के संचालन की नियमावली के नियम 259 के तहत सभापति को अधिकार है कि वह सरकार को निर्देश दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि गुरुवार को जब नियम 267 के तहत चर्चा को स्वीकार किया गया था तो सभापति चर्चा का जवाब देने के लिए प्रधानमंत्री को निर्देश दे सकते थे।

इस पर कुरियन ने व्यवस्था देते हुए कहा कि नियम 267 के तहत गुरुवार को आसन की ओर से चर्चा के लिए दो बार अनुमति दी गई। इस नियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि आसन मंत्री या विशिष्ट मंत्री को चर्चा का जवाब देने के लिए निर्देश दे सके। उन्होंने कहा कि इस मामले में नियम 259 को लागू नहीं किया जा सकता।
इसके बाद विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा कि जबरन धर्मांतरण का मुद्दा केवल सदन तक ही सीमित नहीं बल्कि गांव-गांव तक फैल गया है। उन्होंने एक अखबार की खबर का हवाला देते कहा कि अमेरिका ने भी कहा है कि वह इस घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है।

उन्होंने कहा कि संविधान के तहत धर्मांतरण उचित है। लेकिन प्रलोभन देकर, राशन कार्ड या अन्य सुविधाएं बनवाने का प्रलोभन देकर धर्मांतरण करवाना असंवैधानिक, अनैतिक और आपराधिक कृत्य है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जब विदेश जाते हैं तो उनका इसलिए स्वागत होता है कि वे 125 करोड़ की बहु धार्मिक आबादी वाले देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। मोदी को 10-12 साल तक कई देशों में जाने की इजाजत नहीं मिली।

उन्होंने कहा कि धर्मांतरण के मुद्दे पर जवाब उन्हीं को देना चाहिए क्योंकि उन्हीं ने दर्द दिया है, वही दवा देंगे। मोदी ने चुनाव के दौरान देश की जनता को आश्वासन दिया था कि वे उनके मुद्दों के प्रति जवाबदेह होंगे। विपक्ष के नेता ने साथ ही यह भी कटाक्ष किया कि मोदी ने पार्टी के लिए नहीं अपने लिए वोट मांगे थे। यह सदन इस मुद्दे का जवाब देने के लिए बिल्कुल उपयुक्त जगह है। यह सदन प्रधानमंत्री का घर है। उन्हें इस सदन और संसद के दूसरे सदन का पूरा सम्मान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को सदन में आकर आश्वासन देना चाहिए।

एक बार के स्थगन के बाद सदन की बैठक जब बारह बजे शुरू हुई तो विपक्षी सदस्यों ने धर्मांतरण के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के जवाब की मांग फिर दोहराई। माकपा के पी राजीव और तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए नियम 267 के तहत नोटिस दिए हैं लिहाजा प्रश्नकाल स्थगित कर चर्चा शुरू की जानी चाहिए। कांग्रेस के आनंद शर्मा ने कहा कि इसी सदन में कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया था जिसे तोड़ा गया है और इस बारे में प्रधानमंत्री को सदन में आ कर जवाब देना चाहिए। वे सदन में क्यों नहीं आते। वे बाहर बोलते हैं, सदन में आ कर क्यों नहीं बोलते। डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि पूरा विपक्ष चर्चा चाहता है तो फिर प्रधानमंत्री इससे क्यों बचना चाह रहे हैं।

भाकपा के डी राजा ने कहा कि इस मुद्दे की गंभीरता को, संसद और बाहर बने माहौल को देखते हुए सदन को इस पर चर्चा करनी चाहिए और फिर प्रधानमंत्री को जवाब देना चाहिए। सभापति ने कहा कि चर्चा शुरू की जा सकती है लेकिन सदस्य इसके लिए कोई शर्त नहीं रख सकते। उन्होंने कहा कि सदन की परंपरा है कि चर्चा का जवाब संबद्ध मंत्री देता है और अगर सदस्य जवाब से असंतुष्ट हैं तो इसे जाहिर करने के लिए एक प्रक्रिया है। इसका पालन किया जाना चाहिए।
शर्मा ने कहा कि सरकार और प्रधानमंत्री ने विपक्ष का आग्रह खारिज कर दिया है। इस पर संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि विपक्ष यह तय नहीं

करेगा कि चर्चा का जवाब कौन देगा। यह सरकार तय करेगी। इसी बीच, कांग्रेस, सपा, जद (एकी) और तृणमूल सदस्य प्रधानमंत्री के बयान की मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे। सभापति ने सदस्यों से शांत रहने और प्रश्नकाल चलने देने का आग्रह किया लेकिन सदन में व्यवस्था बनते न देख उन्होंने 12 बज कर करीब दस मिनट पर बैठक को दोपहर ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App