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राज्यसभा: धर्मांतरण और काले धन पर विपक्ष का हंगामा, सदन दिन भर के लिए स्थगित

जबरन धर्मान्तरण एवं काला धन वापस लाने सहित विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष के भारी हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक आज फिर बार बार बाधित हुयी और चार बार के स्थगन के बाद कार्यवाही अंतत: दिन भर के लिए स्थगित कर दी गयी। सुबह सदन की बैठक शुरू होने पर एक प्रस्ताव पारित कर मुंबई […]

Author December 22, 2014 4:57 PM
प्रतीकात्मक चित्र (फ़ोटो-पीटीआई)

जबरन धर्मान्तरण एवं काला धन वापस लाने सहित विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष के भारी हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक आज फिर बार बार बाधित हुयी और चार बार के स्थगन के बाद कार्यवाही अंतत: दिन भर के लिए स्थगित कर दी गयी।

सुबह सदन की बैठक शुरू होने पर एक प्रस्ताव पारित कर मुंबई हमले के मुख्य षड्यंत्रकर्ता जकी उर रहमान लखवी को पाकिस्तान में जमानत दिये जाने की भर्त्सना की गयी और पाकिस्तान से यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि प्रत्येक आतंकवादी गतिविधि के षड्यंत्रकर्ता को दंड मिले।

इसके बाद जदयू, सपा सहित विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्यों ने कहा कि उन्होंने नियम 267 के तहत कार्यस्थगन प्रस्ताव दिया है। आसन की अनुमति से जदयू के शरद यादव ने कहा कि सरकार ने अपने एक भी वादे को पूरा नहीं किया है।

यादव ने कहा कि सत्तारूढ दल ने सत्ता में आने से पहले पांच करोड़ युवाओं को रोजगार देने, काला धन वापस लाने और खेती करने वालों को उनकी लागत का डेढ गुना देने का वादा किया था। लेकिन सरकार ने इन वादों को पूरा करने के बदले एक नया अभियान ही शुरू कर दिया है।

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उन्होंने कहा कि सरकार ने घर वापसी का अभियान शुरू कर दिया है जिसका चुनाव के पहले कोई उल्लेख नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि गुजरात, केरल और उत्तर प्रदेश मे इस तरह घर वापसी के कार्यक्रम हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को अपने वादे पूरे करने चाहिए।

जदयू नेता ने कहा कि जबरन धर्मांतरण के बारे में भाजपा के सांसद और नेता भी बयान दे रहे हैं। सदन के नेता एवं वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकार की ओर से कहा कि विपक्ष के कार्यस्थगन प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो सकती क्योंकि इन मुद्दों पर सदन के इसी सत्र में चर्चा हो चुकी है।

जेटली ने कहा कि शरद यादव ने जो मुद्दा उठाया है, उस पर सदन में इसी सत्र में चर्चा हो चुकी है और सदन के नियम के तहत एक ही सत्र में उस मुद्दे पर दोबारा चर्चा नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि विपक्ष यदि किसी अन्य मुद्दे पर चर्चा करने के लिए चाहे तो सरकार तैयार है और चर्चा अभी शुरू की जा सकती है।

सपा के राम गोपाल यादव ने कहा कि इस सरकार ने काला धन वापस लाने, पांच करोड़ युवाओं को रोजगार देने सहित कई वादे किए थे। उन्होंने कहा कि आज दिल्ली के जंतर मंतर पर मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में विभिन्न विपक्षी दल सरकार द्वारा काला धन वापस नहीं लिए जाने सहित विभिन्न वादों को पूरा नहीं करने के विरोध में धरना दे रहे हैं।

माकपा के सीताराम येचुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने लाल किले से देश में अगले दस वर्षों तक कोई भी सांप्रदायिक घटना नहीं होने का आश्वासन दिया था। लेकिन आज देश में प्रलोभन देकर धर्मांतरण की घटनाएं हो रही हैं।

तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि विपक्ष चर्चा से भाग नही रहा है। विपक्ष चर्चा चाहता है लेकिन सरकार और प्रधानमंत्री धर्मांतरण के मुद्दे पर चुप क्यों हैं? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को सदन में आकर बयान देना चाहिए।

कांग्रेस के आनंद शर्मा ने कहा कि यह विषय गंभीर है और प्रधानमंत्री को सदन में आकर चर्चा सुननी चाहिए और अपनी बात कहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चर्चा से विपक्ष नहीं सरकार और प्रधानमंत्री बच रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल के सदस्य और मंत्री विपक्षी नेताओं को बोलने नहीं दे रहे हैं।

भाकपा के डी राजा ने धर्मांतरण के नाम पर कुछ संगठनों द्वारा दिए जा रहे बयानों को निंदनीय करार देते हुए इस मुद्दे पर चर्चा कराए जाने की मांग की। इसी दौरान सपा और जदयू के सदस्य हाथों में पोस्टर लिए और नारेबाजी करते हुए कई बार आसन के समीप आ गए।

भोजनावकाश के बाद संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि एक विशेष महत्वपूर्ण विधेयक है जिसके पारित नहीं होने पर दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों में 31 दिसंबर के बाद परिसरों की सीलिंग की समस्या पैदा हो सकती है।

उप सभापति कुरियन ने दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र विधि (विशेष उपबंध) दूसरा (संशोधन) विधेयक 2014 पर चर्चा शुरू करने को कहा। लेकिन जदयू और सपा के सदस्य नारेबाजी करते हुए आसन के समक्ष आ गए। वहीं कांग्रेस के सदस्य भी अपने स्थानों पर नारेबाजी करते दिखे। तृणमूल कांग्रेस, माकपा सहित कई दलों के सदस्य भी अपने स्थानों पर ही खड़े होकर कोई मुद्दा उठाते दिखे।

हंगामे के बीच ही संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण विधेयक है और इस पर सदस्यों को चर्चा शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हजारों गरीब लोग बेघर होने वाले हैं। उनके घर टूट जाएंगे और उन्हें बचाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक उन लोगों को राहत प्रदान करने के लिहाज से अहम है।

कुरियन ने भी सदस्यों से इस विधेयक पर चर्चा शुरू करने की अपील की। लेकिन हंगामा कर रहे सदस्यों पर उनकी अपील का कोई असर नहीं हुआ और कुरियन ने दोपहर बाद तीन बजकर करीब पांच मिनट पर बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी।

उल्लेखनीय है कि जबरन धर्मांतरण मुद्दे पर प्रधानमंत्री के बयान की मांग पर विपक्ष के हंगामे के चलते पिछले सप्ताह भी उच्च सदन की कार्यवाही लगातार बाधित हुयी थी।

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