Storm in Lok Sabha On Conversion Opposition Ask Modi Statement - Jansatta
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धर्मान्तरण पर लोकसभा में हंगामा, उपाध्यक्ष पर फेंके काग़ज़

धर्मान्तरण के मुद्दे पर आज कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, वामदल, राजद, आप सदस्यों ने लोकसभा में सरकार को घेरा और प्रधानमंत्री के जवाब की मांग करते हुए भारी शोर शराबा किया जिसके कारण सदन को चार बार स्थगित करना पड़ा। भोजनावकाश के बाद आसन के समक्ष नारेबाजी कर रहे राजद के राजेश रंजन ने अखबार को […]

Author December 22, 2014 6:37 PM
Lok Sabha: अन्नाद्रमुक के पी. वेणुगोपाल ने कहा कि प्रदेश में अलगाववादियों को जेलों से रिहा करने पर रोक लगायी जाए। (फ़ाइल फ़ोटो-पीटीआई)

धर्मान्तरण के मुद्दे पर आज कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, वामदल, राजद, आप सदस्यों ने लोकसभा में सरकार को घेरा और प्रधानमंत्री के जवाब की मांग करते हुए भारी शोर शराबा किया जिसके कारण सदन को चार बार स्थगित करना पड़ा।

भोजनावकाश के बाद आसन के समक्ष नारेबाजी कर रहे राजद के राजेश रंजन ने अखबार को फाड़कर टेबल के पास हवा में उछाल दिया। जिसपर बाद में उपाध्यक्ष ने सख्त आपत्ति जताई और रंजन ने क्षमा मांगी। हंगामे के दौरान ही माकपा सदस्य ए संपत की तबीयत खराब हो गई।

एक बार के स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, वाम दल, राजद, आप के सदस्य धर्मान्तरण का विषय उठाते हुए अध्यक्ष के आसन के समीप आकर नारेबाजी करने लगे।

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने कहा, ‘‘ हर राज्य में ‘घर वापसी’ के नाम पर धर्मांतरण किया जा रहा है। लोगों को प्रलोभन दिया जा रहा है। संविधान में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद का धर्म मानने का अधिकार है। ऐसे कार्यो से देश में अशांति फैल सकती है। मोदी के नाम पर यह सरकार बनी है। इसलिए प्रधानमंत्री सदन में बयान दें।’’
संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि देश के लोग देख रहे हैं कि क्या हो रहा है। जो लोग सदन में नहीं हैं, उनके बारे में नारे लगाए जा रहे हैं। इसे कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए। कल सुबह आठ बजे से विधानसभा चुनावों (झारखंड और जम्मू कश्मीर) की मतगणना शुरू होगी तब आपको जवाब मिल जायेगा।

मल्लिकार्जुन खडगे ने इसका विरोध करते हुए कहा कि हमें विरोध करने का अधिकार है। हमारी बातों को कार्यवाही से नहीं निकाला जा सकता। इसी बीच, लोकपाल और लोकायुक्त एवं अन्य संबद्ध विधि (संशोधन) विधेयक चर्चा एवं पारित होने के लिए लिया गया। हालांकि विपक्षी सदस्यों का शोर शराबा जारी रहा।

इसी बीच, अध्यक्ष के आसन के पास नारेबाजी कर रहे राजद के राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने एक समाचारपत्र की प्रति को फाड़कर टेबल के पास हवा में उछाल दिया। इसके बाद उपाध्यक्ष एम थम्बीदुरई ने तीन बजकर पांच मिनट पर सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी। तीन बजकर 10 मिनट पर कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर स्थिति ज्यों की त्यों बनी रही।

उपाध्यक्ष थम्बीदुरई ने राजेश रंजन द्वारा अखबार फाड़कर उछाले की घटना पर गहरी आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘ जिस तरह से राजेश रंजन ने कागज मेरे ऊपर फेंका, उसपर मैं गहरी आपत्ति व्यक्त करता हूं। यह गलत है। आप अपनी बात रखें लेकिन मेरे ऊपर कागज फेंके, यह ठीक नहीं है। यह अच्छी बात नहीं है कि आसन के प्रति असम्मान प्रदर्शित किया जाए।’’

राजेश रंजन ने कहा कि उन्होंने उपाध्यक्ष के पर कागज नहीं फेंका और उनका सम्मान करते हैं लेकिन अगर उन्हें ऐसा लगा तो वह ‘सॉरी’ कहते हैं।  कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने कहा, ‘‘ आप (थम्बीदुरई) वरिष्ठ नेता है। आपके पास काफी अनुभव है। हमारा आसन के प्रति असम्मान प्रदर्शित करने का कोई इरादा नहीं है। हमारी नाराजगी सरकार के प्रति है जो हमारी बात नहीं सुन रही है।’’

इस दौरान कांग्रेस, तृणमूल, वामदल सदस्यों का शोर शराबा जारी रहा। माकपा के ए संपत आसन के समीप आकर विपक्ष के नेता को नहीं बोलने देने के विषय को उठाने लगे। इस दौरान उनकी तबियत खराब हो गई और सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया।

सदन में एक डॉक्टर को उनकी जांच करते देखा गया। केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन, वेंकैया नायडू, जितेन्द्र सिंह के अलावा एस एस आहलुवालिया समेत कई नेताओं को संपत का हालचाल पूछते देखा गया। कुछ देर बाद उन्हें सदन से बाहर ले जाया गया। साढ़े तीन बजे एक बार फिर आधे घंटे के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

चार बजे सदन की कार्यवाही पुन:शुरू होने पर कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक बार फिर धर्मान्तरण के मुद्दे को उठाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मुद्दे पर बयान दिये जाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि पूरे देश में घर वापसी के कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। प्रधानमंत्री को सदन में आकर बयान देना चाहिए क्योंकि यह भाजपा की सरकार नहीं बल्कि मोदी की सरकार है और यहां सिर्फ मोदी की बात चलती है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के हिदायत दिये जाने के बाद भी सरकार के मंत्री, सांसद और पार्टी के अन्य संगठन अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश विदेश में एक गलत संदेश जा रहा है। इसे रोकने के लिए प्रधानमंत्री को बयान देना चाहिए। इस पर संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने आपत्ति जताई और कहा कि हमें समान अधिकार हैं। मोदी नेता हैं और हमारी एक सामूहिक टीम हैं।

उन्होंने पुन: इस बात को दोहराया कि देश में पूरी शांति है। धर्मपरिवर्तन और पुनधर्मपरिर्वतन में सरकार की कोई भूमिका नहीं है। पार्टी (भाजपा) का उन व्यक्तियों से कोई लेना देना नहीं है जो ये कर हैं। अगर कोई कानून का उल्लंघन करता है तो कानून अपना काम करेगा।

खड़गे कि बात के बाद कांग्रेस, वाम दल, राजद और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य अध्यक्ष के आसन के निकट आकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। हंगामे के बीच ही लोकसभा उपाध्यक्ष ने लोकपाल और लोकायुक्त तथा अन्य संबद्ध विधि संशोधन विधेयक पर चर्चा को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हुए भाजपा के भुवन चंद्र खंडूरी को इस विधेयक पर बोलने के लिए के लिए कहा।

इस मुद्दे पर सदन में विपक्षी सदस्यों की करीब पौन घंटे तक नारेबाजी चलती रही। खड़गे ने कहा ‘‘हम इस मामले में सरकार के रवैये की निंदा करते हैं और सदन से वॉकआउट करते है।’’ इसके बाद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वामदलों के सदस्य सदन से वॉकआउट कर गये।

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