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सेंट्रल आर्म्ड फोर्सेज को गृह मंत्रालय की सख्त हिदायत, सोशल मीडिया पर न करें आवाज बुलंद, वर्ना…

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के अधिकारियों को गृह मंत्रालय ने हिदायत दी है कि वो अपनी मांगों को लेकर सोशल मीडिया पर आवाज बुलंद ना करे और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बचें।

सूत्रों के मुताबिक गृह सचिव कुमार भल्ला ने सभी सीएपीएफ अधिकारियों से मुलाकात की। इसमें सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और सशस्त्र सीमा बल के अधिकारी शामिल रहे। (सांकेतिक तस्वीर- Indian Express)

पदोन्नति और वेतन लाभ के लिए अभियान चला रहे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के अधिकारियों को गृह मंत्रालय ने हिदायत दी है कि वो अपनी मांगों को लेकर सोशल मीडिया पर आवाज बुलंद ना करे और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बचें। सूत्रों के मुताबिक गृह सचिव कुमार भल्ला ने सभी सीएपीएफ अधिकारियों से मुलाकात की। इसमें सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और  सशस्त्र सीमा बल के अधिकारी शामिल रहे। दि प्रिंट के मुताबिक सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गृह सचिव ने हमारी मांगें सुनी और कहा कि वह जल्द ही समाधान निकालेंगे। उन्हें यह भी कहा कि हमें सोशल मीडिया के इस्तेमाल से बचने को कहा गया है।वर्ना इससे समाज में सेना की छवि खराब होगी।

हालांकि जो अधिकारी सोशल मीडिया के जरिए अभियान चला रहे हैं। उनका कहना है कि सोशल मीडिया उनके लिए आखिरी सहारा है। बीएसएफ के एक अधिकारी ने कहा कि हमने गृह मंत्री को पत्र लिखा, हमारे डीजी को भ पत्र लिखा, गृह सचिव और अन्य सभी लोगों को जिनसे हमें मदद मिल सकती थी लेकिन हमारी आवाज कोई नहीं सुन रहा है ऐसे में हमारे लिए सोशल मीडिया ही आखिरी रास्ता है।

सीएपीएफ अधिकारियों की गृह सचिव से मुलाकात इन सभी सशस्त्र बलों के डीजी से मुलाकात के बाद हुई जोकि आईपीएस अधिकारी हैं। इससे पहले गृह सचिव ने महानिदेशकों (डीजी) से कहा था कि अगर वह इस मामले में कोर्ट की अवमानना किए बिना  अदालत में लड़ सकते हैं तो  वह मौजूदा भर्ती नियमों के साथ आगे बढ़ सकते हैं। बता दें कि इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में  सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी जैसे बलों के कैडर अधिकारियों को ‘नॉन फंक्शनल फिनांशियल अपग्रेडेशन’ दिया जाएगा और उन्हें एक संगठित ग्रुप ए सेवा के रूप में श्रेणीबद्ध किया जाने के लिए कहा था जिसे सरकार ने मंजूरी भी दे दी थी।

सीएपीएफ का मानना है कि  ओएजीएस  का दर्जा तभी मिलना चाहिए जब भर्ती के नियमों में भी सुधार किया जाए। गौरतलब है कि अगर भर्ती नियम में संसोधन होता है तो सीएपीएफ कोल्ज्ड सर्विस हो जाएगी और फिर इसमें आईपीएस अधिकारियों की तैनाती रुक जाएगी। वहींस आईपीएस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर सीएपीएफ के अधिकारी सोशल मीडिया पर अभियान चलाकर उनको ब्लैकमेल कर रहे हैं और नाम खराब कर रहे हैं। आईपीएस अधिकारियों का कहना है कि स्पष्टीकरण के लिए कोर्ट में याचिका दायर की गई है कि आईपीएस अधिकारियों की तैनाती होगी या नहीं। पहले इसपर फैसला आने देना चाहिए उसके बाद आगे  इस पर बात की जानी चाहिए।

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