कनाडा में बिना किसी सबूत के हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड में फंसाए जाने के 18 महीने बाद पूर्व राजदूत संजय वर्मा ने कहा कि तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित थे और इसका उनके जीवन और उनके सहयोगियों और उनके परिवारों पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा।

रिटायरमेंट के बाद और दिल्ली छोड़ने से कुछ दिन पहले इंडियन एक्सप्रेस के साथ खास बातचीत में वर्मा ने उन दिनों को याद किया, जब उनके साथ अपराधी की तरह बर्ताव किया जाता था। उन्होंने कहा, “मानो मैं कोई हत्यारा हूं जो कनाडा की सड़कों पर घूम रहा है।” उन्होंने दिल्ली में मौजूद अपने आवास पर कहा, “इसका मानवीय पहलू बहुत बड़ा था। मेरे सहयोगियों और उनके परिवारों को इतना भावनात्मक आघात झेलना पड़ा। कुछ लोगों के जीवनसाथियों को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी, बच्चों को यूनिवर्सिटी छोड़कर अपने माता-पिता के पास वापस आना पड़ा।”

अक्टूबर 2024 में कनाडा ने भारतीय राजनयिकों और वाणिज्य दूतावास के कर्मचारियों पर देश में सीक्रेट और आपराधिक गतिधियों में शामिल होने का आरोप लगाया। इनमें वर्मा का नाम भी शामिल था। दोनों देशों के बीच विवाद तब और बढ़ गया जब तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने 2023 में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय सरकार की संलिप्तता का आरोप लगाया।

जस्टिन ट्रूडो ने क्या कहा था?

ट्रूडो ने कहा, “कनाडाई नागरिकों पर हमला करने के लिए अपने राजनयिकों और संगठित अपराध का इस्तेमाल करने का विकल्प चुनकर भारत ने एक बहुत बड़ी गलती की है।” विदेश मंत्रालय ने अपने राजनयिकों के खिलाफ लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि वे हास्यास्पद है। दोनों देशों की तरफ से एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित करने के एक दिन बाद जल्दबाजी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस के प्रमुख ने कहा कि बल के पास इस बात के सबूत हैं कि भारतीय सरकार की ओर से काम करने वाले एजेंट जबरन वसूली, धमकी, दबाव और उत्पीड़न में लिप्त हैं।

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हालांकि पिछले ही हफ्ते आरसीएमपी आयुक्त माइक डुहेम ने कहा कि उनके पास मौजूद जानकारी के आधार पर, कनाडा में अब ऐसी कोई गुप्त गतिविधियां या अंतरराष्ट्रीय दमनकारी कार्रवाई नहीं हो रही है जो भारतीय सरकार से जुड़ी हो।

अक्टूबर 2024 में ट्रूडो सरकार द्वारा अवांछित व्यक्ति घोषित किए जाने के बाद अचानक ओटावा से अपना सामान पैक करके निकलने के समय को याद करते हुए वर्मा ने कहा, “ग्लोबल IITian का पुरस्कार हासिल करने के लिए कनाडा छोड़ने से ठीक पहले वाले वीकेंड में मैं टोरंटो में था। मैं ओटावा वापस जाने के लिए टोरंटो एयरपोर्ट पर आया, जहां मुझे (कनाडाई) विदेश मंत्रालय से एक फोन आया, जिसमें कहा गया, ‘हम चाहते हैं कि आप ग्लोबल अफेयर्स ऑफिस में आएं’।”

उन्होंने याद करते हुए बताया, “अगले दिन जब मैं वहां गया, तो मुझे नहीं पता था कि क्या मैसेज मिलने वाला है। लेकिन जिस कमरे में मैं अक्सर जाता था, खिलखिलाता था, हंसता था और कॉफी पीता था, वह बिल्कुल साफ-सुथरा और गंभीर लग रहा था। मुझे लगा कि कुछ गड़बड़ है।” वर्मा ने जोर देकर कहा, “और मेरे समकक्ष ने मुझे एक बयान पढ़कर सुनाया, जिसमें कहा गया था, ‘आप पांच अन्य लोगों के साथ संदिग्ध व्यक्ति हैं और आपको पूछताछ के लिए पेश होना होगा।’ यह सामान्य राजनयिक प्रक्रिया नहीं है।”

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वर्मा ने दिल्ली में कनाडा के उच्चायुक्त से बात की

वर्मा ने बताया कि उन्होंने दिल्ली में कनाडा के उच्चायुक्त से बात की। वर्मा आज तक उस दौर को भुला नहीं पाए हैं। उन्होंने कहा, “मैं अपने दोस्तों को अलविदा भी नहीं कह पाया। मुझे घर का सारा सामान पैक करना पड़ा। एक बार जब आप अवांछित व्यक्ति बन जाते हैं, तो कुछ भी हो सकता है। इसलिए, मुझे आरसीएमपी (आयरलैंड की राष्ट्रीय पुलिस) द्वारा ओटावा एयरपोर्ट और विमान तक पहुंचाया गया। वास्तव में, वे हर समय मेरे साथ थे।”

हालांकि, उन्होंने कहा कि वे मेजबान सरकार के विशेषाधिकार को चुनौती नहीं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें इस बात का अफसोस है कि उनके साथ एक अपराधी जैसा व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि आज तक, यानी लगभग 18 महीने बाद भी, वे मेरे खिलाफ कुछ भी साबित नहीं कर पाए हैं। सार्वजनिक सेवा के अपने बेहद सफल 37 वर्षों के बावजूद, मुझे अभी भी एक अपराधी कहे जाने का कलंक सता रहा है। उन्होंने कहा, “मैं सेवारत भारतीय राजदूतों में से पहला ऐसा व्यक्ति हूं जिसे अवांछित व्यक्ति घोषित किया गया है। किसी अन्य भारतीय राजदूत को अवांछित व्यक्ति घोषित नहीं किया गया है, यहां तक ​​कि पाकिस्तान द्वारा भी नहीं।”