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दक्षिण कोरिया, सिंगापुर ने ऐसे फटाफट डिटेक्ट किए थे कोरोना के नए केस, राज्य सरकारें तकनीक से लगा सकती हैं संक्रमण पर लगाम

बृहनमुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (बीएमसी) ने मुंबई पुलिस से कहा है कि वे जीपीएस लोकेशन के जरिए कोरोनावायरस संदिग्धों को ट्रैक करें।

Author Translated By कीर्तिवर्धन मिश्र मुंबई | Updated: March 22, 2020 11:22 AM
coronavirusतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

देशभर में कोरोनावायरस संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां कोरोना के संदिग्ध लोगों को क्वारैंटाइन में रहने के लिए कहा गया, लेकिन पुष्टि न हो पाने की वजह से उनके केसों पर नजर नहीं रखी जा सकी। इससे समस्या ज्यादा बढ़ गई। हालांकि, अब देश के कुछ राज्यों ने कोरोनावायरस को रोकने के लिए दक्षिण कोरिया और सिंगापुर का तरीका अपनाने का फैसला किया है। पुणे की इंटिग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम की जिले की टीम एक वेब पोर्ट का इस्तेमाल कर रही है, जिससे अलग-थलग रखे गए 2612 लोग अपनी लोकेशन, अपने रोजमर्रा के काम, वे किन लोगों से संपर्क में आए और 14 दिन के क्वारैंटाइन में उन्हें बीमारी के क्या-क्या लक्षण दिखाई दिए इसकी जानकारी अपडेट कर रहे हैं।

खास बात यह है कि एक टीम जो इन संदिग्धों के घर चेकिंग के लिए जाती है, उसके लिए भी इसी वेब पोर्टल पर सारी जानकारी देना अनिवार्य किया गया है। दूसरे जिले भी इस सिस्टम में लॉग इन कर देख सकते हैं कि उनके यहां के कितने लोग संदिग्ध की श्रेणी में रखे गए हैं। यह टीम फिलहाल फेशियल रिकग्नीशन यानी चेहरा पहचानने वाली तकनीक के इस्तेमाल की योजना बना रही है, ताकि इसके जरिए कौन किसके संपर्क में आया, इसकी सीधे पहचान हो सके।

पुणे जिला परिषद के सीईओ आयुष प्रसाद के मुताबिक, यह एक सोशल नेटवर्क की तरह है, जिससे यह पता चल सकता है कि वायरस की चेन कहां तक पहुंची हैं। उन्होंने बताया, “जब हमने यह सिस्टम बड़े स्तर पर बनाने का सोचा तो पता चला कि दक्षिण कोरिया ऐसी ही सिस्टम का इस्तेमाल करता है। हम फोन ऐप पर कोरियन नहीं समझ सकते थे। इसलिए हमने पोस्टर पर फोटोग्राफ देखीं और भारतीय स्थितियों के हिसाब से इसका आइडिया लगाया। बाद में हमें पता चला कि सिंगापुर भी ऐसा ही एक सिस्टम बना चुका है।”

दूसरी तरफ बृहनमुंबई म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन (बीएमसी) भी संदिग्धों को ट्रैक करने के लिए अनोखा तरीका इस्तेमाल कर रहा है। बीएमसी ने मुंबई पुलिस से कहा है कि वह क्वारैंटाइन यानी अलग-थलग रखे गए लोगों पर फोन जीपीएस ट्रैकिंग के जरिए नजर रखे। बीएमसी की डिप्टी हेल्थ डायरेक्टर दक्षा शाह के मुताबिक, यह सबसे बेहतर तरीका है। इसमें कुछ निजता के मुद्दे होंगे, जिन्हें सुलझाना काफी जरूरी है।

कर्नाटक के आईटी डायरेक्टर प्रशांत कुमार मिश्रा कहते हैं कि राज्य सरकार आईटी प्रोफेशनल्स और सर्विस प्रोवाइडर्स की मदद से लोगों को ट्रैक करने का सिस्टम एक से दो दिन में लॉन्च कर देगी।

कोरोनावायरस की पहचान के लिए क्या तकनीक इस्तेमाल कर रहे हैं दूसरे देश?

दक्षिण कोरियाः वायरस पेशेंट ट्रैवल लॉग के जरिए सभी संदिग्धों पर सीसीटीवी कैमरे, बैंकिंग डिटेल्स और मोबाइल फोन की बदौलत उन पर नजर रखी जाती है। इसके अलावा कुछ ऐसे टूल भी हैं, जो यह बता देते हैं कि पहले किनकी टेस्टिंग होगी।

इजराइलः अफसर उन सभी को टेक्स्ट मैसेज भेज रहे हैं, जो कोरोनावायरस से संक्रमित पाए गए। मैसेज में कहा जाता है कि यूजर के फोन का डेटा उनके करीब आने वाले लोगों को आगाह करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा लोगों को उनके मूवमेंट्स के बारे में भी मैसेज किया जा रहा है।

चीनः चीन इस वक्त एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर के जरिए संदिग्धों के शरीर का तापमान जानने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा ट्रेनों को भी ट्रैक किया जा रहा है। इसमें यात्रियों की डिटेल्स से लेकर उसने किस ट्रेन में सफर किया और उसके आसपास कौन बैठा था उसकी भी जानकारी ली जा रही है।

सिंगापुरः सराकर की वेबसाइट कोरोनावायरस मरीजों के आसपास की जानकारी भी दे रही हैं। सरकार की ट्रेस टूगेदर ऐप ब्लूटूथ का इस्तेमाल कर बता रही हैं कि दो लोगों के बीच कम से कम दो मीटर की दूरी है या नहीं। हालांकि, इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की अनुमति लेना अनिवार्य है।

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