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महिंदा राजपक्षे ने किया माफ: 5 भारतीय मछुआरों को किया रिहा

श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की ओर से माफी मिलने के बाद मौत की सजा पाए पांच भारतीय मछुआरों को बुधवार को रिहा कर दिया गया। इन्हें मादक पदार्थ की कथित तस्करी के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। कारागार अधिकारियों ने कहा कि आगे की कार्रवाई के लिए इन मछुआरों को आव्रजन […]

Author November 20, 2014 3:48 PM
श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की ओर से माफी मिलने के बाद मौत की सजा पाए पांच भारतीय मछुआरों को रिहा कर दिया गया

श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की ओर से माफी मिलने के बाद मौत की सजा पाए पांच भारतीय मछुआरों को बुधवार को रिहा कर दिया गया। इन्हें मादक पदार्थ की कथित तस्करी के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। कारागार अधिकारियों ने कहा कि आगे की कार्रवाई के लिए इन मछुआरों को आव्रजन अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया गया है।

भारतीय उच्चायोग ने एक बयान में कहा-हम इस बात की पुष्टि करके खुश हैं कि उन पांच भारतीय मछुआरों को बुधवार को भारत वापस भेजे जाने के लिए रिहा कर दिया गया जिन्हें 30 अक्तूबर, 2014 को कोलंबो हाई कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी। हम श्रीलंका के राष्ट्रपति महामहिम महिंदा राजपक्षे के उनके मानवीय व्यवहार के लिए बहुत आभार प्रकट करते हैं। इससे भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत व बहुमुखी संबंधों को आगे मजबूती मिलेगी।

राष्ट्रपति के प्रवक्ता मोहन समरनायके ने कहा कि राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने मछुआरों को माफी प्रदान की है। श्रीलंका में भारतीय उच्चायुक्त वाईके सिन्हा ने कहा-हम पांच भारतीय मछुआरों की सजा खत्म करने और उन्हें जेल से रिहा करने के लिए राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे का धन्यवाद करना चाहते हैं। सिन्हा ने मछुआरों की रिहाई के बाद उनकी खैरियत जानने के लिए उनसे मुलाकात की। उन्होंने कहा कि उच्चायोग इन पांचों भारतीय मछुआरों को जल्द से जल्द स्वदेश भेजने के लिए प्रबंध कर रहा है।

राजपक्षे की ओर यह कदम उस वक्त उठाया गया है जब दक्षेस शिखर सम्मेलन के शुरू होने में एक सप्ताह से भी कम समय रह गया है। नेपाल में होने वाले दक्षेस शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे। भारतीय मछुआरों एमरसन, पी अगस्तस, आर विल्सन, के प्रसाद और जे लैंगलेट को 2011 में गिरफ्तार किया गया था। पिछली 30 अक्तूबर को कोलंबो हाई कोर्ट ने इन लोगों को मादक पदार्थ की कथित तस्करी के मामले में मौत की सजा सुनाई थी। इनका ताल्लुक तमिलनाडु से है।

सजा के फैसले को लेकर तमिलनाडु के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए थे। रामेश्वरम और आसपास के इलाकों में हिंसा भी भड़क गई थी। भारत ने पिछली 11 नवंबर को श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की। इसी मुद्दे पर पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजपक्षे के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। मछुआरों का मुद्दा श्रीलंका और भारत दोनों के लिए बहुत भावनात्मक रहा है।

अन्नाद्रमुक व द्रमुक और तमिलनाडु के दूसरे राजनीतिक दल सरकार पर इस मामले को श्रीलंका के समक्ष गंभीरता से उठाने के लिए दबाव बनाते रहे हैं। अक्सर श्रीलंका से शीर्ष नेताओं के भारत आने का तमिलनाडु में विरोध भी हुआ है।

 

 

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