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गठन के दो महीने बाद ही BKU में पड़ गई थी फूट, 35 साल में कई बार टूटा ये किसान संगठन, टिकैत बंधुओं का वर्चस्व बना रहा

किसान यूनियन से अलग होकर राज किशोर पिन्ना ने भी भारतीय किसान यूनियन (सर्वे) का गठन किया था। मुजफ्फरनगर के ठाकुर किसान नेता पूरण सिंह भी अलग होकर भारतीय किसान संगठन नाम से अपना संगठन चला रहे हैं।

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राकेश टिकैत (फोटो- twitter/@RakeshTikaitBKU)

भारतीय किसान यूनियन में फूट के बाद भारतीय किसान यूनियन दो गुटों में बंट गई है। किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत और राकेश टिकैत से अलग होकर कुछ नेताओं ने भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) नाम से अपना संगठन बना लिया है। BKU के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेश सिंह चौहान इस नए संगठन के अध्यक्ष होंगे। लेकिन, यह पहला मौका नहीं है जब किसान यूनियन में टूट हुई हो बल्कि 35 साल के इतिहास में संगठन में कई बार बगावत हो चुकी है। भारतीय किसान यूनियन से नाराज नेता भाकियू के नाम से या मिलते-जुलते नाम से अपना अलग संगठन बना चुके हैं।

रविवार (15 मई) को महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में विवाद हुआ और BKU दो भाग में बंट गई। नए संगठन के चीफ राजेश चौहान ने टिकैत बंधुओं पर आरोप लगाया है कि किसान आंदोलन के बाद संगठन किसानों के मुद्दों से भटक गई और राजनीतिक मुद्दों की ओर जाने लगी।

1987 में हुआ था भाकियू का गठन: 1 मार्च 1987 को किसानों के मुददे को लेकर महेंद्र सिंह टिकैत ने भारतीय किसान यूनियन का गठन किया था। इसी दिन शामली के करमूखेड़ी बिजलीघर पर संगठन ने पहला धरना शुरू किया था। 17 मार्च 1987 को भाकियू की पहली बैठक हुई और फैसला लिया गया कि भाकियू एक गैर-राजनीतिक दल के रूप में किसानों की लड़ाई लड़ेगा। महेंद्र सिंह टिकैत को बालियान खाप से लेकर गठवाला खाप मुस्लिम किसान का पूरा समर्थन मिला और वो एक बड़े किसान नेता के रूप में सामने आए। टिकैत बंधुओं ने कई बार केंद्र और राज्य सरकारों को अपनी मांगों के आगे झुकाया।

जून 1987 में अलग हुए चौधरी सुखबीर सिंह: जून 1987 में महेंद्र सिंह टिकैत का चौधरी सुखबीर सिंह से विवाद हुआ और उन्होंने खुद को BKU से अलग कर लिया था। अक्टूबर 1988 में जब महेंद्र सिंह टिकैत ने दिल्ली के बोट क्लब पर धरना खत्म किया उसके बाद कई नेताओं ने संगठन से अलग राह पकड़ ली। महेंद्र सिंह टिकैत के भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के दौरान उत्तर प्रदेश में संगठन की कमान भानु प्रताप सिंह के हाथों में हुआ करती थी।

जब महेंद्र सिंह टिकैत ने किसान कामगार नाम से राजनीतिक पार्टी बनाई तो उसकी कमान भानु प्रताप सिंह को सौंपी। लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी की कमान चौधरी अजित सिंह को सौंप दी जिसकी वजह से भानु प्रताप नाराज हो गए। साल 2006 में महेंद्र टिकैत ने उन्हें दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाया। 2008 में राकेश टिकैत ने इलाहाबाद की बैठक में भानु प्रताप पर आरोप लगाया, जिसके बाद उन्होंने भारतीय किसान यूनियन (भानु गुट) नाम से अलग संगठन बना लिया।

हरियाणा भाकियू के अध्यक्ष रह चुके ऋषिपाल अंबावता ने भी भाकियू अंबावता के नाम से अलग संगठन बनाया था। भाकियू (तोमर) संगठन भी किसान यूनियन से निकली है। चौधरी हरिकिशन मलिक ने भी BKU से अलग होकर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन का गठन किया था।

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