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विशेष: पंचक क्या है, क्यों लगता है, क्या होता है असर

धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्रों के मेल से बनने वाले विशेष योग को 'पंचक' कहा जाता है।

Author Updated: September 28, 2020 4:55 AM
पंचक योग के दौरान कई तरह के शुभकार्यों की मनाही होती है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह में पांच ऐसे दिन आते हैं जिनका अलग ही महत्व होता है जिन्हें पंचक कहा जाता है। प्रत्येक माह का पंचक अलग अलग होता है तो किसी माह में शुभ कार्य नहीं किया जाता है तो किसी माह में किया जाता है। इस बार 28 सितंबर 2020 सोमवार से धनिष्ठा नक्षत्र में प्रारंभ हो रहे पंचक का नाम राज पंचक है। आओ जानते हैं पंचक क्या और क्यों लगता है एवं इसका प्रभाव क्या होता है।

पंचक क्या और क्यों लगता है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चन्द्र ग्रह का धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण और शतभिषा, पूवार्भाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र के चारों चरणों में भ्रमण काल पंचक काल कहलाता है। इस तरह चन्द्र ग्रह का कुम्भ और मीन राशी में भ्रमण पंचकों को जन्म देता है। अर्थात पंचक के अंतर्गत धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र आते हैं। इन्हीं नक्षत्रों के मेल से बनने वाले विशेष योग को ‘पंचक’ कहा जाता है।

जानकारी: संतों के दर्शन मात्र से नष्ट होते पाप
संत-महात्माओं के दर्शन मात्र और चरण स्पर्श से तीन जन्मों के पाप नष्ट होते हैं। हमारा कल्याण होता है। संत-महात्माओं ने जिस तप को बड़ी मेहनत करके एवं त्याग-तपस्या से प्राप्त किया है, उस तप को वे खुले दिल से देने के लिए तैयार बैठे हैं। कोई लेता है तो खुश होते हैं। ठीक उसी प्रकार से जैसे दुकानदार का जितना भी माल बिकता है वह उतना ही खुश होता है। संत-महात्मा जग का कल्याण होने से प्रसन्न होते हैं।

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