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ज्ञानवापी: वज़ूखाने को लेकर SC के आदेश पर डिबेट में अनुराग भदौरिया ने दिया गीता का ज्ञान, आंख बंद कर मंत्र का पाठ करने लगे

ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर चल रही एक टीवी डिबेट में सपा प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने कहा कि भगवान तो कण-कण में व्याप्त हैं और अगर आपके दिल में आस्था है तो यहां बैठे-बैठे उनको याद करोगे तो वे आपको मिलेंगे।

Gyanvapi Masjid|Anurag Bhadouria|Samajwadi Party
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया (Photo Credit- Facebook/ Anurag Bhadouria)

ज्ञानवापी मस्जिद पर एक डिबेट में समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया गीता का ज्ञान देते नजर आए। इतना ही नहीं, आंख बंद करके उन्होंने मंत्र का पाठ भी किया। ज्ञानवापी मस्जिद में वज़ूखाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चल रही एक टीवी चैनल की डिबेट में भदौरिया ने यह ज्ञान दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश को लेकर हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने कहा कि कोर्ट ने भी वज़ूखाने को सील करने का आदेश बरकरार रखा है और कहा कि वज़ू के लिए अलग व्यवस्था की गई है। इस दौरान, हिंदू और मुस्लिम पक्ष के पैनलिस्ट के बीच बहस शुरू हो गई। तभी, अनुराग भदौरिया ने गीता का जिक्र करते हुए कहा कि प्रभू तो कण-कण में व्याप्त हैं।

उन्होंने कहा, “मैं भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी को कहूंगा कि अगर आस्था है तो अभी बैठे-बैठे मन में प्रभू को याद करेंगे तो प्रभु मिलेंगे।” इसके बाद आंख बंद करके वे गीता के एक मंत्र का पाठ करने लगे। उन्होंने कहा, “नमामीशमिशान निर्वाण रूपं विभुं व्यापकं ब्रह्म वेद: स्वरुपम् । निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाश मकाशवासं भजेऽहम्‌ ॥”

ज्ञानवापी मस्जिद मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि इस केस को वाराणसी जिला अदालत देखेगी। कोर्ट ने कहा कि जिला अदालत में वरिष्ठ जज पूरे मामले की सुनवाई करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवआई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ ने कहा कि इस दीवानी वाद मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सिविल जज वाराणसी को यह मामला ट्रांसफर होगा, जिसपर अनुभवी न्यायिक अधिकारी सुनवाई करेंगे। अब तक सिविल जज सीनियर डिवीजन वाराणसी इसकी सुनवाई कर रहे थे।

ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सुनवाई के बाद आदेश देते हुए तीन जजों की बेंच ने कहा कि 17 मई का अंतरिम आदेश फैसला आने तक और उसके 8 सप्ताह तक लागू रहेगा ताकि जिला जज के आदेश को पीड़ित पक्ष चुनौती दे सके।

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