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सोनू निगम विवाद पर हाजी अली दरगाह का बयान- ध्वनि प्रदूषण मानकों का पालन करते हैं, इस्लाम में दूसरों को तकलीफ देने की मनाही

गैर सरकारी संगठनों का कहना है मंदिर और मस्जिद दोनों ही ध्वनि प्रदूषण के मानकों का उल्लंघन करते हैं।

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मुंबई के मस्जिदों और दरगाहों के संगठन ने गायक सोनू निगम के बयान को खारिज किया है और कहा है कि उन्हें सरकारी नियमों का ख्याल है और वे ध्वनि प्रदूषण पर इसका पालन भी करते हैं। यही नहीं भारत की आर्थिक राजधानी के मंदिरों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उन्हें सरकारी कायदे कानून का पूरा ख्याल है और वे कोशिश करते हैं कि मंदिरों में लगे लाउडस्पीकर से आस पास रहने वाले लोगों को परेशानी ना हो। मुंबई के सबसे प्रसिद्ध दरगाह हाजी अली से जुड़े लोगों का कहना है कि अजान के दौरान हम लाउडस्पीकर की आवाज कम कर देते हैं ताकि लोगों को परेशानी ना हो। अंग्रेजी वेबसाइट हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक मस्जिद के मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य मुफ्ती मंसूर जियाई ने कहा, ‘अजान के दौरान हम लाउडस्पीकर की आवाज को धीमा कर देते हैं ताकि सरकारी नियमों का उल्लंघन ना हो, ये कई सालों से प्रैक्टिस में है, क्योंकि इस्लाम में दूसरों को किसी भी तरह से तकलीफ देने की मनाही है।’ मंसूर जियाई का कहना है कि इससे ज्यादा आवाज़ तो रेल, हवाई जहाज और सड़कों की ट्रैफिक से होता है, पता नहीं ये सेलिब्रेटी इस पर आवाज क्यों नहीं उठाते।
जुम्मा मस्जिद ट्रस्ट बॉम्बे के सदस्य नूर मोहम्मद ने कहा कि, जब सरकार को इससे कोई दिक्कत नहीं होती तो सोनू निगम इस पर टिप्पणी करने वाले कौन होते हैं वो झूठ मूठ का तनाव पैदा कर रहे हैं। इधर मंदिरों ने भी पूजा आरती और कीर्तन के दौरान ध्वनि प्रदूषण के नियमों का पालन करने का दावा किया है। महालक्ष्मी मंदिर के प्रबंधन से जुड़े एक सदस्य ने कहा कि मंदिर के आस पास के इलाके को शांति क्षेत्र के रुप में माना जाता है। उन्होंने कहा कि यहां सिर्फ आस पास के ट्रैफिक की वजह से शोर होता है। वहीं मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर के पदाधिकारियों का कहना है कि वे मंदिर से निकलने वाली आवाज पर नियंत्रण रखते हैं ताकि आस-पास के लोगों को परेशानी ना हो। हिन्दुस्तान टाइम्स की रपोर्ट के मुताबिक मंदिर के ट्रस्ट के चेयरपर्सन नरेन्द्र राणे का कहना है कि मंदिर से ज्यादा आवाज तभी होता है जब किसी किस्म की घोषणा की जाए, या फिर संध्या पूजन होता है।

हालांकि गैर सरकारी संगठनों का कहना है मंदिर और मस्जिद दोनों ही ध्वनि प्रदूषण के मानकों का उल्लंघन करते हैं। गैर सरकारी संगठन आवाज फाउंडेशन के मुताबिक मस्जिदों से निकलने वाली ध्वनि 97 डेसिबल्स तक होती है जो कि एक ड्रिलिंग मशीन जितनी शोर करती है। जबकि मंदिर भी कई बार ध्वनि प्रदूषण के मानक को तोड़ते हैं। महालक्ष्मी मंदिर से निकलने वाली आवाज़ की सीमा कई बार कथित रुप से 100 डेसिबल्स को पार कर जाती है।

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