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शिवगिरी मठ से सोनिया का मोदी पर हमला

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भाजपा पर परोक्ष हमला बोलते हुए बुधवार को कहा कि सांप्रदायिक विचारधारा और व्यक्तियों द्वारा राजनीतिक हित साधने के लिए पूर्वग्रह और कट्टरता फैलाकर प्रख्यात समाज सुधारक श्री नारायण गुरु की विरासत पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है..
Author वर्कला (केरल) | December 31, 2015 00:04 am
शिवगिरी मठ में सोनिया गांधी।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भाजपा पर परोक्ष हमला बोलते हुए बुधवार को कहा कि सांप्रदायिक विचारधारा और व्यक्तियों द्वारा राजनीतिक हित साधने के लिए पूर्वग्रह और कट्टरता फैलाकर प्रख्यात समाज सुधारक श्री नारायण गुरु की विरासत पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। सोनिया ने शिवगिरि मठ के अपने दौरे के दौरान यह टिप्पणी की। सोनिया ने यह टिप्पणी ऐसे समय की है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारायण गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए 15 दिसंबर को मठ का दौरा किया था। केरल में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है।

मोदी ने तब कांग्रेस पर संसद की कार्यवाही लगातार बाधित करने को लेकर निशाना साधा था और उस पर लोकतंत्र का मजाक बनाने का आरोप लगाया था। प्रधानमंत्री ने साथ ही कांग्रेस पर यह आरोप भी लगाया था कि उसने देश को बर्बाद करने का फैसला कर लिया है क्योंकि वह लोकसभा चुनाव में हार पचा नहीं पा रही है।

सोनिया ने यहां नारायण गुरु के धाम शिवगिरि मठ में 83वीं वार्षिक तीर्थयात्रा का उद्घाटन भाषण देते हुए कहा कि गुरु की शिक्षाओं को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश की जा रही है और यह उनके साथ धोखे के बराबर है। उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि श्री नारायण गुरु से इससे बड़ा विश्वासघात नहीं हो सकता कि उनकी विरासत पर सांप्रदायिक विचारधारा और व्यक्तियों द्वारा कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है जिनका उद्देश्य पूर्वग्रह, कट्टरता फैलाकर और समाज को बांटकर राजनीतिक सत्ता प्राप्त करना है’।

श्री नारायण धर्म परिपालना संगम (एसएनडीपी) योगम के केरल में भाजपा के साथ गठबंधन करने की पृष्ठभूमि में सोनिया का यह बयान अहम है। केरल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और एसएनडीपी संख्याबल के हिसाब से मजबूत पिछड़े एझावा समुदाय का एक संगठन है। नारायण गुरु ने शिवगिरि मठ की स्थापना केरल में पिछड़े एझावा समुदाय के एक प्रमुख आध्यात्मिक और तीर्थ केंद्र के तौर पर की थी। उन्होंने मठ की स्थापना समाजिक सुधार और सामाजिक समानता के एक प्रमुख प्रतीक के तौर पर की थी। उन्होंने हमेशा मानव जाति के लिए एक जाति, एक धर्म और एक ईश्वर का समर्थन किया।

सोनिया ने कहा कि नारायण गुरु सभी धर्मों का सम्मान करने में विश्वास रखते थे और उन्होंने अपने अनुयायियों को भी सभी धर्मों का सम्मान करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1924 में एर्नाकुलम के अलुवा में एक समागम में उन्होंने ‘धार्मिक संघर्ष से दूर रहने और सार्वभौमिक शांति, सौहार्द्र और सभी धर्मों की समृद्धि को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर’ बल दिया था।

उन्होंने कहा कि नारायण गुरु ने समानता, स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय की जो शिक्षा दी थी वह ‘आज भी अत्यंत प्रासंगिक है। बल्कि मैं यह कहूंगी कि वे (शिक्षाएं) आज अधिक प्रासंगिक हैं’। सोनिया ने कहा कि यह दुख की बात है कि देश में जाति के आधार पर भेदभाव अभी भी मौजूद है।

उन्होंने कहा, ‘दु:ख की बात है कि जाति आधारित भेदभाव अब भी होता है और हमें इस क्षेत्र में अब भी बहुत काम करने की जरूरत है। हम सभी को देश में सभी तरह के भेदभाव को पूरी तरह से खत्म करने के लिए काम करना चाहिए। इसे समाप्त करना हमारे हाथ में है’।

उन्होंने एझावा समुदाय तक पहुंच बनाते हुए कहा कि ‘गुरु आध्यात्मिकता और सामाजिक सुधारों के एक वास्तुकार थे जिनके लिए आध्यात्मिकता का मतलब गरीबों और कमजोरों की सेवा और पूरी मानवता का कल्याण था’।

सोनिया ने एसएनडीपी महासचिव वेल्लपल्ली नटेसन का नाम लिए बिना कहा, ‘यदि वह (एसएनडीपी) इस संगठन के कुछ लोगों के राजनीतिक लाभ के लिए उन सिद्धांतों और उद्देश्यों से दूर हो जाता है (जिसके लिए इसकी स्थापना हुई है) तो यह श्री नारायण गुरु की शिक्षाओं के पूरी तरह विपरीत होगा’।

केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी को 15 दिसंबर को मोदी के कार्यक्रम में निमंत्रित नहीं किया गया था। इससे एक विवाद पैदा हो गया था। चांडी ने कहा कि धर्म, जाति और पंथ के नाम पर समाज को बांटने के प्रयासों को नारायण गुरु की विचारधाराओं को बरकरार रखते हुए चुनौती दी जानी चाहिए।

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