कर्नाटक में क्या मुख्यमंत्री बदला जाएगा? क्या सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार लेंगे? यह तमाम ऐसे सवाल हैं जो कांग्रेस पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच कई मौकों पर उठते रहे हैं। इतना ही नहीं डीके शिवकुमार के समर्थक भी कई बार इस बात का दावा करते नजर आए हैं कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार का कार्यकाल ढाई-ढाई साल को होगा, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक बार फिर से सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को लेकर चल रहे इस विवाद को लेकर बयान दिया है। खड़गे ने गुरुवार को कहा कि पार्टी इस मसले को जल्द से जल्द सुलझा लेगी। यह घटनाक्रम कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर के उस बयान के एक दिन बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर खड़गे मुख्यमंत्री बनते हैं तो सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी में सभी लोग उनका स्वागत करेंगे।

मीडिया से बात करते हुए खड़गे ने इन अटकलों को खारिज कर दिया और कहा कि उनके बारे में फैसले सोनिया गांधी लेती हैं। उन्होंने कहा कि आप (मीडिया), वह (परमेश्वर) और शीर्ष पर बैठे लोग कहते हैं कि मेरा मुख्यमंत्री बनना बेहतर होगा। लेकिन भाग्य से ज्यादा, मेरी विचारधारा और पार्टी के प्रति अब तक की मेरी सेवा के आधार पर सोनिया गांधी मेरे बारे में निर्णय लेती हैं।

उन्होंने आगे कहा, “लेकिन, अभी यह सवाल उठता ही नहीं है। यहां पहले से ही मुख्यमंत्री हैं। अगर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मुझे मिलकर बदलाव की दिशा में कोई फैसला लेना होगा, तो इसमें कुछ समय लगेगा। देखते हैं क्या होता है।”

उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थक 2023 के विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ हुए सत्ता-साझाकरण समझौते के अनुरूप उनकी पदोन्नति पर जोर दे रहे हैं।

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही अटकलों के बीच परमेश्वर ने बुधवार को कहा कि अगर अनुभवी वरिष्ठ राजनेता खड़गे मुख्यमंत्री बनते हैं तो सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी में सभी इसका स्वागत करेंगे।

पिछले साल नवंबर में कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के आधा कार्यकाल पूरा होते ही सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सत्ता संघर्ष तेज हो गया। डीकेएस पार्टी के कई विधायक और एमएलसी दिल्ली में डेरा डाले रहे, ताकि पार्टी हाई कमांड पर उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाने का दबाव बनाया जा सके।

डीके शिवकुमार ने यह दावा करके अटकलों को और हवा दी थी कि 2023 के चुनावों में कांग्रेस की भारी जीत के तुरंत बाद “पांच-छह नेताओं के बीच नेतृत्व परिवर्तन पर एक गोपनीय समझौता हुआ था। उपमुख्यमंत्री ने सत्ता समझौते का पहली बार जिक्र किया, लेकिन अधिक जानकारी देने से परहेज किया। उन्होंने कहा था कि यह गोपनीय मामला है। मैं इस पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहना चाहता।

कांग्रेस सरकार के पांच वर्षीय कार्यकाल का आधा कार्यकाल 20 नवंबर, 2025 को पूरा होने के बाद मुख्यमंत्री पद में संभावित बदलाव की अटकलों के बीच सत्ताधारी पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान तेज हो गई है। 2023 में सरकार गठन के समय सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच कथित “सत्ता-साझाकरण” समझौते ने इन अटकलों को और बल दिया है।

2023 में कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस की जीत के बाद पार्टी हाई कमान मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर असमंजस में थी। कई दिनों के विचार-विमर्श के बाद पार्टी ने सिद्धारमैया के वरिष्ठता और लोकप्रियता को देखते हुए उनके नाम को आगे बढ़ाया। हालांकि, खबरों के मुताबिक, इस बात पर सहमति बनी कि सरकार के दूसरे कार्यकाल में डीके शिवकुमार कमान संभालेंगे।

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