ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली हुसैनी खामेनेई की मौत के बाद भारत सरकार के रुख पर सोनिया गांधी ने सवाल खड़े किए हैं। सोनिया गांधी ने द इंडियन एक्सप्रेस में लिखे एक लेख के जरिए कहा कि भारत सरकार ने खामनेई की हत्या और ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन की सीधी निंदा से परहेज किया।

पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा UAE पर हुए हमले की निंदा करने को लेकर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने UAE पर ईरान के जवाबी हमले की निंदा करने तक ही खुद को सीमित रखा और उससे पहले की घटनाओं के बारे में बात नहीं की।

सोनिया गांधी ने अपने लेख के जरिए कहा कि कि जब किसी विदेशी नेता की टारगेटेड हत्या के लिए हमारे देश से संप्रभुता या अंतर्राष्ट्रीय कानून का कोई साफ बचाव नहीं होता है और निष्पक्षता को छोड़ दिया जाता है, तो यह हमारी विदेश नीति की दिशा और भरोसे पर गंभीर शक पैदा करता है।

‘न्यूट्रल रहने को तटस्थ रहना नहीं माना जा सकता’

सोनिया गांधी ने कहा कि न्यूट्रल रहने को तटस्थ रहना नहीं माना जा सकता। उन्होंने लिखा कि जिस समय खामेनेई की हत्या की गई, उस समय बातचीत चल रही थी और युद्ध की घोषणा नहीं की गई थी। UN के नियमों का हवाला देखे हुए उन्होंने कहा कि UN चार्टर का आर्टिकल 2(4) किसी भी देश द्वारा अन्य किसी देश की सीमा या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ ताकत के इस्तेमाल या धमकी देने पर रोक लगाता है।

उन्होंने आगे कहा कि किसी भी देश के प्रमुख को टारगेट कर माना इंटरनेशनल नियमों और सिद्धांतो के खिलाफ माना जाता है। अगर दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत इसका स्पष्ट और सिद्धांत आधारित विरोध नहीं करेगा तो ऐसे नियम धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाएंगी और ऐसी घटनाएं भविष्य में सामान्य समझी जाने लगेंगी।

पीएम की हालिया इजरायल यात्रा पर भी किए सवाल

सोनिया गांधी ने कहा कि इस घटना से महज 48 घंटे पहले ही पीएम नरेंद्र मोदी इजरायल से लौटे थे, जहां उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के लिए समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि इसमें समस्या यह है कि गाजा में बहुत बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे गए हैं, ग्लोबल साउथ के देश भी इस मामले में दूरी बना रहे हैं। यहां तक कि BRICS में भारत के साथी रूस और चीन भी बेहद सावधानी से फैसले ले रहे हैं।

कांंग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने यह भी कहा कि भारत ने बहुत खुलकर राजनीतिक समर्थन दिखाया लेकिन नैतिक रूप से स्थिति क्लीयर नहीं की। इसलिए यह भारत की विदेश नीति में नया और थोड़ा चिंताजनक बदलाव लगता है। उन्होंने कहा कि भारत के रुख से ऐसा लग रहा कि वह इस घटना को चुपचाप समर्थन दे रहा है। यहां पढ़िए पूरा लेख

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कश्मीर, कारगिल और लखनऊ के कुछ हिस्सों में शिया मुसलमान खामेनेई को बहुत सम्मान देते हैं। लखनऊ और उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र के रिज़वी सैयद अपना वंश ईरान से जोड़ते हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहांं क्लिक करें