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अक्तूबर में अध्यक्ष पद छोड़ सकती हैं सोनिया

पिछले साल नवंबर में हुई सीडब्लूसी की बैठक में सदस्यों ने एकमत से यह मजबूत भावना व्यक्त की थी कि राहुल को पार्टी की कमान सौंपी जाए।

Author नई दिल्ली | June 7, 2017 6:30 AM
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी।

कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी 15 अक्तूबर तक पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ सकती हैं। इससे इस पद की जिम्मेदारी उठाने के लिए राहुल गांधी का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। कांगे्रस की निर्णय करने वाली सबसे बड़ी इकाई कांगे्रस कार्यसमिति की मंगलवार को आयोजित बैठक में पार्टी के आंतरिक चुनाव कार्यक्रम को मंजूरी दी गई। इस प्रक्रिया को 15 अक्तूबर तक पूरा किया जाना है। कांगे्रस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर हुई बैठक में पार्टी प्रमुख ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार महिलाओं, दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों समेत समाज के विभिन्न वर्गों के लिए किए गए वादों को पूरा करने में नाकाम रही है। बैठक में पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, एके एंटनी, पी चिदंबरम और गुलाम नबी आजाद समेत विभिन्न वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। कार्यसमिति की बैठक में सोनिया गांधी ने पार्टी जनों से कांगे्रस को मजबूत करने और संगठन चुनाव को गति और गंभीरता के साथ पूरा करने को कहा। कार्यसमिति की बैठक के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद से जब यह पूछा गया कि क्या राहुल की पदोन्नति होगी, उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर विशेष तौर पर चर्चा नहीं हुई। उन्होंने कहा, ‘सीडब्लूसी ने संगठन चुनाव के कार्यक्रम को मंजूरी दे ही है।’

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पिछले साल नवंबर में हुई सीडब्लूसी की बैठक में सदस्यों ने एकमत से यह मजबूत भावना व्यक्त की थी कि राहुल को पार्टी की कमान सौंपी जाए।बैठक में नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए सोनिया ने कहा, ‘सबसे बुरी बात यह है कि महिलाएं, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक और अन्य उत्पीड़ित वर्ग संकटपूर्ण समय का सामना कर रहे हैं। विभाजनकारी मुद्दों को हवा दी जा रही है व जो लोग अन्य मत या विचार रखते हैं उनके जीवनयापन और खानपान की आदतों पर हमला किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘यह सरकार उन लोगों की आवाज दबाने के लिए राज्य की शक्ति का प्रयोग कर रही है, जो अलग विचार व्यक्त कर रहे हैं या वैकल्पिक नीतियां और दर्शन की बात कर रहे हैं। भले ही वे राजनीतिक नेता, संस्थान, छात्र, सिविल सोसाइटी हों या मीडिया हो, असहिष्णुता बढ़ रही है। कानून की खुलेआम अनदेखी कर अलग स्वरों में बोलने वाले लोगों को पीड़ित किया जा रहा है। सोनिया ने कहा कि भीड़ द्वारा पीट पीटकर मार देने वाली घटनाओं का बढ़ना बेहद चिंताजनक है।’

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर का संकट इस सरकार की भारी विफलता का परिणाम है। सीमापार आतंकवाद में वृद्धि हो रही है। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से संवेदनहीन ढंग से स्थिति से निबटने के कारण स्थानीय आबादी विशेषकर युवक अलग-थलग महसूस और क्रुद्ध हो रहे हैं। बैठक को संबोधित करते हुए मनमोहन ने कहा कि नोटबंदी के कारण भारत के आर्थिक विकास में भारी गिरावट आई है।बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत के गत वित्त वर्ष की चौथी तिमाही और पूरे वित्त वर्ष 2016-17 के जीडीपी आंकड़े कुछ दिन पहले जारी किए गए। भारत के आर्थिक विकास में भारी गिरावट आई है, मुख्यत: नवंबर 2016 में की गई नोटबंदी घोषणा के कारण। आर्थिक गतिविधियों को बताने वाला वास्तविक उप माप सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में भारी और निरंतर कमी आई है। निजी क्षेत्र का निवेश ध्वस्त हो गया है। अर्थव्यवस्था एकमात्र सार्वजनिक व्यय से चल रही है। उद्योगों का जीवीए जो मार्च 2016 में 10.7 फीसद था वह मार्च 2017 में घटकर 3.8 फीसद रह गया। इसमें करीब सात फीसद की गिरावट आई। पूर्व प्रधानमंत्री ने रोजगार सृजन को सबसे चिंताजनक पहलू बताया। उन्होंने कहा कि इसमें सबसे चिंताजनक बात रोजगार सृजन का प्रभाव है। देश के युवाओं के लिए रोजगार मिलना बहुत कठिन हो गया है। देश में सबसे अधिक रोजगार सृजन करने वाला निर्माण उद्योग सिकुड़ रहा है। इसका मतलब है कि देश में लाखों नौकरियां खत्म हो रही हैं।

बैठक के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने संवाददाताओं को बताया कि बैठक में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव पर भी चर्चा हुई। कांगे्रस अध्यक्ष की इस बारे में विपक्ष के विभिन्न दलों के नेताओं के साथ बैठक हुई थी। विपक्षी नेताओं का मानना है कि राष्ट्रपति पद पर ऐसे व्यक्ति को बैठना चाहिए जो संविधान की रक्षा कर सके। आजाद ने बताया कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव के बारे में विचार के लिए एक उप समूह बनाया गया है। इस समूह की अगले हफ्ते बैठक होगी। सीडब्लूसी की बैठक में संगठनात्मक चुनाव के कार्यक्रम को भी मंजूरी दी गई। बैठक में कांगे्रस अध्यक्ष ने पार्टी नेताओं को 2019 के आम चुनाव के लिए सतर्क रहने को कहा। उन्होंने कहा, ‘हम 2019 के चुनाव से बहुत दूर नहीं हैं। हमें भारत की मूल आत्मा और विचार की रक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए जिसे यह सरकार मिटाने का प्रयास कर रही है।’

 

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