ताज़ा खबर
 

मन की बात करने वाले मौन क्यों: सोनिया

संसद में चल रहे गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से प्रधानमंत्री के ललितगेट और व्यापमं मामले में हस्तक्षेप करने के प्रस्ताव को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी..

संसद में चल रहे गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से प्रधानमंत्री के ललितगेट और व्यापमं मामले में हस्तक्षेप करने के प्रस्ताव को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने खारिज कर दिया। कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि जब तक गलत कार्यों के लिए जिम्मेदार लोग पदों पर बने रहेंगे तब तक कोई सकारात्मक चर्चा नहीं हो सकती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विदेश मंत्री और दो मुख्यमंत्रियों के किए गए घोर अपराधों पर उनकी चुप्पी खटक रही है।

सोनिया ने कांग्रेस संसदीय दल की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री और भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा- ऐसा लगता है कि मन की बात के चैंपियन ने मौन व्रत धारण कर लिया है। कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि पार्टी का रुख इस मामले में बिल्कुल स्पष्ट है कि जब तक गलत कार्यों के लिए जिम्मेदार लोग पदों पर बने रहेंगे, तब तक कोई सकारात्मक चर्चा या अर्थपूर्ण कार्यवाही नहीं हो सकती।

दो हफ्ते के गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से बुलाई जाने वाली सर्वदलीय बैठक से पहले सोनिया गांधी ने कहा कि हमारा रुख पहले दिन से ही साफ और स्पष्ट है। विदेश मंत्री और दो मुख्यमंत्रियों के इस्तीफों की मांग करने के लिए प्रधानमंत्री के सामने सार्वजनिक तौर पर अखंडनीय साक्ष्यों का पूरा पहाड़ है।

‘पहले इस्तीफा, बाद में चर्चा’ वाले रुख के लिए आवाज उठाते हुए सोनिया गांधी ने इस बात पर हैरानी जताई कि क्या भाजपा यह भूल गई है कि वही इस सिद्धांत की लेखक है और इसका इस्तेमाल वर्ष 1993 के बाद से वह कम से कम पांच बार कर चुकी है। उन्होंने कहा- आज हमें उन लोगों से संसदीय व्यवहार पर उपदेश सुनने पड़ रहे हैं, जिन्होंने विपक्ष में रहने के दौरान गतिरोध का न सिर्फ बचाव किया बल्कि एक वैध रणनीति के रूप में इसका समर्थन भी किया।

मॉनसून सत्र समाप्त होने में सिर्फ दो हफ्ते बचे हैं। सरकार की ओर से कांग्रेस के खिलाफ लगाए गए संसद बाधित करने के आरोपों के जवाब में सोनिया ने कहा कि मैं बता देना चाहती हूं कि हम भाजपा की पूर्व में दिखाई गई आक्रामकता से सिर्फ बराबरी करने के लिए आक्रामक नहीं हो रहे हैं।

उन्होंने कहा- हमें सरकार के पूर्णतया निर्लज्ज रवैये के कारण अपना मोर्चा संभालने के लिए विवश होना पड़ा। निश्चित तौर पर हम चाहते हैं कि दोनों सदन चलें। निश्चित तौर पर हम चाहते हैं कि विधेयकों पर बहस हो और उन्हें पारित किया जाए।

सोनिया ने कहा- निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री पुरानी चीजों को नए पैकेज में पेश करने में सिद्धहस्त, एक कुशल विक्रेता, सुर्खियां बटोरने में माहिर और खबरों के चतुर प्रबंधक रहे हैं। एक दिन भी ऐसा नहीं जाता, जब यूपीए के किसी कार्यक्रम को नया नाम या नया रूप न दिया गया हो। प्रधानमंत्री मोदी पर व्यंग्य कसते हुए सोनिया ने कहा कि कांग्रेस प्रधानमंत्री के इस विशेषाधिकार से इनकार नहीं कर सकती।

सरकार और इसके सर्वोच्च नेता के ‘स्वीकार करो या छोड़ दो’ वाले रवैए को सभी लोकतांत्रिक नियमों के खिलाफ बताते हुए सोनिया ने कहा- अहंकार से भरे हुए, दिखावटी और पाखंडी भाषण नहीं चलेंगे। यह सरकार की मूलभूत जिम्मेदारी है कि वह सहयोग के लिहाज से मददगार माहौल को बढ़ावा दे।

उन्होंने दावा किया कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय को एक विचारधारा विशेष का बंधक बना दिया गया है, यह पूरे देश, विशेषकर युवाओं के लिए चिंता का विषय होना चाहिए, जिनका भविष्य सांप्रदायिकता और अध्ययन व संस्कृति का स्तर कम करके खतरे में डाला जा रहा है। सोनिया ने आरोप लगाया कि उच्च शिक्षा के जिन संस्थानों को कई दशकों में बेहद सावधानी के साथ खड़ा किया गया, उनकी स्वायत्तता और क्षमता में व्यवस्थागत ढंग से गिरावट आ रही है।

सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं में कटौतियों के लिए सरकार पर हमला बोलते हुए सोनिया ने कहा कि क्या यह काफी लोगों को छोड़कर कुछ ही लोगों को लाभ पहुंचाने का मोदी मॉडल है, जिसमें बेहद कमजोर लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार किसी भी जमीनी स्तर के आंदोलन और मुखरता को चुप कराने में बेहद फुर्तीली रही है। हजारों गैर सरकारी संगठनों पर सरकार के सख्त कदमों के कारण खतरा मंडरा रहा है। कुछ गैरसरकारी संगठनों के खिलाफ उठाए जाने वाले इन कदमों में प्रतिशोध की भावना स्पष्ट तौर पर दिखाई देती है। ये वे संगठन हैं, जो सत्ता में बैठे लोगों के काले कारनामों का पर्दाफाश करते रहे हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App