सोनिया गांधी के ऑर्डर को तीन दिन लटकाए रखे थे केसी वेणुगोपाल, चिट्ठी लिखने वाले नेताओं का असल निशाना हैं राहुल के ‘दरबारी’

राहुल गांधी के करीबी माने जाने केसी वेणुगोपाल और राजीव सातव दोनों ने साल 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। हालांकि पार्टी की तरफ से इन्हें चुनाव लड़ने के निर्देश थे।

Author Edited By Anil Kumar नई दिल्ली | Updated: August 30, 2020 6:14 PM
Congress, Sonia Gandhi, Rahul Gandhi, kc venugopalकांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला (बाएं) और केसी वेणुगोपाल के साथ कांग्रेस नेता राहुल गांधी। (फाइल फोटो-पीटीआई)

कांग्रेस मे नेतृत्व परिवर्तन की मांग के लेकर 23 नेताओं की तरफ से लिखे गए पत्र का असली निशाना राहुल गांधी के ‘दरबारी’ थे। इंडियन एक्सप्रेस के कॉलम इनसाइड ट्रैक के अनुसार इस पत्र का निशाना गांधी परिवार नहीं होकर राहुल के खास लोग जिन्हें तुगलक लेन क्लब के नाम से जाना जाता है, वे थे।

मालूम हो कि पार्टी से जुड़े हर महत्वपूर्ण मुद्दे को सोनिया गांधी अपने बेटे के पास भेजती हैं। राहुल खुद इन मामलों को हैंडल नहीं करते हैं बल्कि उनके कुछ करीबी नेता इन मामलों को देखते हैं। राहुल का यह खास वर्ग इतना ताकतवर है कि इन लोगों ने सोनिया गांधी के एक आदेश को तीन दिन तक लटकाए रखा। सोनिया गांधी ने हाल ही में मध्यप्रदेश उपचुनाव के लिए पार्टी पर्यवेक्षकों के नामों के मंजूरी दी थी। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने तीन दिन तक इन नामों को अपनी तरफ से क्लियर नहीं किया।

सामान्य रूप से राहुल गांधी बाहर से आने वाले लोगों से मिलने से कतराते हैं, वहीं केसी वेणुगोपाल गेटकीपर की भूमिका में होते हैं। राहुल गांधी के करीबी माने जाने केसी वेणुगोपाल और राजीव साटव दोनों ने साल 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। हालांकि पार्टी की तरफ से इन्हें चुनाव लड़ने के निर्देश थे।

फिर भी इन लोगों को राज्यसभा सांसद के रूप में पुरस्कृत किया गया। अजय माकन, जो लगातार दो लोकसभा चुनाव हार कर अपनी साख गंवा चुके थे और राजनीतिक गुमनामी में थे, को राहुल के खास लोगों के साथ का फायदा मिला। अजय माकन को अचानक राजस्थान का प्रभारी नियुक्त किया गया है। जानकारों का मानना है कि अजय माकन को राजस्थान के बारे में कोई खास जानकारी नहीं हैं।

मालूम हो कि कांग्रेस के 23 वरिष्ठ नेताओं पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी में ऊपर से नीचे तक व्यापक बदलाव करने की मांग की थी। पत्र लिखने वालों में पांच पूर्व मुख्यमंत्री, कई कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य, सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शामिल थे।  इसमें पार्टी के मौजूदा नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। पत्र में एक “पूर्णकालिक और प्रभावी नेतृत्व” की बात कही गई थी।

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