शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और नीट (NEET) परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। गुरुवार को उनकी भूख हड़ताल का 19वां दिन है।

देर रात जारी एक वीडियो मैसेज में 59 वर्षीय वांगचुक ने कहा, ”मैं पूरी तरह ठीक नहीं हूं लेकिन बहुत खराब हालत में भी नहीं हूं।” उन्होंने समर्थकों से अपील की है कि वे उनसे उपवास खत्म करने की अपील ना करें बल्कि 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च में शामिल होकर आंदोलन को मजबूत करें।

उन्होंने कहा, ”मुझसे उपवास तोड़ने के लिए मत कहिए बल्कि 20 जुलाई को शांतिपूर्ण संसद मार्च में शामिल होकर हमारी आवाज़ बुलंद कीजिए।”

24 घंटे डॉक्टरों की निगरानी में वांगचुक

आंदोलन से जुड़े कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा जारी ताजा मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, वांगचुक की हालत काफी कमजोर है और उन्हें 24 घंटे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। पिछले 24 घंटों में उनका वजन 400 ग्राम घटकर 57.15 किलोग्राम रह गया है। भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से अब तक उनका कुल वजन करीब 8.9 किलोग्राम कम हो चुका है।

मेडिकल बुलेटिन के मुताबिक, उनका ब्लड प्रेशर 105/76 mmHg, ब्लड शुगर 80 mg/dL और ऑक्सीजन सैचुरेशन 97 प्रतिशत दर्ज किया गया। डॉक्टरों का कहना है कि वे पूरी तरह होश में हैं और मानसिक रूप से सतर्क हैं लेकिन उनकी सेहत पर लगातार नजर रखने की जरूरत है।

इस आंदोलन में सोनम वांगचुक अकेले नहीं हैं। जंतर-मंतर पर विभिन्न छात्र संगठनों के कई सदस्य भी भूख हड़ताल पर बैठे हैं। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के नेताओं नेहा, मनीष और आमीन भी लगातार उपवास पर हैं। संगठन के अनुसार, नेहा का वजन 5.85 किलोग्राम जबकि मनीष और आमीन का वजन क्रमशः 8.2 किलोग्राम और 8.3 किलोग्राम घट चुका है। तीनों का ब्लड शुगर स्तर भी सामान्य से कम बताया गया है।

AISA ने यह भी दावा किया है कि आंदोलन के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने पर जेएनयू छात्रसंघ के संयुक्त सचिव दानिश, जेएनयू बराक हॉस्टल के अध्यक्ष ऋषिकेश और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र नेता दीपक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका

वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि वांगचुक को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया जाए और जरूरत पड़ने पर फोर्स-फीडिंग (जबरन खाना खिलाने) सहित आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

सोमवार को 1800 से ज्यादा कलाकारों, शिक्षाविदों, लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी एक खुला पत्र जारी कर प्रदर्शनकारियों की मांगों का समर्थन किया। उन्होंने वांगचुक और अन्य प्रदर्शनकारियों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि आगे की लंबी लड़ाई के लिए उनका स्वस्थ रहना जरूरी है।

इस पत्र पर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, लेखिका अरुंधति रॉय, अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज, शिक्षाविद जयति घोष, निवेदिता मेनन और अनुराधा चेनॉय समेत कई प्रमुख हस्तियों ने हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि संघर्ष जारी रहना चाहिए लेकिन प्रदर्शनकारियों को अपनी सेहत का भी ध्यान रखना चाहिए।

सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील तेज

सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर राजनीतिक पार्टियों, कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की चिंता बढ़ गई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर समेत कई विपक्षी नेताओं ने वांगचुक से भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की है।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बुधवार को एक ओपन लेटर लिखकर कहा कि वांगचुक का उपवास देश की अंतरात्मा को झकझोरने में सफल रहा है। उन्होंने लिखा, ”सोनम वांगचुक जी, आपसे मेरी दिल से अपील है कि कृपया अपना अनशन समाप्त करें। आपने देश की अंतरात्मा को जगा दिया है। अब छात्रों के मुद्दों की लड़ाई संसद और लोकतांत्रिक संस्थाओं के भीतर भी लड़ी जानी चाहिए। भारत को आने वाले लंबे संघर्ष के लिए आपकी आवाज की जरूरत है।”

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का आज 19वां दिन है। (Photo Source: Express Photo by Tashi Tobgyal)

इससे पहले मंगलवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील कर चुके हैं। वहीं अभिनेत्री जीनत अमान ने केंद्र सरकार से प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत शुरू करने का आग्रह किया।

पूर्व गुजरात मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला और अभिनेत्री स्वरा भास्कर भी जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में शामिल हुए।

19 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन

यह आंदोलन 19 जून को जंतर-मंतर पर शुरू हुआ था। इसे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नाम के एक सोशल मीडिया अकाउंट ने शुरू किया है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक मामले की जिम्मेदारी तय करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

CJP ने 20 जुलाई को संसद तक मार्च और एक दिन के सामूहिक उपवास का भी आह्वान किया है। संगठन का कहना है कि जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते,तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसके साथ ही संगठन ने समर्थकों से सोशल मीडिया पर अपनी प्रोफाइल फोटो बदलकर एकजुटता दिखाने की अपील की है। CJP का दावा है कि संसद मार्च के समर्थन में अब तक 1.3 लाख से अधिक लोग मिस्ड कॉल अभियान के जरिए अपना समर्थन दर्ज करा चुके हैं।

बुधवार को CJP के संस्थापक अभिजीत डिपके ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती सेहत के बावजूद सरकार पूरी तरह चुप है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रदर्शनकारियों से संवाद क्यों नहीं कर रहे हैं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही अब तक क्यों तय नहीं की गई है।

‘दो दिन से ज्यादा जीवित रहना मुश्किल हो सकता है’

 सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक द्वारा की जा रही भूख हड़ताल को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इस मामले में अब दिल्ली हाई कोर्ट ने जनहित याचिका पर नोटिस जारी कर दिया है। अदालत ने कहा कि नोटिस दिल्ली सरकार (GNCTD) के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) और स्टैंडिंग काउंसिल (सिविल) के जरिए जारी किया जाएगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई बुधवार (16 जुलाई 2026) के लिए निर्धारित की है।