जंतर-मंतर पर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को 16 दिन पूरे हो चुके हैं। यह भूख हड़ताल कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन का हिस्सा है। सोनम वांगचुक और CJP के प्रदर्शनकारी NEET-UG के सवाल लीक होने के मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

इंडियन एक्सप्रेस हिंदी से बात करते हुए सोनम वांगचुक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लोगों की आवाज़ सुनने का आग्रह किया और सभी पार्टियों के नेताओं से विरोध में शामिल होने का आग्रह किया।

सवाल: आपका विरोध यह बताता है कि मूल मुद्दा परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार करना है। क्या एक व्यक्ति के इस्तीफे से यह हल हो जाएगा?

जवाब: बिल्कुल नहीं, लेकिन यह जवाबदेही का रास्ता बनाएगा। जब तक सरकार जवाबदेही स्थापित नहीं करती, तब तक इस तरह की समस्या से मुक्ति और मनमाने फैसले लेना जारी रहेगा। यह सिर्फ शिक्षा प्रणाली का नहीं, बल्कि पूरे भारतीय समाज का दोष है। अगर परीक्षा का पेपर लीक हो जाए तो आपको कैसा डॉक्टर मिलेगा? ऐसे डॉक्टर आपके बच्चों का इलाज कर रहे होंगे, नकल करके पास हुए इंजीनियर आपकी बिल्डिंग बनाएंगे, जो आखिर में गिर जाएंगी और जानें जाएंगी।

इससे भी जरूरी बात यह है कि आज देश में ईमानदारी की कोई कीमत नहीं है। सब कुछ बेईमानी से चलता है, सब कुछ बिकाऊ है एग्जाम पेपर से लेकर वोट तक- कोई देश ऐसे कैसे तरक्की कर सकता है? विकसित देश बनना तो दूर, हम इस ग्लोबल विलेज का सामना भी कैसे कर पाएंगे?

सवाल: आज आपकी भूख हड़ताल का 16वां दिन है। क्या नरेंद्र मोदी सरकार ने आपसे डायरेक्ट या इनडायरेक्टली कोई कॉन्टैक्ट किया है?

जवाब: नहीं। तो, अब हमारी कोशिश है कि हम अपनी आवाज और तेज करें ताकि उन तक पहुंच सके। अगर यह उन तक नहीं पहुंची है, तो यह सिर्फ़ सरकार की गलती नहीं है, यह इस देश के लोगों की भी गलती है जिन्होंने इसे इतना बड़ा मुद्दा बनाने में मदद नहीं की कि इसे एक जरूरी मुद्दा समझा जा सके। क्या आप तब तक अपनी आवाज उठाने का इंतज़ार करेंगे जब तक आप अकेले न हों और आपके साथ कोई न हो? अगर लोग बाहर आकर अपनी आवाज उठाएंगे, तो सरकार के पास इसे सुलझाने के लिए बातचीत करने के अलावा कोई चारा नहीं होगा। लेकिन हमें उम्मीद है कि सरकार इतनी असंवेदनशील नहीं है। शायद वे एक-दो दिन में इस मामले को सुलझाने की कोशिश करेंगे।

सवाल: क्या बातचीत के रास्ते खुले हैं? अगर आपको बातचीत के लिए बुलाया जाता है, तो क्या यह मुमकिन है कि आप लंबे समय के सुधारों के बड़े मुद्दे पर सहमत हो जाएं, बजाय इसके कि सिर्फ इस्तीफे पर जोर दें?

जवाब: इस्तीफे या जवाबदेही, सिर्फ़ शुरुआत है। फिर सही रास्ता तय करने के लिए दरवाजा खुलना चाहिए। इस मुद्दे पर संसद के मॉनसून सेशन में बहस होनी चाहिए। उन बड़े सुधारों को बनाने के लिए सरकार को इन युवाओं या मेरे जैसे शिक्षाविदों को शामिल करना चाहिए।

सवाल: क्या आपको इस बात से परेशानी है कि सोशल मीडिया पर दिख रहा समर्थन जमीन पर नहीं दिख रहा है? आपको एक दिन स्टेज से अपील करनी पड़ी थी, लोगों से हिम्मत दिखाने के लिए आपने कहा था।

जवाब: पूरे दिन में लगभग 5,000-7,000 लोग आते हैं। हो सकता है कि संख्या हमारी उम्मीदों से ज्यादा न रही हो, लेकिन वे इतनी कम भी नहीं हैं कि चिंता हो। लोगों को एकजुटता दिखाते हुए एक दिन का उपवास रखना चाहिए। उन्हें सरकार को हालात की गंभीरता बताने के लिए कुछ दर्द खुद उठाना होगा।

सवाल: लोगों ने कहा है कि अगर मकसद यही है, तो आप स्टेज पर क्यों हैं जबकि लेफ्ट से जुड़े छात्र ज़मीन पर प्रोटेस्ट कर रहे हैं? साथ ही AISF, SFI और AISA जैसे लेफ्ट छात्र संगठनों का यहां जमावड़ा ज्यादा है, इसलिए कुछ लोग दूरी बनाए हुए हैं।

जवाब: हमने BJP को भी आमंत्रण दिया है। मैं निजी तौर पर सभी से स्टेज पर मेरे साथ आने की रिक्वेस्ट करता हूं, लेकिन मुझे बताया गया कि बहुत ज्यादा लोगों की वजह से यह मुमकिन नहीं होगा। मैं ये लॉजिस्टिकल फैसले आयोजक पर छोड़ता हूं।

सवाल: क्या आयोजक, राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन में शामिल होने की उम्मीद कर रहे हैं?

जवाब: मुझे पूरी उम्मीद है कि सभी राजनीतिक पार्टियों के नेता आएंगे। अगर वे नहीं आते हैं, तो यह सिर्फ़ उनकी छोटी सोच को दिखाएगा, और जनता आखिरकार उन्हें रिजेक्ट कर देगी। इस प्लेटफॉर्म का कोई पॉलिटिकल रंग नहीं है।

सवाल: क्या CJP से जुड़ने से पहले आपको कोई डर था?

जवाब: मैंने उनके बारे में रिसर्च की और उनसे बात की। मुझे नहीं लगता कि वे यह सब अपने फायदे के लिए कर रहे हैं। भविष्य की बात करें तो अगर कोई चाहे तो राजनीति दल में आने के लिए आज़ाद है।

सवाल: पीएम मोदी के लिए आपका क्या मैसेज होगा?

जवाब: लोगों की आवाज़ सुनना सरकार के लंबे समय के फायदे में है। उन्हें संवेदनशील होना चाहिए, सख्ती नहीं। लोकतंत्र हमदर्दी और दया से चलती है, सख्ती से नहीं। मैं उनसे पर्सनली कभी नहीं मिला।

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