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नहीं रहे सोमनाथ चटर्जी: पार्टी से बगावत कर किया था मनमोहन सरकार का समर्थन, सरकारी पैसे से ‘चाय-पानी’ पर लगाई थी रोक

Somnath Chatterjee Death News: पेशे से वकील सोमनाथ चटर्जी ने 1968 में राजनीति शुरू की थी। मात्र 3 साल बाद ही 1971 में वे लोकसभा के सदस्य बन गये। इस दौरान वे निर्दलीय जीते थे, हालांकि उन्हें सीपीएम का समर्थन प्राप्त था। भारत के संसदीय इतिहास में उन्हें 10 बार सांसद बनने का गौरव हासिल है।

पूर्व लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी (फाइल फोटो)

देश में लेफ्ट राजनीति के स्तंभ पुरुषों में शुमार रहे सोमनाथ चटर्जी का निधन हो गया है। आज (13 अगस्त, सोमवार) सुबह कोलकाता के एक अस्पताल में उन्होंने 89 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। सोमनाथ चटर्जी ने अपनी जिंदगी में लंबी सियासी पारी खेली। वे 2004 से 2009 के बीच लोकसभा के स्पीकर रहे। पेशे से वकील सोमनाथ चटर्जी ने 1968 में राजनीति शुरू की थी। मात्र 3 साल बाद ही 1971 में वे लोकसभा के सदस्य बन गये। इस दौरान वे निर्दलीय जीते थे, हालांकि उन्हें सीपीएम का समर्थन प्राप्त था। भारत के संसदीय इतिहास में उन्हें 10 बार सांसद बनने का गौरव हासिल है।

1971 से शुरू हुई उनकी संसदीय पारी 2009 तक चली। इसमें से 1984 अपवाद है जब उन्हें पश्चिम बंगाल की वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 1996 में उन्हें उत्कृष्ट सांसद का अवॉर्ड दिया गया था। 2004 लोकसभा चुनाव के बाद सोमनाथ चटर्जी को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया था। बाद में उन्हें 14वीं लोकसभा का स्पीकर चुना गया। बतौर स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ने सरकारी पैसे से सांसदों के चाय पानी पर रोक लगा दी थी। सोमनाथ चटर्जी ने ही दबाव डाला था कि अगर कोई सांसद विदेशी दौरे पर जाता है और उसके साथ उसके परिवार वाले जाते हैं तो परिवार वालों का खर्चा सांसद को ही वहन करना होगा।

2008 में डॉ मनमोहन सिंह की अगुवाई में जब भारत सरकार ने अमेरिका से परमाणु समझौता किया तो ये वक्त सोमनाथ चटर्जी के जीवन में सियासी उथल-पुथल का था। माकपा इस समझौते का जी-जान से विरोध कर रही थी। सीपीआई(एम) ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया। माकपा ने सोमनाथ चटर्जी को स्पीकर पद से इस्तीफा देना को कहा। लेकिन सोमनाथ चटर्जी अपनी राजनीतिक समझ पर डटे रहे, उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया। 2008 में जब मनमोहन सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया उस वक्त भी सोमनाथ चटर्जी ने मनमोहन सरकार के खिलाफ वोट नहीं दिया था, क्योंकि ऐसा कहना तत्कालीन विपक्ष बीजेपी की नीतियों के अनुसार वोट करना माना जाता। सोमनाथ चटर्जी को सीपीआई(एम) से बाहर कर दिया गया। इस घटनाक्रम पर सोमनाथ चटर्जी ने कहा था कि पार्टी से उनका निष्कासन उनकी जिंदगी के सबसे दुखद दिनों में से एक था। सोमनाथ चटर्जी ने साल 2009 में सक्रिय राजनीति को अलविदा कह दिया था। इसके बाद वो कोलकाता में रहते थे।

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