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जब इंदिरा ने रुकवा दिया था सोमनाथ चटर्जी का पासपोर्ट, वाजपेयी ने मंत्री बनते ही घर भिजवाया

Somnath Chatterjee Death News: चटर्जी की हालत रविवार को दिल का दौरा पड़ने के बाद गंभीर थी। उन्हें किडनी संबंधी बीमारी भी थी और सात अगस्त को क्लीनिक में उन्हें गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था।

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और 10 बार सांसद रहे सोमनाथ चटर्जी।(फाइल फोटो)

Somnath Chatterjee Death News: पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी का सोमवार (13 अगस्त, 2018) को एक निजी अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। चटर्जी (89) लंबे समय से बीमार चल रहे थे। नर्सिग होम के सूत्रों ने यह जानकारी दी है। बेलेव्यू क्लीनिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रदीप टंडन ने बताया कि उनका निधन सुबह 8.15 बजे हुआ। चटर्जी की हालत रविवार को दिल का दौरा पड़ने के बाद गंभीर थी। उन्हें किडनी संबंधी बीमारी भी थी और सात अगस्त को क्लीनिक में उन्हें गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था। बता दें कि साल 2010 में रिलीज हुई उनकी किताब ‘Keeping The Faith: Memoirs Of A Parliamentarian’ खासी चर्चा में रही थी। चटर्जी सीपीआई (एम) लीडर थे मगर उनके पिता निर्मल चंद्र चटर्जी हिंदू महासभा के नेता थे। साल 1940 में वह महासभा के टिकट पर कलकत्ता के बालीगंज से पार्षद भी चुने गए। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ने खुद इस बात का जिक्र अपनी किताब में किया है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए आपातकाल का भी जिक्र विस्तार से किया है। इसमें उन्होंने लिखा है कि वो कैसे इमरजेंसी के दम घुटने वाले वातारण में वहां से दूर जाना चाहते थे। हालांकि उन्होंने पासपोर्ट की वैधता समाप्त होने पर पासपोर्ट ऑफिस में नवीकरण के लिए आवेदन किया तो पासपोर्ट लौटाया ही नहीं गया।

चटर्जी ने अपनी किताब में आगे लिखा है, ‘मैंने सिद्धार्थ शंकर रॉय (1971 से 1977 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री) से मदद की गुहार लगाई। जिन्होंने जाहिर तौर ओम मेहता (मिनिस्टर ऑफ स्टेट) और इंदिरा गांधी के एक करीबी सहयोगी से बात की। एक बार सेंट्रल हॉल में मेहता मुझसे मिले और कहा कि इस मुद्दे पर मैं उनपर दबाव ना डालूं, क्योंकि मैडम (इंदिरा गांधी) काफी सख्त थीं। इसलिए आपालकाल के पूरे दौर में मेरा पासपोर्ट वापस नहीं दिया गया। बाद में जनता पार्टी की सरकार में अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री बने। तब मैंने उन्हें पासपोर्ट से जुड़ी अपनी परेशानी सेअवगत कराया और तुरंत मामले में कार्रवाई करने को कहा।’

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष अपनी किताब में आगे लिखते हैं, ‘मेरा पासपोर्ट उसी शाम को मिल गया। विदेश मंत्रालय के किसी अधिकारी के द्वारा पासपोर्ट मेरे आवास पर भेजा गया। पासपोर्ट नवीकृत था। तब मुझे महसूस हुआ कि मैंने अपनी आजादी दोबारा पा ली है। बाद में मैंने वायपेयी को उनके फैसले और एक्शन को लिए शुक्रिया कहा।’

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