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नेहरू को इतिहास से मिटाने का प्रयास कर रहे हैं लोग: राहुल गांधी

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू और उनके विचारों की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए मंगलवार को उन लोगों की आलोचना की जो नेहरू को इतिहास से कथित तौर पर मिटाने का प्रयास कर रहे हैं। देश के पहले प्रधानमंत्री की 125वीं जयंती पर कांग्रेस की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ने इस […]

Author Published on: November 19, 2014 9:06 AM

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू और उनके विचारों की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए मंगलवार को उन लोगों की आलोचना की जो नेहरू को इतिहास से कथित तौर पर मिटाने का प्रयास कर रहे हैं। देश के पहले प्रधानमंत्री की 125वीं जयंती पर कांग्रेस की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ने इस बात की पुष्टि की कि नेहरू समर्थित लोकतंत्र, समावेश और सशक्तीकरण स्थायी तौर पर प्रासंगिक हैं। सम्मेलन में नेहरू की विरासत और उनके विश्व दर्शन की खास तौर से चर्चा की गई।

राहुल गांधी ने कहा कि नेहरू के विचार और उनकी राजनीति आज भी प्रासंगिक हैं, हालांकि ऐसे लोग हैं जो उन्हें मिटाना चाहते हैं, उन्हें और उनकी विरासत को देश से खत्म कर देना चाहते हैं जिसे उन्होंने इतने प्रेम से संजोया था और बनाने में मदद की थी।
कांग्रेस नेता ने कहा कि नेहरू का भारत का विचार, एक ऐसे देश का है, जहां एक अरब लोग अपनी नियति चुनते हैं और सद्भाव के साथ मिल जुल कर रहते हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है, जहां लोकतांत्रिक सिद्धांत गहराई तक पोषित हैं, जिसे नेहरू ने विकसित किया और संरक्षित किया। उन्होंने नेहरू के भारत को, एक ऐसे भारत को बचाने की अपील की जो धर्मनिरपेक्ष और सहिष्णु है।

इस मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नेहरू को करुणा और मजबूत प्रतिबद्धता के महान नेता के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि समावेशी लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और सभी लोगों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के प्रति उनकी आस्था अटूट थी।

इस दो दिवसीय सम्मेलन के अपने समापन भाषण में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि अब जबकि नेहरूवादी अवधारणाएं चुनौतियों के दायरे में हैं, हमें न सिर्फ उसका पालन करना है जो नेहरू ने निर्मित किया, बल्कि लोकतंत्र, समावेश और धर्मनिरपेक्षता को मजबूत बनाने के लिए भी संघर्ष करना है। उन्होंने कहा कि नेहरू के विचार साझे हित की बात है जो सभी वर्गों से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि घोषणा-पत्र इन विचारों को पोषित करने की सामूहिक वचनबद्धता की पुष्टि करता है।

घाना के पूर्व राष्ट्रपति जान कूफूअर ने घोषणापत्र पढ़ा। इसमें कहा गया है कि ‘नेहरू के विश्व के विचार और उनकी विरासत पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले हम 20 देशों, 29 राजनीतिक दलों और संगठनों के प्रतिनिधि विश्व को उन प्रवृत्तियों के प्रति आगाह करते हैं, जो विघटनकारी हैं या जो समाज में टकराव पैदा करते हैं। घोषणापत्र में कहा गया है कि मानव जाति के प्रतिनिधि के रूप में हम नेहरू के दृष्टिकोण पर चलने, उनकी भावनाओं को आत्मसात करने और उनकी विरासत को पूरी दुनिया में आगे ले जाने के लिए उनकी ओर से समर्थित मूल्यों को विकसित करने की उम्मीद करते हैं ताकि हमारे सभी क्रियाकलापों में शांति का प्रभाव हो और हिंसा को नकारा जाए।

सम्मेलन में अनेक अंतरराष्ट्रीय नेताओं और भारत एवं विदेश के कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई, घाना के पूर्व राष्ट्रपति जॉन कूफुअर, नाइजीरिया के जनरल ओबासांजो, नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री माधव के नेपाल और भूटान से दोरजी वांगमो वांगचुक के साथ पाकिस्तान की आसमां जहांगीर, दक्षिण अफ्रीका के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी अहमद कथराडा और दुनिया भर से 11 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल थे।

सम्मेलन में दो विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। ये विषय थे-‘समावेशी लोकतंत्र और जन सशक्तिकरण’ व ‘नेहरू का विश्व दर्शन और 21वीं सदी के लिए एक लोकतांत्रिक वैश्विक व्यवस्था’ रहे।

मंगलवार के कार्यक्रम में सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने भी भाग लिया। सोमवार को तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और उनके धुर विरोधी वामपंथी दलों से माकपा नेता प्रकाश करात, सीताराम येचुरी और भाकपा नेता डी राजा, जद (एकी) अध्यक्ष शरद यादव, जेडीएस के अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और राकांपा महासचिव डीपी त्रिपाठी ने शिरकत की थी।

 

 

 

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