तो क्या आधार से जुड़ेंगे Facebook, Whatsapp और twitter!

सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया के खातों को आधार के साथ जोड़ने को लेकर विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित याचिकायें मंगलवार को अपने यहां स्थानांतरित कर लीं। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस की पीठ ने फेसबुक की स्थानांतरण याचिका पर यह आदेश दिया।

Facebook, Facebook Aadhaar linking, Whastapp, Social media link with aadhar, Supreme Court Aadhaar linking, Supreme Court Aadhaar social media case, Social media rules, new social media rulesआने वाले समय में आधार से लिंक हो सकते हैं सोशल अकाउंट!

पासपोर्ट, आईटी रिटर्न, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, पैन कार्ड, मोबाइल नंबर, बैंक अकाउंट के बाद अब सोशल मीडिया अकाउंट भी आधार से लिंक हो सकते हैं। इसमें आपके फेसबुक, वाट्सअप, ट्विटर, इंस्टाग्राम जैसे सोशल अकाउंट को भी आधार से जोड़ा जा सकता है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर अपना जो निर्णय सुनाया है उससे यही जाहिर होता है कि आने वाले समय में सोशल अकाउंट भी आधार से जोड़े जा सकते हैं। दरअसल, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग हाईकोर्ट में चल रहे है सोशल मीडिया लिंक वाले मामलों को अपेक्स कोर्ट के पास भेजा है। अब सभी मामलों की एक जगह सुनवाई होगी। बताया जा रहा है कि सरकारभी आधार को सोशल मीडिया अकाउंट से लिंक कराने के मामले में जनवरी 2020 तक गाइडलाइन तैयार करेगी। सरकार को इस पर योजना तैयार करने के लिए कोर्ट मे तीन माह दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया के खातों को आधार के साथ जोड़ने को लेकर विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित याचिकायें मंगलवार को अपने यहां स्थानांतरित कर लीं। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस की पीठ ने फेसबुक की स्थानांतरण याचिका पर यह आदेश दिया। पीठ ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इससे संबंधित सारे मामले प्रधान न्यायाधीश के समक्ष पेश करे ताकि इन्हें जनवरी, 2020 के अंतिम सप्ताह में सुनवाई के लिये उचित पीठ को सौंपा जा सके।

शीर्ष अदालत ने केन्द्र को नियमों की अधिसूचना, जिसके तहत सोशल मीडिया का दुरूपयोग रोका जा सके और जनवरी के पहले सप्ताह में पेश करने का निर्देश से कहा कि सोशल मीडिया का दुरूपयोग रोका जा सके और कूट संदेशों के लिये मध्यस्थों की जिम्मेदारी निर्धारित की जा सके। पीठ ने यह आदेश उस वक्त दिया जब तमिलनाडु की ओर से अटार्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने विभिन्न उच्च न्यायालयों में इस विषय पर लंबित सारे मामले शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने की फेसबुक का विरोध छोड़ दिया।

केन्द्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि यह व्यक्तिगत निजता में दखल देने का बहाना नहीं है बल्कि यह राष्ट्र की सुरक्षा और सार्वभौमिकता का संरक्षण करने का प्रयास है। मेहता ने कुछ याचिकाकर्ताओं के इन आरोपों का खंडन किया है कि सरकार के विचाराधीन नियमों का मसौदा व्यक्तियों की निजता को कुचलने का सरकार का प्रयास है। उनका कहना है ये नियम प्राधिकारियों को किसी विशेष संदेश या विवरण के मूल स्रोत का पता लगाने के लिये मध्यस्थों की जिम्मेदारी निर्धारित करने में मददगार होंगे।

(भाषा इनपुट)

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