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मोदी के मंत्री बोले- आरक्षण के कारण दलितों पर होता है अत्याचार, मंत्रिमंडल में भी मिले रिजर्वेशन

अठावले ने राज्यसभा और केंद्रीय मंत्रिमंडल में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए भी आरक्षण की पैरवी की है। महाराष्ट्र से आने वाले दलित नेता ने सशस्त्र बलों में भी उनके लिए आरक्षण की मांग की है।

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले। (पीटीआई फाइल फोटो)

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने कहा है कि आरक्षण की वजह से ही दलितों पर अत्याचार होता है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को आरक्षण नहीं मिलता है वे लोग दलितों पर क्रोधवश अत्याचार करते हैं। इसके साथ ही अठावले ने केंद्र सरकार से आरक्षण की सीमा बढ़ाने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि बिना एससी, एसटी और ओबीसी को मिल रहे आरक्षण की सीमा को छेड़ते हुए शेष बचे 50 फीसदी में से 25 फीसदी आरक्षण आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को दिया जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यद्यपि वो केंद्र सरकार में हैं, बावजूद इसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हैं कि इस मुद्दे को संसद में सुलझाकर विवाद खत्म करें।

अठावले ने राज्यसभा और केंद्रीय मंत्रिमंडल में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए भी आरक्षण की पैरवी की है। महाराष्ट्र से आने वाले दलित नेता ने सशस्त्र बलों में भी उनके लिए आरक्षण की मांग की है। उन्होंने हैदराबाद में संवाददाताओं से कहा, ‘‘जब मैं लोकसभा में था, मैंने मांग की थी कि जिस तह कुछ निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जातिजा के लिए आरक्षित है उसी तरह राज्यसभा और केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी होना चाहिए ।’’

आरपीआई नेता और केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता राज्य मंत्री से केंद्रीय मंत्रिमंडल में आरक्षण को लेकर उनका दृष्टिकोण पूछा गया था। संविधान संशोधन के बाद केंद्र और राज्यों में मंत्रिपरिषद की क्षमता विधानमंडल के निचले सदन की क्षमता के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती । उन्होंने कहा, ‘‘पहले प्रधानमंत्री अपनी इच्छा के मुताबिक कितने भी मंत्री शामिल कर सकते थे…बाद में कानून (संविधान संशोधन) बना (इसे सीमित किया गया )। यह हमारी मांग है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी आरक्षण होना चाहिए…देखते हैं भविष्य में क्या होता है ।’’

रामदास अठावले ने महाराष्ट्र से काटकर विदर्भ राज्य बनाने की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि यह सबसे सही समय है, जब केंद्रे और राज्य दोनों में भाजपा की सरकार है। उन्होंने कहा कि भाजपा शुरू से ही विदर्भ राज्य के गठन के पक्ष में रही है। इसलिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

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