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केंद्रीय मंत्री बोले- तथाकथित बुद्धिजीवी अंतरात्‍मा को नहीं समझते, जिंदा-मुर्दा में फर्क नहीं करते

अक्सर अपने बयानों से सुर्खियों में रहने वाले केंद्रीय मंत्री और कर्नाटक के उत्तरा कन्नड़ से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद अनंत कुमार हेगड़े ने एक बार फिर विरोधियों पर यह कहते हुए निशाना साधा है कि वे लोग जिंदा और मुर्दा में फर्क नहीं करते हैं।

केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री अनंत कुमार हेगड़े। (फोटो सोर्स- एएनआई)

अक्सर अपने बयानों से सुर्खियों में रहने वाले केंद्रीय मंत्री और कर्नाटक के उत्तरा कन्नड़ से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद अनंत कुमार हेगड़े ने एक बार फिर विरोधियों पर यह कहते हुए निशाना साधा है कि वे लोग जिंदा और मुर्दा में फर्क नहीं करते हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक अनंत कुमार हेगड़े ने कहा, ”तथाकथित बुद्धिजीवि ‘अंतरात्मा’ को नहीं समझते हैं, उनके लिए जिंदा और मुर्दा में कोई फर्क नहीं है क्योंकि दोनों के शरीरों के अंग एक जैसे दिखते हैं। इन लोगों को लगता है कि केवल मानव शरीर की जरूरतों को पूरा करना ही जीवन है।” पहले भी एक बार केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री हेगड़े ने बुद्धिजीवि वर्ग यह कहते हुए करारा प्रहार किया कि ”अपने कुल के बारे में जाने बिना जो लोग अपने आप को धर्मनिरपेक्ष कहते हैं, उनकी खुद की पहचान नहीं होती है। वे अपने खानदान के बारे में न जानने वाले बुद्धिजीवि हैं।”

बता दें कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना बाघ से और विपक्ष की तुलना कौवों, बंदर और लोमड़ियों से करके समूचे विपक्ष पारा चढ़ा दिया था। 2019 के लोकसभा चुनाव की पृष्ठभूमि तैयार करते हुए उन्होंने कांग्रेस और जेडीएस समेत उन सभी विपक्षी पार्टियों के नेताओं की तुलना आपत्तिजनक तरीके से की थी जिन्होंने कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में मंच साझा कर केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ एकजुटता का संदेश दिया था। कर्नाटक के करवार में हेगड़े ने एक जनसभा में कहा था, ”एक तरफ कौवे, बंदर, लोमड़ियां एक साथ हो गए हैं, दूसरी तरफ एक बाघ है। 2019 में बाघ को चुनें।” हेगड़े के बयान पर कांग्रेस की तरफ से पलटवार किया गया था। कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली ने हेगड़े की तरह वैसी ही भाषा का इस्तेमाल करते एएनआई से कहा था, ”बाघ जंगली हो गया है और उसे जंगल में भेज देना चाहिए।”

हेगड़े के इस विवादित बयान को पिछले दिनों बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के द्वारा दिए विवादित बयान से प्रेरित था, जिसमें शाह ने विपक्ष की तुलना में, सांपों, कुत्तों और बिल्लियों जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। हेगड़े ने एक और दिलचस्प बयान यह दिया था कि कांग्रेस के 70 वर्षों के शासन का नतीजा है कि लोग सोने और चांदी की कुर्सियों पर बैठने की बजाय प्लास्टिक की कुर्सियों पर बैठने को मजबूर हुए हैं।

दिसंबर में हेगड़े ने यह कहकर सियासी पारा चढ़ा दिया था कि वह संविधान का सम्मान करते हैं लेकिन आने वाले दिनों में उसे बदल दिया जाएगा। हेगड़े के इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने उन्हें मंत्री पद से हटाने की मांग की थी। कांग्रेस पार्टी की तरफ से कहा गया था, ”विपक्षी दलों की राय है कि जो मंत्री संविधान में विश्वास नहीं रखता है उसका मंत्रियों की परिषद में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री को इस बारे में कार्रवाई करनी चाहिए।”

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