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दिल्ली का पारा लुढ़क कर 7.5 डिग्री पर, नवंबर में दिसंबर जैसी सर्दी

पहाड़ों में हुई बर्फबारी व चल रही उत्तर पूर्वी हवाओं से दिल्ली में शीतलहर की सी हालत हो गई है। कमोबेश यही हाल एनसीआर के दूसरे शहरों का भी है।

Cold in delhiदिल्ली में तापमान में आई गिरावट, ठंड बढ़ने से निकल आए स्वेटर।

नवंबर में दिसंबर जैसी सर्दी पड़ने से दिल्ली का पारा लुढ़क कर 7.5 डिग्री पर पहुंच गया है। शुक्रवार का दिन 14 सालों का सबसे ठंडा दिन रहा। वहीं, 82 सालों में नवंबर का सबसे कम तापमान भी है। इससे पहले सबसे कम (3.9 डिग्री) तापमान 28 नवंबर 1938 को दर्ज हुआ था। पश्चिमी विक्षोभ से पहाड़ों में फिर बारिश के साथ बर्फबारी होगी। वहीं, दक्षिण भारत में भी बारिश का दौर जारी है।

पहाड़ों में हुई बर्फबारी व चल रही उत्तर पूर्वी हवाओं से दिल्ली में शीतलहर की सी हालत हो गई है। कमोबेश यही हाल एनसीआर के दूसरे शहरों का भी है। दिल्ली में शुक्रवार को सुबह 7.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ, जो बीते 14 साल में नवंबर का सबसे कम तापमान है। इससे पहले 2019 में 20 नवंबर को 11.4, 2018 में 10.5, 2017 में 7.6, 2016 में 9.7, 2015 में 11, 2014 में 8, 2013 में 9.1, 2012 8.5, 2011 में 11.5, 2010 में 9.9, 2009 में 7.9, 2008 में 9 व 2007 में 9.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। नवंबर का अब तक का सबसे कम तापमान -3.9 डिग्री सेल्सियस, 28 नवंबर, 1938 को दर्ज किया गया था।

देश के कुछ हिस्सों में ओले गिरने की वजह से अगले चार से पांच दिनों के बीच उत्तर-पश्चिमी भारत में तापमान दो से चार डिग्री सेल्सियस के बीच गिरने की संभावना है। वहीं, मध्य भारत में भी कहीं-कहीं तापमान में इसी तरह की गिरावट देखने को मिलेगी। पिछले 24 घंटों के दौरान मैदानी इलाकों में राजस्थान के चुरू में सबसे कम तापमान रहा। यहां न्यूनतम तापमान 6.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग की भविष्यवाणी 24-25 को बारिश के आसार हैं।

जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव देखने को मिलेगा। मौसम विभाग ने 24 और 25 नवंबर को जम्मू-कश्मीर में बारिश की संभावना जताई है। हालांकि विभाग ने यह भी बताया है कि इन दो दिनों के दौरान होने वाली बारिश पिछले दिनों के मुकाबले कम होगी।

केरल और लक्षद्वीप में कुछ स्थानों पर वर्षा संभव है। जबकि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 21 नवंबर को भारी बरसात का अनुमान है। दक्षिण अरब सागर में बने कम दबाव के क्षेत्र की वजह से दक्षिणी-पश्चिमी और दक्षिणी-पूर्वी अरब सागर में चक्रवाती हवाएं चलने की संभावना है। इनकी गति 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, इसलिए इन इलाकों में मछुआरों को सलाह है कि वो समुद्र में न जाएं।

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