भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने झारखंड में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ‘सलेक्टिव पॉलिटिक्स’ करते हैं। भाजपा नेता ने सवाल किया कि कांग्रेस नेता ने दूसरे राज्यों में इसी तरह की मांगों का समर्थन क्यों नहीं किया।
झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के अभ्यर्थियों के आंदोलन का जिक्र करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि झारखंड में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन के बावजूद राहुल गांधी राज्य सरकार के साथ अपना गठबंधन जारी रखे हुए हैं। उन्होंने इसे राहुल गांधी की ‘सलेक्टिव पॉलिटिक्स’ बताया।
भाजपा महासचिव ने पूछा- पंजाब-केरल में कभी इस्तीफा क्यों नहीं मांगा
शुक्रवार को समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में स्मृति ईरानी ने कहा, “क्या राहुल गांधी ने झारखंड सरकार से अपना समर्थन वापस लिया? नहीं। तो क्या यह राहुल गांधी की सलेक्टिव पॉलिटिक्स है? क्या उन्होंने पंजाब या केरल में कभी इसी तरह इस्तीफे की मांग उठाई?”
स्मृति ईरानी ने अमेठी लोकसभा क्षेत्र में मौजूदा विकास कार्यों की तुलना राहुल गांधी के सांसद रहने के दौरान की स्थिति से भी की। उन्होंने भाजपा सरकार के कार्यकाल में शिक्षा के क्षेत्र में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा, “नीति की बात छोड़िए। जब राहुल गांधी अमेठी के सांसद थे, तब स्कूलों में बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ते थे। मोदी-योगी सरकार ने स्कूलों में टेबल और कुर्सियां उपलब्ध कराने का काम किया।”
भाजपा नेता ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की पेशकश का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब गृह मंत्री ने सार्वजनिक रूप से चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही, तब कांग्रेस नेता राहुल गांधी आगे नहीं आए। स्मृति ईरानी ने सवाल किया, “तो भागा कौन?”
झारखंड में प्रदर्शन के दौरान रांची के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) केवी रमन ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन की ओर से तय किए गए रास्ते का कथित तौर पर उल्लंघन किया, जिसके बाद पुलिस को हल्के बल का इस्तेमाल करना पड़ा।
शुक्रवार को हुआ यह प्रदर्शन जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म फोरम के आह्वान पर आयोजित किया गया था। फोरम ने झारखंड हाई कोर्ट के फैसले के विरोध में राज्य के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री के पुतले जलाने के लिए छात्रों से अपील की थी।
बोलीं: जंतर-मंतर पर विपक्ष बंटा हुआ दिखाई दिया
स्मृति ईरानी ने जंतर-मंतर पर हुए विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि पंजाब, केरल या झारखंड जैसे विपक्षी दलों की सरकार वाले राज्यों में प्रदर्शनकारियों ने इसी तरह इस्तीफे की मांग क्यों नहीं की। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर विपक्ष बंटा हुआ दिखाई दिया।
ईरानी ने दावा किया कि राहुल गांधी ने जंतर-मंतर के प्रदर्शन से जानबूझकर दूरी बनाई, क्योंकि वहां आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया मौजूद थे। उन्होंने कहा कि अगर वहां सिर्फ छात्र जुटे होते तो राहुल गांधी निश्चित रूप से प्रदर्शन में शामिल होते।
उन्होंने कहा, “राहुल गांधी आम आदमी पार्टी से बचना चाहते थे, इसलिए वह वहां नहीं गए। इसका मतलब है कि राहुल गांधी खुद स्वीकार करते हैं कि जंतर-मंतर पर एक राजनीतिक व्यवस्था के प्रतिनिधि मौजूद थे।”
सीजेपी के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद समाप्त हुआ। संसद में विपक्षी दलों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई “पुलिस कार्रवाई” को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बयान देने की मांग की।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हालिया सीजेपी नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती और प्रदर्शनकारियों की ओर से हुई हिंसा के आरोपों की तथ्य-जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी गठित की। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी करेंगे।
समिति में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश शालिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व डीजीपी एलआर बिश्नोई शामिल हैं।
