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स्मृति ईरानी फर्जी डिग्री मामले में नया मोड़, अब हाई कोर्ट ने मंगाए सभी रिकॉर्ड

खान का आरोप है कि स्मृति ने अलग-अलग जगह अपने शैक्षणिक ब्यौरे अलग-अलग दिए।

केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी (फोटो सोर्स पीटीआई)

केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी की फर्जी डिग्री का विवाद उनका पीछा नहीं छोड़ रहा है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज मामले पर सभी रिकॉर्ड मांगे हैं। निचली अदालत ने पिछली साल इस केस को खारिज कर दिया था। इसे अहमद खान नाम के शख्स दायर कराया था। कार्ट ने यह कहते हुए इसे खारिज कर दिया था कि ऐसा करके मंत्री को बेवजह परेशान किया जा रहा है। खान ने निचली अदालत के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। स्मृति ईरानी पर ये आरोप लगाकर कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई गई थी कि अपने अब तक के तीन चुनावी हलफनामों में उन्होंने अपनी शिक्षा को लेकर अलग-अलग जानकारियां दी हैं। उनके खिलाफ यह शिकायत कोर्ट में फ्रीलांसर राइटर अहमद खान ने दायर की थी।

खान का आरोप है कि स्मृति ने अलग-अलग जगह अपने शैक्षणिक ब्यौरे अलग-अलग दिए। पिछले दो चुनाव में चुनाव आयोग को दिए गए शिक्षा को लेकर दिए हलफनामे आपस में मेल नहीं खा रहे हैं। इनमें से एक शपथ पत्र में स्मृति ने खुद को बीकॉम बताया है तो दूसरे में बीए बताया है। इस केस के वकील ने बताया कि स्मृति या किसी और के खिलाफ समन जारी करने से पहले दिल्ली उच्च न्यायालय इस केस की पूरी जांच करेगा। कोर्ट ने कहा था कि पहली बात तो यह है कि असली दस्तावेज खो गए हैं और उपलब्ध दस्तावेज मंत्री को समन भेजने के लिए काफी नहीं हैं। कोर्ट ने इसमें शिकायतकर्ता की मंशा पर सवाल उठाए थे।

कोर्ट ने कहा कि इस मामले की शिकायत करने में 11 साल लग गए यानी जाहिर है कि मंत्री को परेशान करने की मंशा से शिकायत की गई। चुनाव आयोग और दिल्ली यूनिवर्सिटी दोनों ही कह रहे हैं कि हम स्मृति ईरानी के एजुकेशन सर्टिफिकेट्स को खोज नहीं पा रहे हैं। खान ने कहा कि साल 2004 में ईरानी ने बताया था कि उन्होंने 1996 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए की है। वहीं चुनाव के बाद उन्होंने बताया कि उनकी क्वालिफिकेशन दिल्ली यूनिवर्सिटी से बी कॉम पार्ट वन (पत्राचार पाठ्यक्रम) है।  उन्होंने आरोप लगाया है कि मंत्री ने जानबूझकर गलत विवरण प्रस्तुत किए, जिसका कानून के मुताबिक दंड मिलना चाहिए।

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