Neerja Bhanot Bravery: बुधवार को फ्लाईदुबई के विमान में एक भारतीय को-पायलट स्मित मच्छार ने प्लेन हाईजैक करने की कोशिश करने वाले पायलट के इरादों को नाकाम कर दिया। उन्होंने घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोला और यात्रियों और क्रू मेंबर्स की मदद से उस आरोपी पर काबू पाया। भारतीय पायलट की इस बहादुरी के चलते सैकड़ों लोगों की जान बचा ली। इसको लेकर उनकी दुनियाभर में तारीफ की जा रही है।

भारतीय विमानन इतिहास के पन्नों को जब भी पलटा जाता है, तो कुछ नाम ऐसे सामने आते हैं, जो समय की धूल से परे जाकर हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं। ऐसा ही एक नाम नीरजा भनोट का है, जिनकी बहादुरी और जांबाजी के किस्से आज भी हर भारतीय के दिल में गर्व की भावना जगा देते हैं, लेकिन नीरजा भनोट ने कैसे बहादुरी दिखाई थी, तो चलिए आपको वो भी बताते हैं।

AIR INDIA की थी उड़ान

यह घटना 5 सितंबर 1986 की है, जब मुंबई से न्यूयॉर्क जाने वाली पैन एशियन एयरलाइंस की फ्लाइट 73 कराची के रास्ते अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही थी। इस विमान में चालक दल के सदस्यों समेत कुल 379 लोग सवार थे, जिनमें कई देशों के यात्री शामिल थे।

जैसे ही विमान ने पाकिस्तान के कराची एयरपोर्ट पर हाल्ट के लिए लैंडिंग की, वैसे ही हथियारों से लैस चार फिदायीन आतंकवादी सुरक्षा चक्र को चकमा देकर विमान के भीतर घुस आए। इन आतंकवादियों का मुख्य उद्देश्य विमान को हाईजैक करना और एक बड़े खूनी षड्यंत्र को अंजाम देना था।

फ्लाइट पर्सेर की भूमिका में अटूट साहस और सतर्कता

इस भयावह और अप्रत्याशित संकट के समय विमान में सीनियर फ्लाइट पर्सेर के रूप में तैनात मात्र 23 साल की नीरजा भनोट ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया। जैसे ही आतंकवादियों ने कॉकपिट पर कब्जा करने की कोशिश की और फ्लाइट क्रू को बंधक बनाने की फिराक में थे, नीरजा ने पलक झपकते ही बेहद चतुराई से कॉकपिट क्रू को इसकी गुप्त सूचना दे दी।

उनकी इस त्वरित और सटीक चेतावनी के कारण पायलट, को-पायलट और फ्लाइट इंजीनियर समय रहते कॉकपिट के आपातकालीन रास्ते से बाहर निकलकर भागने में सफल रहे, जिससे आतंकवादी विमान को अपने नियंत्रण में लेकर आसमान में उड़ान भरने या किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने में पूरी तरह नाकाम हो गए।

यात्रियों की सुरक्षा को बनाया अपनी जिंदगी का पहला मकसद

कॉकपिट क्रू के बाहर चले जाने के बाद आतंकवादी पूरी तरह से बौखला गए और उन्होंने नीरजा को ही विमान के यात्रियों को नियंत्रित करने के लिए मजबूर किया। आतंकवादियों का मुख्य निशाना अमेरिकी नागरिक थे ताकि वे अपनी मांगों को मनवाने के लिए दबाव बना सकें, लेकिन नीरजा ने अपनी जान की बाजी लगाकर इस क्रूर मंशा को विफल कर दिया।

उन्होंने यात्रियों के पासपोर्ट छिपाने शुरू कर दिए और कई अमेरिकी पासपोर्ट्स को सीटों के नीचे या कचरे के डिब्बे में फेंक दिया, जिससे आतंकवादी अमेरिकी और अन्य नागरिकों के बीच का भेद नहीं कर पाए और किसी की भी पहचान तुरंत उजागर नहीं हो सकी।

मौत के साये में भी नहीं डगमगाया युवा हौसला

आतंकवादियों की हरकतों से पूरा विमान केबिन चीख-पुकार और दहशत के माहौल में डूब चुका था। घंटे बीतते जा रहे थे और बंधक बनाए गए यात्रियों का तनाव चरम पर पहुंच रहा था, लेकिन ऐसे अत्यंत भीषण और खौफनाक हालातों में भी नीरजा भनोट ने अपने भीतर गजब का संयम और मानसिक दृढ़ता बनाए रखी।

वह लगातार डरे हुए यात्रियों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को ढांढस बंधाती रहीं और उन्हें पानी पिलाकर शांत रखने का प्रयास करती रहीं। उनका यह निडर और आश्वस्त करने वाला व्यवहार केबिन में मौजूद हर एक व्यक्ति के लिए एक बड़ी मानसिक ढाल साबित हो रहा था।

मौत के मुहाने पर खड़े होकर निभाया इंसानी फर्ज

करीब 17 घंटे तक चले इस भीषण ड्रामे के दौरान आतंकवादियों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा था और वे लगातार धमकियां दे रहे थे। इसके बावजूद नीरजा ने अपनी पेशेवर जिम्मेदारी और इंसानियत के फर्ज से कभी एक इंच भी पीछे हटने का विचार नहीं किया।

जब आतंकवादियों ने एक अमेरिकी नागरिक को पहचान कर उसे मारने की कोशिश की, तो नीरजा ने बीच-बचाव करते हुए अपनी जान जोखिम में डाल दी।

उन्होंने हर पल मौत को अपनी आंखों के सामने नाचते हुए देखा, लेकिन उनके चेहरे पर शिकन का एक भी भाव नहीं आया और वह अंतिम क्षण तक यात्रियों की सुरक्षा के लिए डटी रहीं।

जब आतंकवादियों की गोलियों से थर्रा उठा केबिन

घटना के लगभग 17 घंटे बीत जाने के बाद विमान की बैटरी खत्म होने लगी और केबिन की बत्तियां अचानक गुल हो गईं, जिससे चारों तरफ अंधेरा छा गया। इस अचानक हुई हलचल और अंधेरे का फायदा उठाते हुए आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी और यात्रियों पर कहर बरपाने लगे।

ऐसे जानलेवा और खौफनाक क्षणों में भी नीरजा ने घबराने के बजाय अपनी जान की परवाह किए बिना आपातकालीन निकास द्वार खोलने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए, ताकि अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

बच्चों की ढाल बनकर कुर्बान हो गई जांबाज नीरजा

अंधाधुंध गोलीबारी के दौरान जब एक आतंकवादी ने कुछ मासूम बच्चों पर निशाना साधा, तो नीरजा ने बिना एक पल गंवाए उन बच्चों को अपनी बांहों में समेट लिया और उनके आगे अपनी छाती अड़ा दी।

आतंकवादियों की गोलियों ने इस वीर बेटी के शरीर को छलनी कर दिया। अपनी अंतिम सांसें लेते वक्त भी उनके चेहरे पर अपार संतुष्टि का भाव था कि उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर उन मासूम बच्चों और अन्य यात्रियों की जिंदगियां बचा ली थीं। उनके इस सर्वोच्च बलिदान ने इतिहास के पन्नों में उन्हें हमेशा के लिए अमर कर दिया।

भारतीय सह-पायलट स्मित मच्छार के साहस से जुड़ी समकालीन मिसाल

आज के दौर में जब कोई फ्लाईदुबई के विमान में भारतीय को-पायलट स्मित मच्छार द्वारा हवा में दिखाए गए अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा की बात करता है, तो नीरजा भनोट का यह महान कारनामा याद आ जाता है।

स्मित मच्छार ने जिस प्रकार विपरीत परिस्थितियों में अपनी जान जोखिम में डालकर एक बड़े विमान हादसे को टाल दिया और सैकड़ों यात्रियों को सुरक्षित जमीन पर उतारा, वह इस बात का जीवंत प्रमाण है कि भारतीय विमानन क्षेत्र के पेशेवर अपनी जान पर खेलकर यात्रियों की हिफाजत करना अच्छी तरह जानते हैं। यह परंपरा किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस भारतीय संस्कार की है जो संकट के समय सबसे आगे खड़ा होता है।

असाधारण वीरता के लिए मिले देश-दुनिया के सर्वोच्च सम्मान

नीरजा भनोट के इस अकल्पनीय और ऐतिहासिक साहस को देश और दुनिया भर में अभूतपूर्व सम्मान प्रदान किया गया। मरणोपरांत भारत सरकार ने उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया, और इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को प्राप्त करने वाली वह अब तक की सबसे कम उम्र की और पहली महिला नागरिक बनीं।

इसके अलावा पाकिस्तान सरकार द्वारा उन्हें ‘तमगा-ए-इंसानियत’ से नवाजा गया और अमेरिका ने भी उनके अक्लांत साहस को सलाम करते हुए ‘जस्टिस फॉर क्राइम्स अवार्ड’ प्रदान किया।

‘घायल होने के बावजूद बचाई सैकड़ों की जान’, फ्लाईदुबई फ्लाइट के भारतीय पायलट की पीएम मोदी ने की जमकर तारीफ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में कथित हमले की कोशिश को नाकाम करने के मामले में भारतीय पायलट स्मित मछार की जमकर तारीफ की है। पीएम मोदी ने उन्हें एक सच्चा हीरो बताया है, जिन्होंने सैकड़ों लोगों की जान बचाई। पढ़िए पूरी खबर…