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स्मार्ट शहरों को नहीं मिली ढेले भर रकम

नवंबर 2018 और फरवरी 2019 में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी के लिए आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय को पत्र भेजा गया था। इसमें अभी तक चुने गए शहरों के बजट और उनमें हुए कार्यों की जानकारी मांगी गई थी।

Author June 26, 2019 6:02 AM
पुणे में लॉन्च किया Smart City Project लांच करने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

गजेंद्र सिंह

स्मार्ट सिटी का सपना देखने वाले लोगों को यह जानकर हैरानी होगी कि क्या दो करोड़ के बजट में भी किसी सिटी को स्मार्ट बनाया जा सकता है। सूचना के अधिकार (आरटीआइ) कानून के तहत मिली जानकारी तो यही बता रही है। पांच चरणों (जिसमें एक फास्ट ट्रैक राउंड) में स्मार्ट सिटी की घोषणा होने के बाद भी कई शहरों को अभी पूरा बजट नहीं मिल सका है, वहीं कुछ शहरों को अभी दो करोड़ से 50 करोड़ रुपए की राशि ही जारी किए गए हैं। स्मार्ट सिटी योजना को 2019-20 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।

नवंबर 2018 और फरवरी 2019 में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी के लिए आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय को पत्र भेजा गया था। इसमें अभी तक चुने गए शहरों के बजट और उनमें हुए कार्यों की जानकारी मांगी गई थी। जानकारी के मुताबिक, जम्मू कश्मीर राज्य के जम्मू और श्रीनगर को चौथे चरण के तहत 2017 में स्मार्ट सिटी के लिए चुना गया था लेकिन पहले तो इसे मात्र दो करोड़ रुपए ही जारी किए गए, उसके बाद 2017-18 और 2018-19 में 52 और 54 करोड़ रुपए ही जारी हुए। पांचवे चरण के तहत 2018 में चुने गए लक्ष्यद्वीप के कवरत्ती शहर को सूचना के मुताबिक एक भी रुपए जारी नहीं हो सका है। महाराष्ट्र अमरावती को दौड़ में शामिल होने के समय में ही 2015-16 में दो करोड़ रुपए जारी किए गए थे लेकिन 2017 में चयन होने के बाद एक भी रुपए जारी नहीं किया गया है। मेघालय के शिलांग को चौथे चरण में 2018 में चुना गया लेकिन इससे पहले 2015-16 में दो करोड़ रुपए जारी किए गए थे। अभी तक इस शहर को बाकी की रकम जारी नहीं की गई है।

प्रस्ताव तैयार करने में खर्च
जानकारी मांगी गई थी कि स्मार्ट सिटी में चयन से पहले ही कई शहरों को दो-दो करोड़ रुपए की धनराशि जारी की गई थी वह किस मद में थी। इसके जवाब में मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि स्मार्ट सिटी मिशन के दिशानिर्देशों के अनुसार चरण एक में छंटनी किए गए सभी संभावित स्मार्ट शहरों को दो करोड़ रुपए प्रति शहर जारी किए गए हैं। तमिलनाडू के इरोड, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, बरेली, मुरादाबाद, बिहार का बिहार शरीफ और मेघालय का शिलांग कुछ ऐसे शहर हैं जिनका चयन तो 2018 में अंतिम चरण में किया गया था लेकिन दो-दो करोड़ रुपए की धनराशि 2015-16 में ही जारी कर दी गई थी।

हालांकि इन रुपए के मद के बारे में जानकारी नहीं दी गई लेकिन निगमों के मुताबिक इन पैसों का इस्तेमाल स्मार्ट सिटी में चयन के लिए प्रोजेक्ट बनाने में खर्च किया गया था। क्योंकि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, रामपुर, मेरठ, रायबरेली, ग्रेटर मुंबई और तमिलनाडू का डिंडीगुल आदि कई शहर चयनित नहीं हो सके लेकिन फिर भी यहां 2015-16 और 17-18 के बीच दो-दो करोड़ रुपए जारी किए गए थे। हालांकि कई शहर इसमें भी आधी रकम खर्च कर सके हैं। शहरों का प्रस्तावित प्रोजेक्ट बनाने के लिए मंत्रालय की ओर से शार्ट लिस्टेड किए गए परामर्शी फर्मों पर भी जानकारी मांगी गई थी जिसके बारे में बताया गया कि इनका चुनाव शहरों की ओर से खुद किया गया था, हालांकि इन फर्मों का चुनाव मंत्रालय की ओर से चयनित 48 फर्मों में से करना था। पांच चरणों के दौरान 27 शहरों को मात्र 50 करोड़ के आसपास ही रकम जारी की गई है।

आबंटित राशि से कम खर्च
पहले चरण में चयनित 20 शहरों में से 18 को अब तक 196-196 करोड़ रुपए जारी किए गए हंै। इनमें असम में 196 करोड़ में 12.80 करोड़, नई दिल्ली में 196 करोड़ में 72.81 करोड़, कर्नाटक के बेलगावी में 15.41 करोड़ और दावनगेरे में 26.71 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। केरल के कोच्चि में 5.38 करोड़ रुपए, महाराष्ट्र के सोलापुर में 32.30 और पुणे में 83.56, लुधियाना में 16.40, जयपुर में 65.98 और उदयपुर में 36.54 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए हैं। कुछ शहरों के निगमों ने बताया कि फरवरी के बाद चुनावी आचार संहिता जारी होने के बाद काम ठप हो गया था। हालांकि संसद में एक सवाल के जवाब में बताया गया है कि स्मार्ट सिटी की 5151 परियोजनाएं प्रस्तावित हैं जिनमें 379 परियोजनाएं पूरी की गई हैं और 732 पर काम चल रहा है।

अभी तक शहरों को जारी की गई रकम

पहला चरण
रकम 2015-16 : 1467.2 करोड़ रु.
दूसरा चरण
2016-17 : 4492.5 करोड़ रुपए
तीसरा चरण
2017-18 : 4585.5 करोड़ रुपए
चौथा चरण
2018-19 : 2942 करोड़ रुपए

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