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नीतीश-ममता-योगी समेत कई राज्‍य सरकारों की सुस्‍ती से बच सकते हैं मोदी सरकार के 26500 करोड़ रुपये

PM-Kisan यजोना के तहत तय धनराशि में भी बचत की संभावना है। क्योंकि, अधिकांश राज्यों ने योजना के हकदार किसानों की जानकारी वेब पोर्टल पर अपलोड ही नहीं किया है। उनकी इस सुस्त रफ्तार के चलते बजट मेें बचत हो रही है।

Author Published on: July 23, 2019 3:10 PM
PM किसान योजना से किसानों को जोड़ने का काम राज्य सरकारें काफी धीमी गति से कर रही हैं। (फोटो सोर्स: द इंडियन एक्सप्रेस)

नरेंद्र मोदी सरकार ने पीएम-किसान (PM-Kisan) योजना के तहत सभी किसानों (लगभग 14 करोड़) को शामिल करने के बावजूद नवीनतम बजट में धनराशि नहीं बढ़ाने का फैसला किया तब अधिकांश लोगों को लगा कि सरकार के पास फंडिंग की कमी है। हालांकि, एनडीए की जीत में अहम भूमिका निभाने वाली इस लोकप्रिय योजना के लिए सरकार बजट में 75,000 करोड़ रुपये की मामूली बचत कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक बड़े राज्य बिहार और मध्य प्रदेश ने अपने आधिकारिक वेबसाइट पर अब किसानों से संबंधित डाटा क्रमश: 11% और 9% ही अपलोड किया है। यानी योजना के पात्र लोगों को आधिकारिक रूप से शामिल करने की कवायद काफी धीमी गति से चल रही है।

पश्चिम बंगाल तो इस योजना से खुद को अलग रखे हुए है। वहां ममता बनर्जी की सरकार इस योजना में राज्य की भागीदारी सुनिश्चित ही नहीं कर रही हैं। अब तक चार महीनों (अप्रैल से जुलाई) में योजना के लाभार्थियों की संख्या 8 करोड़ होगी। इनमें से लगभग 5.8 करोड़ रुपये संभावित रूप से योग्य किसानों के निकल जाते हैं और सरकार को इससे 11,500 करोड़ रुपये की बचत होगी। हालांकि, एक सूत्र ने कहा कि वित्त वर्ष के बची हुई अवधि में योजना के लाभार्थियों की संख्या में बढ़ती जा रही है। फिर भी सरकार 83,000 करोड़ रुपये के तय अनुमानित लागत से कम से कम 15,000 करोड़ रुपये की बचत कर सकती है और निर्धारित किसानों के बैंक खातों में 6 हजार रुपये ट्रांसफर कर सकती है। इस तरह सरकार कुल 26,500 करोड़ रुपये की बचत कर सकती है।

कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, “हमने राज्यों को स्पष्ट किया है कि अप्रैल से जुलाई की अवधि तक उन्हीं किसानों को 2000 रुपये दिए जाएंगे जिनका डाटा 31 जुलाई तक वेब पोर्टल पर डाटा मुहैया कराया जाएगा। जो भी लाभार्थि सूची का हिस्सा होगा उसे ही जुलाई के बाद अगस्त से नवंबर अवधि के लिए पैसे दिए जाएंगे।” अधिकारी ने बताया कि अभी तक राज्यों ने 7.4 करोड़ किसानों का डाटा मुहैया कराया है। जिनमें से 5.5 करोड़ को केंद्र सरकार ने चिन्हित कर लिया है। बाकी बचे किसानों का फिलहाल वेरिफिकेशन चल रहा है।

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