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कोरोना से भारत में 40 लाख मरे- दुनिया को बताना चाहता है WHO, हेल्‍थ मिनिस्‍ट्री ने छह खत लिख जताई आपत्ति- NYT की रिपोर्ट पर सरकार की सफाई

विशेषज्ञों का कहना है कि डब्ल्यूएचओ ने भारत में कोविड-19 से 40 लाख मौतों का अनुमान लगाया है, जैसा कि NYT ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है। इस रिपोर्ट में जुलाई 2021 के बाद किए गए कई शोध, अध्ययनों में भारत के अंदर हुई अनुमानित मृत्यु 3 मिलियन से ज्‍यादा बताई गई हैं।

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कोविड -19 की दूसरी लहर के दौरान दिल्ली में एक श्मशान का दृश्य। (Express Photo: Tashi Tobgyal)

भारत सरकार ने कोविड-19 के चलते होने वाली मौत का आंकड़ा 5,21,000 बताया है, लेकिन वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गनाइजेशन (WHO)ने मरने वालों की संख्‍या इससे करीब 7 गुना ज्‍यादा यानी 40 लाख बताई है। भारत सरकार ने मौत के आंकड़े एकत्र करने के WHO के तरीके पर सवाल उठाए हैं और इसके लिए छह लेटर लिखे हैं।

छह पत्रों के अलावा, भारत ने नवंबर 2021 से अब तक पांच वर्चुअल मीटिंगों के माध्यम से भी अपनी चिंता व्यक्त की है, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह बात द न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की उस रिपोर्ट के जवाब में कही है, जिसमें यह दावा किया है कि भारत कोविड-19 से मरने वालों के आंकड़े को सार्वजनिक के WHO के प्रयासों को रोक रहा है। डब्ल्यूएचओ ने जनवरी में भारत के साथ-साथ अन्य देशों में कोविड -19 से होने वाली अधिक मौतों के अनुमानों को सार्वजनिक करने की योजना बनाई थी, लेकिन आंकड़े जारी करने का यह कार्य “भारत की आपत्तियों के कारण महीनों के लिए लंबित हो गया।” न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स ने यह दावा शनिवार को पब्लिश की गई एक रिपोर्ट में किया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार देर रात जारी एक मीडिया विज्ञप्ति में पहली बार उन आपत्तियों के कारणों को विस्तार से बताते हुए कहा कि भारत की “मूल आपत्ति रिजल्‍ट (मतलब आंकड़ों) के साथ नहीं है, उस तरीक पर है, जिसके जरिए आंकड़े जुटाए गए हैं।” स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रत्येक अध्ययन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है और यह कहा है कि स्‍टडी में जो निष्‍कर्ष निकाले गए हैं, उनका आधार त्रुटिपूर्ण, भ्रामक और अप्रमाणित मान्यताएं हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि भारत के पास कोरोना से होने वाली मौतों को रिपोर्ट करने के लिए एक मजबूत तंत्र हैं। भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के एक वर्ग का मानना ​​​​है कि अप्रैल-मई 2021 के दौरान जब दूसरी कोविड -19 लहर का पीक आया तब देश के भीतर कोविड -19 मरने वालों की वास्तविक संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक है।

“पब्लिक हेल्‍थ सेक्‍टर से जुड़े लोग यह जानते हैं – वास्तविक मृत्यु दर अधिक है, लेकिन जब आप एक बार कुछ छिपाते हैं, तो आपको इसे बार-बार छिपाना पड़ता है। ” केंद्र सरकार के बारे में यह दावा करने वाले संक्रामक रोग महामारी विशेषज्ञ ने भी WHO के मौत के आंकड़े जुटाने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि WHO की कार्यप्रणाली के बारे में भारत की चिंता इस बात से संबंधित है कि मौत के आंकड़े जुटाने के लिए कैसे भारत जैसे बड़े भौगोलिक आकार और जनसंख्या वाले देश में सांख्यिकीय मॉडल का इस्‍तेमाल किया गया है, जो कि केवल उन देशों में फिट बैठता है जहां बहुत कम आबादी है।

मंत्रालय ने सांख्यिकीय मॉडल की वैधता और सटीकता के बारे में चिंताओं का हवाला देते हुए कहा, “यह मॉडल जो ट्यूनीशिया जैसे छोटे देशों के लिए सही हैं, इसे भारत में लागू नहीं किया जा सकता है।” मंत्रालय ने चिंता व्यक्त की है कि भारत के आंकड़े निकालने WHO ने 61 देशों के रिपोर्ट किए गए डेटा के साथ स्‍टैंडर्ड पैटर्न निर्धारित किए और उन्हें भारत सहित अन्य देशों के लिए इस्‍तेमाल किया। मंत्रालय ने कहा, “इस दृष्टिकोण के आधार पर, भारत में अनुमानित मौतों का आंकड़ा उसी आधार पर किया गया जिसके जरिए कोस्टा रिका, इज़राइल, पराग्वे और ट्यूनीशिया का आंकड़ा निकाला गया।”

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