शनिवार (25 जुलाई) को बिहार के सिवान में हुए प्रदर्शन के दौरान एक कांस्टेबल ने AK-47 राइफल से हवा में चार राउंड फायरिंग कर दी। बिहार पुलिस ने इसके बाद विवाद होने पर सिवान के कांस्टेबल अभिषेक कुमार को निलंबित कर दिया है। हालांकि, इसके साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या बंद और विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल कर सकती है?

हालांकि इस विषय पर पूरे देश में लागू होने वाला कोई एक समान केंद्रीय कानून नहीं है क्योंकि कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है। फिर भी भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) और विभिन्न राज्यों की पुलिस मैनुअल में ऐसे मामलों से जुड़े कुछ प्रावधान और दिशा-निर्देश मौजूद हैं जो इस सवाल पर प्रकाश डालते हैं।

बिहार पुलिस के मैनुअल में क्या है नियम?

बिहार पुलिस मैनुअल, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) और केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के संबंधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, AK-47 जैसी ऑटोमैटिक असॉल्ट राइफलों की तैनाती और उनका इस्तेमाल सख्त नियमों के अधीन होता है।

AK-47, INSAS और SLR जैसी ऑटोमैटिक असॉल्ट राइफलों को ‘प्लाटून और सेक्शन आर्म्स’ की श्रेणी में रखा गया है। इन हथियारों का उपयोग व्यक्तिगत पुलिसकर्मियों द्वारा सामान्य कानून-व्यवस्था ड्यूटी के लिए नहीं किया जा सकता। इन्हें केवल संगठित पुलिस बल (Formation Units) के साथ तैनात किया जाना चाहिए।

इन हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति केवल विशेष परिस्थितियों और विशेष इकाइयों तक सीमित है। इनमें मुख्यमंत्री और राज्यपाल जैसे वीवीआईपी की सुरक्षा में तैनात स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप (SSG), स्पेशल टास्क फोर्स (STF), स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG), नक्सल विरोधी और आतंकवाद-रोधी अभियान चलाने वाली इकाइयां, उच्च सुरक्षा जोखिम वाले क्षेत्र और उग्रवाद प्रभावित ऑपरेशन क्षेत्र शामिल हैं।

इसके अलावा गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों पर आधारित राज्य सरकारों के परिपत्रों के अनुसार, नेताओं, न्यायाधीशों और वरिष्ठ IAS एवं IPS अधिकारियों की सुरक्षा में तैनात सामान्य बॉडीगार्ड को AK-47 लेकर चलने की अनुमति नहीं है। राज्य सरकारों ने निर्देश दिया है कि बॉडीगार्ड ड्यूटी के दौरान ऑटोमैटिक राइफलों की जगह रिवॉल्वर, पिस्तौल और कार्बाइन जैसे कम दूरी के हथियार इस्तेमाल किए जाएं।

सिवान मामले में क्या हुआ?

बिहार पुलिस मुख्यालय की आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, AK-47 राइफल से लैस कांस्टेबल अभिषेक कुमार ने भीड़ से घिर जाने के बाद हवा में चार राउंड फायर किए। हालांकि, पुलिस मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि अभिषेक कुमार, सिवान के पुलिस अधीक्षक (SP) पूरन कुमार झा के दो बॉडीगार्डों में से एक थे।

सूत्रों के मुताबिक, 25 जुलाई को बिहार बंद के दौरान सिवान में पथराव में एसपी को निशाना बनाए जाने के बाद कांस्टेबल ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश के बिना ही AK-47 से फायरिंग कर दी।

एक पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ”अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल नक्सल विरोधी, आतंकवाद-रोधी और इसी तरह के विशेष अभियानों में किया जा सकता है। लेकिन यह तय कैसे किया जाए कि कोई प्रदर्शन सामान्य है या भीड़ पुलिस पर हमला कर रही है? अगर किसी एसपी पर हमला हो रहा हो तो क्या उसका बॉडीगार्ड आदेश मिलने का इंतजार करेगा? ये ऐसे मुश्किल सवाल हैं जिनका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।”

बिहार पुलिस ने साल 2000 के बाद AK-47 राइफलों का इस्तेमाल शुरू किया था। इससे पहले पुलिस बल मुख्य रूप से .303 राइफल और SLR (सेल्फ-लोडिंग राइफल) का इस्तेमाल करता था।

क्या BNSS के प्रावधान नागरिक प्रदर्शनों के दौरान AK-47 के इस्तेमाल पर रोक नहीं लगाते?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और पहले की दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के साथ लागू पुलिस मैनुअल और प्रक्रियात्मक नियमों के तहत, नागरिक प्रदर्शनों के दौरान AK-47 जैसे ऑटोमैटिक हथियारों के इस्तेमाल पर सख्त प्रतिबंध है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ”कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए एक स्पष्ट ‘एस्केलेशन प्रोटोकॉल’ तय है। इसकी शुरुआत मौखिक चेतावनी और बातचीत से होती है। इसके बाद बैरिकेडिंग, वाटर कैनन, आंसू गैस, लाठीचार्ज और फिर गैर-घातक (Non-Lethal) या दंगा नियंत्रण के लिए इस्तेमाल होने वाले साधन जैसे रबर बुलेट या टियर शेल का प्रयोग किया जाता है।”

उन्होंने कहा कि आग्नेयास्त्रों (Firearms) का इस्तेमाल केवल आखिरी विकल्प (Last Resort) के रूप में किया जा सकता है। वह भी तब, जब किसी की जान बचाना जरूरी हो, आत्मरक्षा में घातक हमले का सामना करना पड़ रहा हो या पुलिस के हथियारों के भंडार (Armoury) को लूटे जाने का तुरंत खतरा हो।

हालांकि, वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक सिवान में इस निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ”इसी वजह से कांस्टेबल अभिषेक कुमार के खिलाफ विभागीय जांच भी होगी।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी पुलिस अधिकारी या कांस्टेबल किसी अधिकृत वरिष्ठ अधिकारी- जैसे ड्यूटी पर तैनात मजिस्ट्रेट या मौके पर मौजूद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के स्पष्ट आदेश के बिना ऑटोमैटिक हथियार से फायरिंग नहीं कर सकता।

नियमों के अनुसार, स्पष्ट आदेश के बिना AK-47 जैसे ऑटोमैटिक हथियार से चेतावनी देने के लिए या हवा में फायर करना भी अनुशासन और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।

नियमों के अनुसार, स्पष्ट आदेश के बिना AK-47 जैसे ऑटोमैटिक हथियार से चेतावनी देने के लिए या हवा में फायर करना भी अनुशासन और स्टैंडर्डऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।

केंद्रीय कानून अत्याधुनिक हथियारों के इस्तेमाल के बारे में क्या कहते हैं?

भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार ‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था (Public Order)’ राज्य सूची के विषय हैं। इसलिए AK-47 जैसे ऑटोमैटिक हथियारों की तैनाती और उनके इस्तेमाल की अनुमति से जुड़े नियम हर राज्य के पुलिस मैनुअल, पुलिस विनियम (Police Regulations) और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) के तहत तय किए जाते हैं।

हालांकि, AK-47 राइफल को पूरे देश में ‘प्रोहिबिटेड बोर (Prohibited Bore-PB)’ और उच्च फायरिंग क्षमता वाले हथियार की श्रेणी में रखा गया है। कुछ सीमित अपवादों को छोड़कर इसे सामान्य बीट ड्यूटी या रोजमर्रा की कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों को जारी नहीं किया जाता।

इन हथियारों का इस्तेमाल मुख्य रूप से नक्सल विरोधी अभियान (Anti-Naxal Operations), स्पेशल टास्क फोर्स (STF), आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS), वीवीआईपी सुरक्षा/स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप (SSG) तथा दंगा नियंत्रण या सीमा सुरक्षा से जुड़े विशेष कमांडो दस्तों तक सीमित रहता है।

पुलिस फायरिंग से जुड़े प्रोटोकॉल के अनुसार, चाहे कोई अधिकारी 9 एमएम पिस्तौल का इस्तेमाल करे या AK-47 का, घातक बल (Lethal Force) के प्रयोग के लिए कानूनी मानक स्टैंडर्ड रहते हैं।

हालांकि, पूरे देश में ऑटोमैटिक राइफलों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने वाला कोई एकल राष्ट्रीय कानून नहीं है। लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर लागू विभिन्न दिशा-निर्देश और प्रोटोकॉल यह तय करते हैं कि AK-47 जैसे ऑटोमैटिक हथियार कब और किन परिस्थितियों में निकाले और चलाए जा सकते हैं।

गौरतलब है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 में ‘AK-47’ या किसी विशेष आग्नेय अस्त्र के नाम का स्पष्ट जिक्र नहीं किया गया है।

NHRC की गाइडलाइन क्या हैं?

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, अगर पुलिस की फायरिंग- चाहे वह AK-47 से की गई हो या किसी अन्य आग्नेय अस्त्र से के कारण किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो ऐसे मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज करना, स्वतंत्र पुलिस जांच कराना और अनिवार्य रूप से मजिस्ट्रियल जांच कराना जरूरी होता है।