पंजाब में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) प्रक्रिया जारी है। इसके तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन (वेरिफिकेशन) कर रहे हैं ताकि मतदाता सूची को अपडेट किया जा सके।

इस प्रक्रिया का मकसद राज्य की मतदाता सूची (इलेक्टोरल रोल) को अपडेट करना है क्योंकि पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। लेकिन इसे लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने लोगों से यह प्रक्रिया जल्द पूरी करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इससे ना सिर्फ उनका वोट देने का अधिकार सुरक्षित रहेगा बल्कि वे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं (वेलफेयर स्कीम्स) का लाभ भी लगातार लेते रह सकेंगे।

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या मतदाता सूची अपडेट कराने और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने के बीच कोई संबंध है? इसके अलावा एक और सवाल लोगों के मन में है कि अगर कोई व्यक्ति यह प्रक्रिया पूरी नहीं करता है तो उसके साथ क्या होगा?

SIR क्या है और पंजाब के लिए इसकी टाइमलाइन क्या है?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनाव आयोग (ECI) द्वारा चलाया जा रहा एक विशेष अभियान है जिसका उद्देश्य मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) को अपडेट करना और उसमें दर्ज जानकारी का वेरिफिकेशन करना है।

इस अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी की जांच कर रहे हैं और उनसे एन्यूमरेशन फॉर्म भरवा रहे हैं। पंजाब में यह अभियान 25 जून से शुरू हुआ था और 24 जुलाई तक घर-घर सत्यापन का काम जारी रहेगा।

इसके बाद 3 अगस्त को मतदाता सूची का प्रारूप (ड्राफ्ट) जारी किया जाएगा। यदि किसी को कोई आपत्ति या सुधार कराना होगा तो वह 2 सितंबर तक दावा या आपत्ति दर्ज करा सकेगा। इसके बाद 1 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। चुनाव आयोग ने पंजाब में 2.14 करोड़ से अधिक मतदाताओं के सत्यापन के लिए 24000 से ज्यादा बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की तैनाती की है।

इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को अपनी व्यक्तिगत जानकारी की पुष्टि करनी होगी और जरूरत पड़ने पर निर्धारित फॉर्म के साथ आवश्यक दस्तावेज भी जमा करने होंगे। चुनाव आयोग का कहना है कि इस अभियान का मकसद भविष्य के चुनावों के लिए सटीक और अपडेटेड मतदाता सूची तैयार करना है।

सीएम भगवंत मान ने क्या कहा?

शुरुआत में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आरोप लगाया था कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बीजेपी असली मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश कर सकती है। उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ताओं से इस प्रक्रिया पर नजर रखने और सतर्क रहने की अपील की थी।

हाल के दिनों में हालांकि मुख्यमंत्री ने अपना रुख बदलते हुए सभी पात्र मतदाताओं से SIR प्रक्रिया में हिस्सा लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ उनका वोट देने का अधिकार सुरक्षित रहेगा बल्कि वे राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी लगातार ले सकेंगे। हाल ही में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी इसी तरह की बात कही थी।

भगवंत मान ने खास तौर पर ‘मावां धीयां सत्कार योजना’ का जिक्र करते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया पूरी करने से लाभार्थी इस योजना का लाभ लेते रह सकेंगे।

इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये जबकि पात्र अनुसूचित जाति (SC) की महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये सीधे उनके बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए दिए जाते हैं।

गौर करने वाली बात है कि पिछले कुछ सालों में महिलाओं को लक्षित ऐसी कल्याणकारी योजनाएं चुनावी राजनीति में अहम मुद्दा बनकर उभरी हैं और राजनीतिक दल इन्हें वोटरों तक पहुंचाने पर खास जोर दे रहे हैं।

SIR और वेलफेयर में कनेक्शन

पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई भाजपा सरकार ने साफ कहा है कि जिन लोगों के नाम विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हट जाएंगे, उन्हें राशन और अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं दिया जाएगा।

हालांकि, पश्चिम बंगाल के इस फैसले को छोड़ दें तो देश के बाकी हिस्सों में मतदाता सूची और सरकारी योजनाओं के बीच कोई सीधा कानूनी संबंध नहीं है। लेकिन कई सरकारी योजनाओं जैसे ‘मावां धीयां सत्कार योजना’ में वोटर आईडी कार्ड या मतदाता सूची में नाम होना पहचान या पते के सहायक दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाता है।

पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट में SIR प्रक्रिया का बचाव करते हुए चुनाव आयोग (ECI) ने कहा था कि यह अभियान केवल मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए है, नागरिकता तय करने के लिए नहीं।

मई में SIR कराने के चुनाव आयोग के अधिकार को बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि इस प्रक्रिया का असर केवल इस बात तक सीमित है कि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल होगा या नहीं और वह चुनाव में मतदान कर पाएगा या नहीं।

अदालत ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से नाम हटने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता खत्म हो जाती है। नागरिकता से जुड़े किसी भी विवाद का फैसला केवल नागरिकता अधिनियम (Citizenship Act) के तहत सक्षम प्राधिकारी ही कर सकता है।

हाल ही में नागरिकता को लेकर बहस उस समय फिर तेज हो गई जब द टेलीग्राफ के पूर्व संपादक आर. राजगोपाल का मामला सामने आया। आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से उनका नाम हटने के बाद वह अपना पासपोर्ट रिन्यू नहीं करा सके।

वहीं पंजाब के सामाजिक सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना में भी वोटर आईडी कार्ड को मान्य दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाता है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाता है।

इसके अलावा, पंजाब की कई अन्य सरकारी योजनाओं में भी वोटर आईडी कार्ड या मतदाता सूची में नाम पहचान, आयु या निवास (डोमिसाइल) के महत्वपूर्ण प्रमाण के रूप में स्वीकार किए जाते हैं।

पंजाब में कई सरकारी योजनाओं में वोटर आईडी कार्ड या मतदाता सूची में नाम पहचान, आयु या निवास के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाता है।

इनमें प्रमुख योजनाएं शामिल हैं:

वृद्धावस्था पेंशन योजना: पात्र वरिष्ठ नागरिकों को 1500 रुपये प्रति माह
विधवा एवं निराश्रित महिला पेंशन योजना: पात्र महिलाओं को 1500 रुपये प्रति माह
पंजाब आशीर्वाद योजना: अनुसूचित जाति (SC), पिछड़ा वर्ग (BC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के पात्र परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए 51,000 रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता।
पंजाब लेबर कार्ड (श्रमिक कार्ड) पंजीकरण।
राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना: परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की मृत्यु होने पर 20,000 रुपये की एकमुश्त सहायता

ध्यान देने वाली बात है कि इन योजनाओं के लिए वोटर आईडी या मतदाता सूची में नाम अक्सर पहचान या निवास के सहायक दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल होता है। लेकिन अधिकांश मामलों में मतदाता सूची से नाम हटने का मतलब अपने आप योजनाओं का लाभ बंद होना नहीं है। संबंधित योजना के अपने अलग पात्रता नियम होते हैं।

चूंकि पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में लोग विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी नहीं करते हैं और इससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में किसी तरह की दिक्कत आती है तो यह सत्तारूढ़ सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकता है।