SIR 3rd Phase: चुनाव आयोग ने देशभर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तीसरे चरण का ऐलान कर दिया है। आयोग के मुताबिक, इस चरण में 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जाएगा। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर देश के लगभग सभी हिस्सों में यह प्रक्रिया लागू हो जाएगी।

आयोग ने बताया कि हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जनगणना के दूसरे चरण और मौसम संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पुनरीक्षण कार्यक्रम बाद में जारी किया जाएगा।

SIR यानी Special Intensive Revision के तहत बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। इस दौरान नए वोटर जोड़ने, मृत या घर छोड़ चुके मतदाताओं के नाम हटाने और जानकारी अपडेट करने का काम होगा। आयोग के मुताबिक, तीसरे चरण में 3.94 लाख BLO और 3.42 लाख BLA करीब 36.73 करोड़ मतदाताओं तक पहुंचेंगे।

SIR 3rd Phase
3 केंद्र शासित प्रदेशों में भी होगी SIR प्रक्रिया

किस राज्य की मतदाता सूची कब होगी जारी?

-उड़ीसा, मिज़ोरम, सिक्किम और मणिपुर की अंतिम मतदाता सूची 6 सितंबर 2026 को जारी की जाएगी।

-दादरा नगर हवेली और दमन दीव की अंतिम मतदाता सूची 11 सितंबर को प्रकाशित होगी।

-उत्तराखंड की 15 सितंबर को पब्लिश होगी।

-आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़ का फाइनल रोल 22 सितंबर को आएगा।

-तेलंगाना और पंजाब की अंतिम मतदाता सूची 1 अक्टूबर को आएगी।

-कर्नाटक, मेघालय, महाराष्ट्र, झारखंड, दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 7 अक्टूबर 2026 को जारी होगी।

-नागालैंड की अंतिम मतदाता सूची 22 नवंबर को तो त्रिपुरा की अंतिम मतदाता सूची 23 दिसंबर 2026 को आएगी।

किन राज्यों में अभी नहीं होगा SIR?

चुनाव आयोग ने हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में फिलहाल SIR कार्यक्रम घोषित नहीं किया है। आयोग के अनुसार इन क्षेत्रों में जनगणना के दूसरे चरण और मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए बाद में कार्यक्रम जारी होगा।

सबसे ज्यादा वोटर किस राज्य में?

Annexure-II के अनुसार:
महाराष्ट्र: 9.86 करोड़ मतदाता
कर्नाटक: 5.55 करोड़
आंध्र प्रदेश: 4.16 करोड़
तेलंगाना: 3.39 करोड़
ओडिशा: 3.34 करोड़

EC on SIR
16 राज्यों में बीएलओ और मतदाताओं की संख्या

चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को देश की मतदाता सूचियों के एसआईआर का आदेश दिया था। एसआईआर से पहले आयोग दो दशकों से चली आ रही प्रथा के मुताबिक मतदाता सूचियों को हर साल और चुनावों से पहले विशेष सारांश संशोधन (एसआईआर) के जरिए संशोधित करता था। मतदाताओं के पंजीकरण नियम 1960 के मुताबिक, आयोग मतदाता सूचियों को या तो गहन रूप से या सारांश रूप से, या फिर कुछ हद तक गहन और कुछ हद तक सारांश रूप से संशोधित कर सकता है।