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विशेष: बीसवीं सदी का अक्षर प्रेम

अपनी कहानी कहते-कहते सीमोन दुनिया की सबसे बड़ी राजनीति पितृसत्ता की पहचान करती हैं। स्त्री का खुद के बारे में बात करना सबसे बड़ी राजनीति है। यह उसकी आत्मनिर्भरता की अवधारणा है। सीमोन खुद के बारे में कहती हैं-‘यदि मुझे अपना संस्मरण लिखना पड़ा तो मैं स्वयं अपनी कामुकता का स्पष्ट और संतुलित वर्णन करूंगी।

बीसवीं सदी की महिलाएं

अगर परिवार राजनीति की सबसे छोटी इकाई है और स्त्री-पुरुष संबंध राजनीतिक उत्पाद तो सीमोन द बोउआर को बेहिचक बीसवीं सदी की नायिका घोषित किया जा सकता है। सीमोन द बोउआर और ज्यां पाल सार्त्र बीसवीं सदी की वह जोड़ी है जो परी-कथा जैसे नाजुक शब्द के चौखटे में नहीं आ सकते हैं। यह प्रेम कथा फ्रांसीसी क्रांति की बौद्धिक विरासत और मार्क्सवादी चेतना के साथ आगे बढ़ कर पूरी बीसवीं सदी का आख्यान रचती है। यह देह का साथ नहीं बल्कि दो अस्तित्व का सामासिक साझा था।

इन दोनों अपने रिश्ते की वैज्ञानिक और बौद्धिक प्रयोगशाला से दुनिया के सामने स्त्री-पुरुष के बीच वर्चस्वविहीन सफल रिश्ते का प्रयोग सिद्ध किया। सारी परंपराओं और वर्जनाओं से हट कर एक आधुनिक और स्वतंत्र रिश्ते का अन्वेषण किया। सीमोन और सार्त्र के रिश्ते को बीसवीं सदी की सबसे बड़ी राजनीतिक, सामाजिक और निजी खोज माना जा सकता है।

इन दोनों की खासियत रही कि अपने जीवन और सिद्धांतों को लेखन के कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया। अपने समय की विलक्षण प्रतिभाओं ने रिश्ते में एक-दूसरे को ज्यादा से ज्यादा आजाद करने का करार किया। यह जोड़ी उदाहरण है कि रिश्तों को किसी परंपरा और गुलामी में न झोकने के कारण दोनों अपने समय का सबसे आधुनिक रच रहे थे।

अपनी कहानी कहते-कहते सीमोन दुनिया की सबसे बड़ी राजनीति पितृसत्ता की पहचान करती हैं। स्त्री का खुद के बारे में बात करना सबसे बड़ी राजनीति है। यह उसकी आत्मनिर्भरता की अवधारणा है। सीमोन खुद के बारे में कहती हैं-‘यदि मुझे अपना संस्मरण लिखना पड़ा तो मैं स्वयं अपनी कामुकता का स्पष्ट और संतुलित वर्णन करूंगी। मैं महिलाओं से अपने जीवन की कामुकता के बारे में नारीवादी दृष्टिकोण से बिलकुल सच्चाई के साथ कहना चाहूंगी। क्योंकि यह केवल एक व्यक्तिगत बात नहीं है बल्कि राजनीतिक भी है’।

सीमोन लेखक के साथ सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता भी थीं। भारत जैसे देश में औपनिवेशिक शासन से आजादी मिलने के बाद ही महिलाओं को मतदान का अधिकार मिल गया था। लेकिन जिस फ्रांस ने क्रांति करते हुए स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का नारा पूरी दुनिया को दिया उसने अपने देश की स्त्रियों को मतदान का अधिकार नहीं दिया।

राजनीतिक समझ रखने वाली सीमोन ने इस विरोधाभास को पहचाना और औरतों के लिए मताधिकार के मांग के आंदोलन का हिस्सा भी बनीं। दरअसल, राजनीति का सक्रिय हिस्सा बन राजनीति को समझना ही सीमोन को बीसवीं सदी के रचनाकारों से न सिर्फ अलग करता है। यह समझ उनकी मानसिक संरचना का एक ऐसा हिस्सा है जिससे महिलाओं के निजी और सार्वजनिक जीवन में हिस्सादारी के कई तार्किक सूत्र विकसित होते हैं।

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