मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से पहले सिद्धारमैया ने एक बड़ा दांव चला है। उन्होंने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की ‘सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक सर्वेक्षण रिपोर्ट’ को आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है। यह रिपोर्ट एक तरीके से जाति जनगणना है। बताया जा रहा है कि सिद्धारमैया इस रिपोर्ट को स्वीकार कर अपने ‘अहिंदा’ वोट बैंक को और मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।

‘अहिंदा’ सिद्धारमैया का राजनीतिक आधार

सिद्धारमैया का राजनीतिक आधार ही ‘अहिंदा’ वोट बैंक पर टिका है। ‘अहिंदा’ कुछ जातियों का समीकरण है। इसमें अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित आते हैं। सिद्धारमैया ओबीसी वर्ग की कुरुबा जाति से ताल्लुक रखते हैं। कर्नाटक में लिंगायत और वोक्कालिगा वर्ग का काफी प्रभाव है।

सिद्धारमैया ने रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए कहा कि जब मैं पहली बार मुख्यमंत्री बना था, तब मैंने इस सर्वे का आदेश दिया था। उन्होंने कहा, “आज इस रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए मुझे बेहद संतोष हो रहा है। आने वाले दिनों में यह रिपोर्ट सामाजिक न्याय लागू करने में एक मार्गदर्शक का काम करेगी।”

शिवकुमार जता चुके हैं पूर्व की रिपोर्ट पर आपत्ति

2015 में जयप्रकाश हेगड़े के नेतृत्व वाले आयोग ने भी ऐसा ही सर्वे किया था, जिसे 2024 में पेश किया गया लेकिन यह आगे नहीं बढ़ाया जा सका था। उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार सहित वोक्कालिगा और लिंगायत समुदाय से आने वाले कांग्रेस नेताओं ने भी इसका कड़ा विरोध किया था। सिद्धारमैया को बुधवार को कर्नाटक स्टेट कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लासेस के चेयरमैन मधुसूदन नाइक से कर्नाटक सोशियो-इकोनॉमिक और एजुकेशनल सर्वे रिपोर्ट मिली।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार के सूत्रों ने बताया कि रिपोर्ट 29 मई को ही जमा होनी थी, लेकिन मुख्यमंत्री ने रिपोर्ट जल्दी मिलने पर ज़ोर दिया।कहा जाता है कि पिछड़ा वर्ग आयोग ने अपनी रिपोर्ट में पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण कोटा मौजूदा 32 फीसदी से बढ़ाकर 42 फ़ीसदी करने की सिफारिश की है। सूत्रों ने बताया कि अयोग ने अपनी रिपोर्ट में कैटेगरी-1 के तहत जातियों को दो ग्रुप में और कैटेगरी-2 और कैटेगरी-3 के तहत जातियों को तीन ग्रुप में बांटने का प्रस्ताव दिया है।

पत्रकारों से बात करते हुए मधुसूदन नाइक ने कहा कि वह रिपोर्ट पर कमेंट नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि कैबिनेट रिपोर्ट पर चर्चा करेगी और इसे आगे बढ़ाएगी। रिपोर्ट 25 दिन पहले तैयार हो गई थी। इसे कन्नड़ में ट्रांसलेट करने में समय लगा।” नाइक ने कहा कि रिपोर्ट लगभग 300 पेज की है जिसमें 13 चैप्टर हैं। 13वें चैप्टर में हमने सुझाव दिए हैं।”

सूत्रों ने कहा कि हालांकि रिपोर्ट अभी सार्वजनिक को नहीं दी जा सकती, लेकिन इस बात की संभावना है कि सिद्धारमैया और उनकी टीम इसे लागू करने में पार्टी नेताओं को प्रभावित कर सकती है। कई लोगों का अनुमान है कि ‘AHINDA’ समुदाय की संख्या बढ़ गई होगी।

डीके शिवकुमार क्या करेंगे?

अब अगर कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार बनते हैं और यह रिपोर्ट कैबिनेट में रखी जाती है, तो बड़ा सवाल होगा कि यह पास हो पाएगी या नहीं। दरअसल डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं। इस रिपोर्ट को लेकर लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय के कई नेता पहले ही आपत्ति जता चुके हैं। 2015 में जब पहली बार रिपोर्ट आई थी तब खुद शिवकुमार ने भी आपत्ति जताई थी।

मंझधार में कांग्रेस

अगर इस रिपोर्ट को मंजूरी मिलती है तो वह लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय की नाराजगी का सामना कांग्रेस को करना पड़ सकता है। वहीं इस रिपोर्ट में अगर देरी होती है तो अहिंदा समर्थक इसकी आलोचना कर सकते हैं। ऐसे में आने वाले समय में डीके शिवकुमार के लिए इस रिपोर्ट पर फैसला लेना काफी कठिन होगा। लेकिन एक बात तय है कि इस रिपोर्ट को स्वीकार करके सिद्धारमैया ने अपना राजनीतिक आधार बनाए रखने या और मजबूत करने की पूरी कोशिश की है।

कर्नाटक में किस वर्ग की कितनी आबादी?

कर्नाटक में लिंगायत समुदाय की आबादी करीब 15 से 16 फीसदी है जबकि वोक्कालिगा की आबादी 12 फ़ीसदी है। इन दोनों जातियों की आबादी मिलाकर करीब 28 फ़ीसदी बनती है। कुरुबा वर्ग जिससे खुद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आते हैं, उसकी आबादी करीब 8 फीसदी है। मुसलमानों की आबादी करीब 13 फीसदी, एससी 17 फीसदी और एसटी 7 फीसदी है।

कर्नाटक में किस वर्ग को कितना आरक्षण?

कर्नाटक में ओबीसी समुदाय को 32 फ़ीसदी आरक्षण दिया जाता है जबकि एससी के लिए 15 फीसदी, एसटी के लिए 3 और ईडब्ल्यूएस के लिए 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है। कर्नाटक में राज्य सरकार 60 फीसदी आरक्षण का प्रावधान कर रखी है।

श्रेणीआरक्षण कोटा
ओबीसी 32%
एससी15%
एसटी3%
EWS10%

पांच श्रेणी में बंटा है ओबीसी आरक्षण

कर्नाटक में ओबीसी आरक्षण को पांच श्रेणी में बांटा गया है। श्रेणी 1, श्रेणी 2A, श्रेणी 2B, श्रेणी 3A और श्रेणी 3B है। श्रेणी 1 में पिछड़ा वर्ग, श्रेणी 2A में अन्य पिछड़ा वर्ग, श्रेणी 2B में मुस्लिम, श्रेणी 3A में वोक्कालिगा और श्रेणी 3A में लिंगायत आते हैं।

ओबीसीआरक्षण कोटा
श्रेणी 1 (पिछड़ा वर्ग)4%
श्रेणी 2A (अन्य पिछड़ा वर्ग)15%
श्रेणी 2B (मुस्लिम)4%
श्रेणी 3A (वोक्कालिगा )4%
श्रेणी 3B (लिंगायत )5%

दरअसल वोक्कालिगा और लिंगायत भी पिछड़े वर्ग में आते हैं और इन्हें भी आरक्षण मिला हुआ है। कर्नाटक सरकार ने वोक्कालिगा समुदाय को 3A श्रेणी के अंतर्गत रखा है। वहीं इन्हें ओबीसी के अंदर ही एक नई 2C श्रेणी बनाकर इन्हें 4 फीसदी आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है। बता दें कि दक्षिणी कर्नाटक को वोक्कालिगा बेल्ट भी कहा जाता है और यहां पर डीके शिवकुमार का अच्छा प्रभाव है। वहीं कर्नाटक में लिंगायत समुदाय को भी आरक्षण मिलता है। उन्हें ओबीसी के तहत 3B श्रेणी में रखा गया है। इसके तहत इन्हें 5 फीसदी आरक्षण का लाभ दिया जाता है।

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ब्रेकफास्ट मीटिंग के दौरान कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने कैबिनेट सहयोगियों से कहा कि वह आज दोपहर 3 बजे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया से मुलाकात करके उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया और एक-दूसरे को गले लगाया। पढ़ें पूरी खबर