भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने बैंक कर्ज और अपने खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उनके साथ लगातार अन्याय हो रहा है और ऐसे में वह सोचते हैं कि उन्हें ‘कॉकरोच’ बन जाना चाहिए। माल्या ने तंज करते हुए कहा कि शायद ‘कॉकरोच की दुनिया’ में जिंदगी बेहतर हो।

माल्या ने बैंक कर्ज की वसूली को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक हलफनामे का भी हवाला दिया। विजय माल्या दावा है कि ED ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में बताया था कि 2021 में बैंकों को 14 000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम वापस की गई थी।

उन्होंने एक्स पर लिखा, ”मेरे साथ हुए और अब भी हो रहे अन्याय को देखते हुए मैं सोचता हूं कि क्या मुझे कॉकरोच बन जाना चाहिए। शायद कॉकरोच की तरफ जिंदगी बेहतर हो।”

‘ED के हलफनामे पर ध्यान दें’

माल्या ने अपने दावे के समर्थन में ED के हलफनामे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर लोग उनकी बात पर भरोसा नहीं करते तो उन्हें उनकी बात छोड़कर ED की ओर से अदालत में कही गई बात पर ध्यान देना चाहिए।

माल्या के मुताबिक, ED के हलफनामे में 2021 में बैंकों को 14131.60 करोड़ रुपये की वसूली सौंपे जाने का जिक्र है। उन्होंने लिखा कि इसके बावजूद पांच साल बाद भी उन्हें ऐसे व्यक्ति के तौर पर पेश किया जाता है जिसने बैंकों को धोखा दिया।

उन्होंने एक टेबल साझा करते हुए सवाल किया कि जब इतनी रकम की वसूली हो चुकी है तो उन्हें अब भी ‘फ्रॉडस्टर’ क्यों कहा जाता है। माल्या ने यह भी पूछा कि आखिर उन्हें उनकी रकम वापस कब मिलेगी।

‘भारत नहीं आने से कर्ज की भरपाई नहीं रुकती’

माल्या ने उन लोगों को भी जवाब दिया जो उनके भारत नहीं लौटने को लेकर सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा कि स्थायी निवास और नागरिकता में अंतर होता है और बैंक कर्ज की भरपाई किसी व्यक्ति की शारीरिक मौजूदगी पर निर्भर नहीं करती।

एक दिन पहले किए गए पोस्ट में माल्या ने कहा कि वह 1992 से ब्रिटेन के स्थायी निवासी हैं और फिलहाल कानूनी तौर पर ब्रिटेन छोड़ नहीं सकते। उन्होंने भारत सरकार पर उनके खिलाफ ‘अन्यायपूर्ण’ कार्रवाई करने का आरोप भी लगाया था।

माल्या ने लिखा था कि जो लोग उन्हें ‘भगोड़ा’ कहकर भारत लौटने से इनकार करने का आरोप लगाते हैं। उन्हें यह समझना चाहिए कि वह ब्रिटेन के स्थायी निवासी हैं और फिलहाल देश छोड़ने की स्थिति में नहीं हैं।

कैसे लगा ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ का टैग?

विजय माल्या की बंद हो चुकी एयरलाइन किंगफिशर एयरलाइंस पर बैंकों का बड़ा कर्ज था। माल्या पर बैंकों से लिए गए कर्ज की अदायगी नहीं करने और उससे जुड़े मामलों में कार्रवाई चल रही है।

अक्टूबर 2025 में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया था कि 15 लोगों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है। इस सूची में विजय माल्या के अलावा नीरव मोदी का नाम भी शामिल है।

फरवरी 2026 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने माल्या के मामले में कड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि जो व्यक्ति जानबूझकर न्यायिक कार्यवाही से बच रहा हो, वह अदालत से समानता के आधार पर राहत की मांग नहीं कर सकता। अदालत ने माल्या को यह स्पष्ट करने का अंतिम मौका दिया था कि वह भारत लौटना चाहते हैं या नहीं।

माल्या ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम और खुद को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किए जाने को चुनौती दी है।

विजय माल्या के भारत लौटने पर वकील ने बॉम्बे हाई कोर्ट से क्या कहा

भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि वह भारत लौटने की कोई निश्चित समय सीमा नहीं बता सकते। क्योंकि उन्हें कानूनी रूप से यूनाइटेड किंगडम छोड़ने से प्रतिबंधित किया गया है। विजय माल्या ने अपने वकील अमित देसाई के माध्यम कहा कि उनके पास सक्रिय भारतीय पासपोर्ट नहीं है और इंग्लैंड और वेल्स की अदालतों के आदेशों द्वारा उन्हें ब्रिटेन से बाहर यात्रा करने से भी प्रतिबंधित किया गया है।