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वैक्सीन की कमी पर सफाई देती रही सरकार, इधर जीवनरक्षक रेमडेसिविर की पड़ गई कमी; अब सरकार ने दी दोगुने उत्पादन की मंजूरी

रेमेडिसविर के निर्माताओं ने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में प्रधानमंत्री मोदी का साथ देने के लिए इस सप्ताह के अंत तक कीमत को स्वेच्छा से 3500 रुपये से कम करने का फैसला भी किया है।

Corona, covid-19,Remdesivirसरकार ने रेमडेसिवीर के निर्यात पर लगाया प्रतिबंध (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

सरकार ने देश में वैक्सीन की कमी की शिकायत पर लगातार सफाई देती रही थी। इधर जीवन रक्षक रेमेडिसविर की भी भारी कमी पड़ गई। अब सरकार ने इसकी उपलब्धता बनाए रखने के लिए बुधवार को इसके दोगुने उत्पादन की अनुमति दे दी है।

इस मुद्दे पर पोर्ट, शिपिंग और जलमार्ग और केंद्रीय रासायनिक और उर्वरक राज्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने रेमेडिसविर दवा के सभी मौजूदा निर्माताओं और अन्य हितधारकों के साथ 12 और 13 मार्च को समीक्षा की थी। इस दौरान इसके उत्पादन, आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को कम करने पर विचार किया गया था।

रेमेडिसविर के सात निर्माताओं की वर्तमान कुल स्थापित क्षमता 38.80 लाख शीशी प्रति माह है। छह निर्माताओं को 10 लाख शीशियों / महीने की उत्पादन क्षमता वाले सात अतिरिक्त स्थलों के लिए फास्ट-ट्रैक स्वीकृति दी गई है। 30 लाख शीशियों/महीने का उत्पादन बढ़ाने की और व्यवस्था की जा रही है। इससे विनिर्माण क्षमता लगभग 78 लाख शीशियों / महीने तक बढ़ जाएगी।

रेमेडिसविर के निर्माताओं ने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में प्रधानमंत्री मोदी का साथ देने के लिए इस सप्ताह के अंत तक कीमत को स्वेच्छा से 3500 रुपये से कम करने का फैसला किया है।

अतिरिक्त उपायों के तहत,डीजीएफटी ने घरेलू बाजार में रेमडेसिविर की आपूर्ति बढ़ाने के लिए रेमडेसिविर और रेमडेसिविर एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) इंजेक्शन और प्रक्रिया के निर्यात करने पर 11 अप्रैल को प्रतिबंधित लगा दिया।

सरकार के हस्तक्षेप के बाद निर्माताओं ने निर्यात के लिए रखे करीब 4 लाख शीशी रेमडेसिविर को घरेलू जरूरतों को पूरा करने में लगाने का निर्णय लिया है।

भारत में सात कंपनी करती है उत्पादन: बताते चलें कि भारत में सात कंपनी रेमडेसिवीर इंजेक्शन का उत्पादन करती है। इन कंपनियों में 38.80 लाख यूनिट की उत्पादन क्षमता है। भारत में बने रेमडेसिवीर की दुनिया भर में मांग है। सरकार की तरफ से जारी आदेश के अनुसार राज्यों के हेल्थ सचिवों को ड्रग इंस्पेक्टर के जरिए ये देखना होगा कि कहीं इसकी कालाबाजारी तो नहीं हो रही है। किसी भी तरह के कालाबाजारी की शिकायत पर उचित कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है।

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