Shivsena UBT on Ram Mandir Donation Row: महाराष्ट्र की राजनीति में 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद जब उद्धव ठाकरे की अविभाजित शिवसेना ने बीजेपी से गठबंधन तोड़ा था, तो उसके बाद से हिंदुत्व के मुद्दे को केंद्र में नहीं रखा था। कभी-कभी ही कुछ नेताओं की तरफ से बयान आते थे। इसे शिवसेना के टूटने का अहम कारण बताया गया था। कुछ ऐसा ही रुख शिवसेना यूबीटी ने 2024 के विधानसभा चुनाव तक अपनाया था लेकिन अब उद्धव की पार्टी एक बड़ा बदलाव करने का संकेत दे रही है।

रविवार को शिवसेना यूबीटी के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने दादर के हनुमान मंदिर के बाहर खड़े होकर पार्टी ने राम रक्षा आंदोलन की शुरुआत की। इसमें राम जन्मभूमि आंदोलन उल्लेख किया गया। दूसरी ओर बालासाहेब ठाकरे की भूमिका को याद किया गया। उद्धव ठाकरे ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे और दान की कथित चोरी के मामले में प्रबंधकों पर विश्वासघात करने का आरोप लगाया।

बड़े राजनीतिक उद्देश्य का संकेत?

उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी के इस अचानक बदले हुए इस रुख के केंद्र में राम मंदिर दान में कथित चोरी और चढ़ावे के गबन का मुद्दा है। इसको लेकर पूरा विपक्ष आक्रामक है। यह संकेत देता है कि इस राम रक्षा अभियान के जरिए शिवसेना यूबीटी किसी बड़े राजनीतिक उद्देश्य के लिए योजना बनाने में लगी हुई है।

हाल ही में शिवसेना यूबीटी के 9 में से 6 लोकसभा सांसद शिवसेना शिंदे गुट में शामिल हो गए थे। इतना ही नहीं, मुंबई के वरिष्ठ शिवसेना यूबीटी नेता सचिन अहीर ने भी पाला बदल लिया है। इस बीच राम मंदिर चढ़ावा विवाद के जरिए उद्धव ठाकरे राजनीतिक चर्चाओं से हटाकर विचारधारा की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

विचारधारा को फिर से आधार बनाने की कोशिश

अपने नौ लोकसभा सांसदों में से छह के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के दो सप्ताह से भी कम समय बाद, और मुंबई के वरिष्ठ नेता सचिन अहीर के पाला बदलने के कुछ दिनों बाद, उद्धव ने राजनीतिक चर्चा को दलबदल से हटाकर विचारधारा की ओर मोड़ने की कोशिश की है।

लोकसभा सांसदों द्वारा बगावत के बाद उद्धव ठाकरे ने उनके निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा किया। इसके जरिए उन्होंने कार्यकर्ताओं को पार्टी के लिए मजबूती के लिए आश्वस्त किया। उद्धव के कई राजनीतिक कैंपेन बुरी तरह फेल रहे हैं। उन असफल अभियानों के बाद, उद्धव ठाकरे ने नए सिरे से रविवार को राम रक्षा अभियान शुरू किया है।

राम मंदिर मुद्दे पर फोकस

हनुमान मंदिर में महाआरती और राम रक्षा स्तोत्र, हनुमान चालीसा और मारुति स्तोत्र के पाठ के बाद उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण का अधिकांश भाग हालिया दलबदल के बजाय अयोध्या और राम जन्मभूमि आंदोलन को समर्पित किया। उन्होंने कहा, “हम हिंदू निर्दोष हैं लेकिन मूर्ख नहीं हैं। अगर कोई हमारी आस्था का दुरुपयोग करके मंदिर लूटता है, तो अब हिंदू माफ नहीं करेगा।”

राम जन्मभूमि आंदोलन को याद करते हुए उद्धव ने कहा कि शिवसैनिकों ने शिला पूजन, रथ यात्रा और कार सेवा में भाग लिया था और कई लोगों ने अपना रक्त बहाया और प्राणों की आहुति दी। बीजेपी का नाम लिए बिना ही उद्धव ठाकरे ने सवाल उठाया कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद क्या बदलाव आया है। उन्होंने कहा, “बारह साल पहले, हम मानते थे कि ‘अब हिंदू मार नहीं खाएगा’। इसके बजाय, उन्हें लूटा जा रहा है।”

अपने पूरे भाषण के दौरान उद्धव ठाकरे ने सावधानीपूर्वक भगवान राम को मंदिर ट्रस्ट का प्रबंधन करने वालों से अलग बताया। उन्होंने कहा, “हम भक्तों के दान का प्रबंधन करने वालों से सवाल कर रहे हैं, न कि भगवान राम से।” इसके अलावा उन्होंने तर्क दिया कि राम भक्तों को यह जानने का अधिकार है, कि उनके दान का उपयोग कैसे किया गया है। उन्होंने एक नया नारा भी जारी किया, “जपवा हृदयत राम, मुखात जय श्री राम (अपने हृदय में राम को बसाओ और अपने होठों पर जय श्री राम का उच्चारण करो)।”

हम विचारधारा नहीं बदल रहे…

उद्धव ठाकरे के इस रुख को लेकर शिवसेना यूबीटी के अंदर के ही नेता इस बात पर जोर देते हैं, कि यह अभियान पार्टी की राजनीति में बदलाव का कोई बड़ा संकेत नहीं है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “यह हमारी राजनीति बदलने की बात नहीं है। बालासाहेब ने हिंदुत्व को कभी चुनावी मुद्दा नहीं बनाया। यह पार्टी की विचारधारा थी। हम लोगों को राम जन्मभूमि आंदोलन में शिवसेना की भूमिका याद दिला रहे हैं।” एक अन्य नेता ने कहा कि पार्टी ने जानबूझकर इस मुद्दे को मंदिर के बजाय भक्तों की आस्था के इर्द-गिर्द केंद्रित किया है। उन्होंने कहा, “मुद्दा राम नहीं है। मुद्दा यह है कि क्या भक्तों की आस्था के साथ विश्वासघात हुआ है।”

पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि इस अभियान से हालिया दलबदल से ध्यान हटाकर विचारधारा पर केंद्रित करने में मदद मिली है। इसके साथ ही भगवान राम या मंदिर की किसी भी प्रकार की आलोचना से बचा गया। एक पदाधिकारी ने कहा, “यदि दान में अनियमितताओं के आरोप हैं, तो जिम्मेदार लोगों को जवाब देना चाहिए।”

शिवसेना का अयोध्या कनेक्शन

शिवसेना के लिए राम जन्मभूमि आंदोलन एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। 1966 में मराठी पहचान और भूमिपुत्र आंदोलन के आधार पर स्थापित इस पार्टी ने 1980 के दशक के उत्तरार्ध में अपनी राजनीति का विस्तार किया, क्योंकि बाल ठाकरे ने हिंदुत्व को तेजी से अपनाया।

बाल ठाकरे का नारा, “गर्व से कहो हम हिंदू हैं” उस दौर की पहचान बन गया था। राम जन्मभूमि आंदोलन ने शिवसेना की लोकप्रियता को मुंबई से बाहर तक फैलाया और भाजपा-शिवसेना गठबंधन को महाराष्ट्र में एक प्रमुख राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरने में मदद की, जिसके परिणामस्वरूप 1995 में मनोहर जोशी के नेतृत्व में पहली सरकार का गठन हुआ। बाल ठाकरे के लिए इस आंदोलन ने महाराष्ट्र से परे उनकी राजनीतिक प्रतिष्ठा को भी बढ़ाया और समर्थकों के बीच उनकी छवि को हिंदू हृदयसम्राट के रूप में मजबूत किया था।

6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद जब कई भाजपा नेताओं ने सार्वजनिक रूप से विध्वंस से खुद को अलग कर लिया था, तब बाल ठाकरे ने कहा था कि अगर शिवसैनिकों ने ढांचा ध्वस्त किया है, तो उन्हें उन पर गर्व है। शिवसेना कार्यकर्ताओं के लिए यह बयान उस आंदोलन को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने की उनकी इच्छा का प्रतीक बन गया, जिसे स्वीकार करने में कई अन्य लोग हिचकिचाते थे।

शिवसेना में विभाजन और बदलती राजनीति

साल 2022 में शिवसेना में हुए विभाजन के बाद उस इतिहास ने एक नया राजनीतिक महत्व प्राप्त कर लिया है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पास अब पार्टी का आधिकारिक नाम, धनुष और बाण का चिन्ह और विधायकों के बहुमत का समर्थन है। हालांकि शिवसेना यूबीटी का तर्क है कि बाल ठाकरे की राजनीतिक और वैचारिक विरासत उद्धव ठाकरे के पास ही रहेगी।

पार्टी के सूत्रों का कहना है कि शिवसेना के नाम और चिन्ह को लेकर कानूनी लड़ाई हारने के बाद, अगला मुकाबला अनिवार्य रूप से बाल ठाकरे की विरासत को लेकर होगा। एक अन्य सूत्र ने कहा, “संगठन, विधायक और पार्टी का चिन्ह शिंदे गुट के साथ चले गए हैं। अब सवाल यह है कि राजनीतिक विरासत किसकी होगी। रविवार का चुनाव प्रचार अभियान अयोध्या के साथ-साथ इसी मुद्दे पर भी केंद्रित था, और ये सबसे ज्यादा अहम है।”

बीजेपी का रक्षात्मक रवैया

शिवसेना यूबीटी के लिए यह विवाद बीजेपी को घेरने का अच्छा मौका बन सकता है, जिसके चलते बीजेपी रक्षात्मक रवैया भी अपना सकती है। हालांकि, बीजेपी, शिवसेना यूबीटी के इस अभियान को उद्धव द्वारा 2019 में उससे संबंध तोड़ने के बाद खाली हुई राजनीतिक जगह को फिर से हासिल करने के राजनीतिक प्रयास के तौर पर देख रही है।

इसको लेकर ही चंद्रपुर में बोलते हुए मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने उद्धव पर निशाना साधा था। मुख्यमंत्री ने कहा, “मुझे खुशी है कि उद्धव को भगवान राम की याद आ गई है। वे राम को भूल गए थे और इसी वजह से वे इस स्थिति में पहुंच गए थे। अगर वे भगवान राम के मार्ग पर चलें तो उनके लिए अच्छा होगा। उन्हें प्रतिदिन रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।”

क्या उद्धव ठाकरे को नए अभियान में मिलेगी सफलता?

उद्धव ठाकरे राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद से शुरू हुई ये नई रणनीति सफल होगी या नहीं… इस पर अभी किसी भी तरह का अनुमान लगाना मुश्किल होगा। 1980-1990 के दशक में जब शिवसेना ने बाल ठाकरे के नेतृत्व में राम मंदिर का मुद्दा उठाया था, तो उन्हें फायदा मिला था। हालांकि, उस वक्त वे बीजेपी के साथ थे।

वर्तमान राजनीतिक स्थिति में शिवसेना यूबीटी को उद्धव ठाकरे को लीड कर रहे हैं, जबकि पार्टी विपक्षी महागठबंधन यानी INDIA ब्लॉक का हिस्सा है। राज्य की राजनीति में शिवसेना यूबीटी का कांग्रेस और शरद पवार की पार्टी एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के साथ गठबंधन है।

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राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास का पहला बयान सामने आया है। एक पत्र में उन्होंने मामले को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। 6 जुलाई 2026 को लिखे इस पत्र में महंत नृत्य गोपालदास ने लिखा है, ”श्री रामलला सरकार जी के मंदिर में हुई दान-चोरी से मैं बेहद आहत हूं।” उन्होंने कहा कि अगर चोरी के आरोप सही हैं तो दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। पढ़िए पूरी खबर…