महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे के सामने खड़ा हुआ संकट बढ़ता ही जा रहा है। रविवार को उस्मानाबाद से सांसद ओमराजे निंबालकर ने पुष्टि कर दी कि वे एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो रहे हैं। इस घोषणा से साफ है कि शिवसेना यूबीटी के बागी और छठे सबसे अहम सांसद ने भी उद्धव का साथ छोड़ दिया है।

शिवसेना यूबीटी और अन्य बागी पांचों सासंदों के लिए ओमराजे अहम सांसद इसलिए थे क्योंकि उनके पिता पवन निंबालकर के हत्याकांड में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के भाई पद्मसिंह पाटिल समेत 8 आरोपियों को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने बरी कर दिया था। ऐसे में वह तय नहीं कर पा रहे थे कि वह शिंदे गुट में शामिल हो या न हों।

शिवसेना और बागियों के लिए अहम थे ओमराजे

जानकारी दे दें कि अगर ओमराजे शिदें गुट में शामिल नहीं होते तो बाकी पांचों बागी सांसदों पर दलबदल कानून के तहत कार्यवाही हो सकती थी क्योंकि शिवसेना यूबीटी के पास लोकसभा में कुल 9 सांसद थे। ऐसे में अगर दो तिहाई सासंदों की संख्या यानी 6 ओमराजे को लेकर ही पूरी हो रही थी।

संविधान की 10वीं अनुसूची में साफ लिखा है कि अगर किसी पार्टी के कम से कम दो तिहाई विधायक या सांसद किसी अन्य पार्टी में शामिल होने या नया दल बनाने का फैसला करते हैं तो उन पर दल-बदल कानून लागू नहीं होता और न ही उनकी सदस्यता जाएगी।

क्यों लिया ओमराजे ने यह फैसला ?

अपने समर्थकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं से चर्चा के बाद अपने फैसले की घोषणा करते ओमराजे ने कहा कि धराशिव में स्थानीय निकाय चुनावों में बार-बार मिल हार और सत्ताधारी पक्ष के साथ गठबंधन बनाए रखने में असमर्थता ने निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों को प्रभावित किया है, जिससे उन्हें यह फैसला लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।

नागेश अष्टिकर ने कबूली दल बदलने की बात

कथित ऑपरेशन टाइगर को लेकर शिवसेना यूबीटी के भीतर तनाव बढ़ने के बीच लोकसभा हिंगोली के बागी सांसद नागेश पाटिल अष्टिकर ने रविवार को दावा किया कि वह और अन्य सदस्य 18 जून तक कहीं नहीं गए थे, लेकिन उनके खिलाफ की गई कुछ टिप्पणियों के बाद उन्होंने अपना इरादा बदल दिया। यह पार्टी नेता संजय राउत के खिलाफ एक परोक्ष टिप्पणी थी।

हिंगोली सांसद ने पहली बार पुष्टि की कि वे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो क्लिप में नागेश ने कहा कि उन्होंने अपनी विचारधारा से कोई समझौता नहीं किया है और वे बस एक शिवसेना से दूसरी शिवसेना में चले गए हैं। उन्होंने शिदें गुट ज्वाइन करने के कारणों में क्षेत्र में फंड के कमी के कारण अधूरे कार्यों, विपक्ष में रहने के अन्य नुकसान जैसे कि पार्टी कार्यकर्ताओं का काम न करवा पाने को हवाला दिया।

18 जून तक कहीं नहीं गए थे- नागेश अष्टिकर

नागेश अष्टिकर ने यह भी स्पष्ट किया कि वह शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और पार्टी नेता संजय राउत से नाराज नहीं हैं और कहा, “मैंने और शिवसेना-यूबीटी के कुछ अन्य सांसदों ने 18 जून तक कोई निर्णय नहीं लिया था, हम कहीं नहीं गए थे। हालांकि, गुरुवार से हमारे खिलाफ कुछ टिप्पणियां की गईं, जिससे हमें यह विश्वास हो गया कि यहां (शिवसेना-यूबीटी) रहने का कोई मतलब नहीं है।”

आगे नागेश ने दावा करते हुए कहा, “पार्टी कार्यकर्ताओं का काम इसलिए नहीं हो रहा है क्योंकि हम सत्ता के पक्ष में नहीं हैं। लोगों ने हमें बहुत उम्मीदों के साथ चुना है, और उनका काम करवाना मेरी जिम्मेदारी है। लेकिन मुझे फंड नहीं मिल रही थी। 5 करोड़ रुपये का एमपीएलएडी फंड बहुत सीमित है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए मैंने यह फैसला लिया है।”

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शिवसेना यूबीटी के बागी सांसद नागेश अष्टिकर ने शनिवार को सार्वजनिक रूप से कहा कि वे एकनाथ शिंदे गुट वाली शिवसेना में शामिल होने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला उद्धव ठाकरे के प्रति नाराजगी के बजाय अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों को पूरा करने और धन जुटाने की जरूरत के मद्देनजर लिया गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें