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कोरोनाः इधर भूटान जैसों से ले रहे मदद, उधर मोदी सेंट्रल विस्टा का निर्माण रोकने को नहीं तैयार- शिवसेना का BJP पर निशाना

कोविड-19 महामारी के बढ़ते प्रकोप के बीच इस परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर सरकार को विपक्षी दलों की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

नई दिल्ली/मुंबई | Updated: May 9, 2021 9:15 AM
Central Vista Redevelopment Project के तहत नई दिल्ली में एक नए संसद भवन, एक नए आवासीय परिसर के निर्माण की परिकल्पना की गई है, जिसमें प्रधानमंत्री और उप-राष्ट्रपति के आवास के साथ-साथ कई नए कार्यालय भवन और मंत्रालय के कार्यालयों के लिए केंद्रीय सचिवालय का निर्माण किया जाना है। (फाइल फोटोः पीटीआई)

शिवसेना ने शनिवार को कहा कि कोविड-19 से निपटने में जहां पड़ोस के छोटे देश भारत को मदद की पेशकश कर रहे हैं वहीं मोदी सरकार कई करोड़ के सेंट्रल विस्टा परियोजना के काम को रोकने के लिए भी तैयार नहीं है।

पार्टी ने यह भी कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह समेत पूर्व प्रधानमंत्रियों द्वारा पिछले 70 वर्ष में बनाई गई व्यवस्था ने देश को कठिन समय से पार पाने में मदद की है जिसका सामना वह आज कर रहा है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के एक संपादकीय में कहा, “यूनिसेफ ने डर व्यक्त किया है कि भारत में जिस गति से कोरोना वायरस फैल रहा है उससे दुनिया को वायरस से खतरा है। इसने यह भी अपील की है कि अधिकतम देशों को कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में भारत की मदद करनी चाहिए। बांग्लादेश ने रेमडेसिविर की 10,000 शीशियां भेजी हैं जबकि भूटान ने चिकित्सीय ऑक्सीजन। नेपाल, म्यांमा और श्रीलंका ने भी ‘आत्मनिर्भर’ भारत की मदद की पेशकश की है।”
इसमें कहा गया, “साफ तौर पर, भारत नेहरू-गांधी द्वारा बनाई गई व्यवस्था के सहारे है। कई गरीब देश भारत को मदद की पेशकश कर रहे हैं। इससे पहले, पाकिस्तान, रवांडा और कॉन्गो जैसे देश दूसरों से मदद लेते थे। लेकिन आज के शासकों की गलत नीतियों के चलते, भारत आज इस स्थिति से गुजर रहा है।”

शिवसेना ने कहा कि जहां गरीब देश अपने-अपने तरीके से भारत की मदद कर रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20,000 करोड़ रुपये की महत्त्वकांक्षी सेंट्रल विस्टा परियोजना को रोकने के लिए तैयार नहीं है। पार्टी ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि किसी को भी इस बात का अफसोस नहीं है कि एक तरफ भारत बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान जैसे देशों से मदद ले रहा है वहीं दूसरी तरफ मोदी नये संसद भवन और प्रधानमंत्री आवास के निर्माण के लिए कई करोड़ की सेंट्रल विस्टा परियोजना का काम रोकने को तैयार नहीं हैं।

शिवसेना ने कहा कि दुनिया कोविड-19 वैश्विक महामारी की दूसरी लहर से जूझ रही है और विशेषज्ञों का अनुमान है कि तीसरी लहर और खतरनाक होगी। लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा को आज भी बस पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को कैसे भी घेरने की पड़ी है। इसने कहा कि भाजपा सांसद सुब्रमण्यिन स्वामी ने स्वास्थ्य मंत्रालय केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को देने की मांग की है और यह इस बात का सबूत है कि मौजूदा स्वास्थ्य मंत्रालय पूरी तरह विफल रहा है।

“सेंट्रल विस्टा परियोजना के दायरे में जामुन के पेड़ नहीं उखाड़े गए”: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार को कहा कि सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के दायरे में आने वाले जामुन के पेड़ों को उखाड़ा नहीं गया है। साथ ही जोर दिया कि विरासत को दर्शाने वाली लैंप पोस्ट जैसी चीजों को दोबारा लगाया जाएगा। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री सिंह ने कहा कि परियोजना के तहत केवल कुछ ही पेड़ों का प्रत्योरोपण किया जाएगा और दावा किया कि कुल हरियाली क्षेत्र में भी इजाफा होगा। एक दिन पहले ही रपटों में दावा किया गया था कि सेंट्रल विस्टा परियोजना के चलते जामुन के कई पेड़ उखाड़े जा सकते हैं।

बता दें कि इस परियोजना के तहत एक नए संसद भवन, एक नए आवासीय परिसर के निर्माण की परिकल्पना की गई है जिसमें प्रधानमंत्री और उप-राष्ट्रपति के आवास के साथ-साथ कई नए कार्यालय भवन और मंत्रालय के कार्यालयों के लिए केंद्रीय सचिवालय का निर्माण किया जाना है। कोविड-19 महामारी के बढ़ते प्रकोप के बीच इस परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर सरकार को विपक्षी दलों की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

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